वसंत ऋतु के स्वागत में खिले पलाश के फूल
प्राकृतिक रंग और औषधि बनाने के लिए किया जाता है इस्तेमाल
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चिखलदरा /दि. 7– वसंत ऋतु की शुरुआत होते ही पलाश के फूल खिलने लगते है. यह लाल रंग के मनमोहक फूल जैसे वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देते है. आदिवासी बहुल चिखलदरा परिसर में पलाश के फूल सभी का मन मोह रहे है.
अचलपुर तहसील डोंगराल क्षेत्र में पलाश के फूल वहां केवल वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए ही नहीं खिले है, बल्कि यह फूल वहां के रहनेवाले लोगों का मन भी मोह रहे है. ग्रीष्मकाल शुरु होते ही पलाश के पेडों पर लाल रंग के फूल खिलना शुरु हो जाते है. इन फूलों को देखकर मन प्रसन्न हो जाता है. पलाश के फूल खिलने से पहले काले रंग की कली आती है और उसके बाद वह लाल रंग के फूल में परिवर्तित हो जाती है. पलाश के फूलों से रंग बनाया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में पलाश के पत्तों का उपयोग पत्तल बनाने के लिए किया जाता है. इतना ही नहीं, पलाश के फूलों का औषधियां बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. पलाश की लकडी का इस्तमाल यज्ञ में समिधा के रुप में किया जाता है. पलाश के फूलों को पानी में डालने पर भगवा रंग बनता है और उसी रंग से ग्रामीण क्षेत्रों में होली खेली जाती है. इसके अलावा पलाश के बिजों से बना तेल त्वचा के लिए लाभदायी है और इसकी लकडी का उपयोग गृहनिर्माण में भी किया जाता है.