
अमरावती/दि.13 – हमेशा विवादों में रहनेवाले इर्विन अस्पताल के डॉक्टरों का कारनाम फिर एक बार मंगलवार की रात दिखाई दिया. जहां मौत और जिन्दगी के बीच संघर्ष कर रहे मजदूर पर किए गये उपचार को देखते हुए इर्विन अस्पताल की उपाय योजना तथा अब सुविधाओं पर सवालिया निशान खडा हो गया. सडक दुर्घटना में ट्रक की चपेट में आनेवाले मजदूर ने अपने दोनों पैर गंवा दिए थे. जिसमें उक्त मजदूर का ऑपरेशन थिएटर में न ले जाकर ओपीडी में ही उसका उपचार करते डॉक्टर दिखाई दिए.
प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश बैतूल जिले अंतर्गत आनेवाले उमाला निवासी राजू शेलोकर व उसका दोस्त निलेश शेलोकर यह कांटेपूर्णा यहा पर काम के सिलसिले मेें यहां आए हुए थे. मंगलवार को अपना काम निपटाकर राजू और निलेश मोटर साइकिल पर सवार होकर अपने गांव की ओर वापस जाने के लिए निकले. किंतु अचानक लोणी से बडनेरा मार्ग के बीच विपरित दिशा से आ रहे ट्रक ने मोटर साइकिल को जोरदार टक्कर मारी. जिसमें निलेश बाल बाल बच गया. किंतु राजू के दोनों पैर पहिए के नीचे आने से बुरी तरह से टूट गये. दोनों ही घायलों को जैसे तैसे पास के लोगों ने इर्विन अस्पताल पहुंचाया. जहां घायल राजू पर ओपीडी के बेड पर ही उपचार शुरू कर दिया गया. जिसमें बद किस्मती से राजू का पैर काटना पडा. इतना ही नहीं कटे हुए पैर को ढाकने के लिए अस्पताल में कपडा भी नहीं था. डॉक्टरों ने उसे पीपीई कीट पहना दी. इस तरह का लापरवाही भरा मामला सामने आया.