बच्चों को सरकारी छात्रावास में रखने को लेकर अभिभावक चिंतित
समाज कल्याण विभाग सतर्क, सुरक्षा के सभी उपायों की ओर दिया जा रहा ध्यान

अमरावती/दि.30 – मुंबई के सरकारी छात्रावास में एक छात्रा की हत्या होने की घटना पश्चात छात्रावास में रहने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा पर एक तरह से सवालियां निशान लग गया है. साथ ही छात्रावास में अपने बच्चे सुरक्षित नहीं रहने की भावना अभिभावकों में पैदा हो गई है. जिसके चलते अपने बच्चों को बडे शहर में पढने-लिखने हेतु भेजकर सरकारी छात्रावास में रखा जाए, अथवा नहीं इसे लेकर अभिभावकों में काफी हद तक संभ्रम बना हुआ है.
बता दें कि, अमरावती जिले में सामाजिक न्याय व विशेष सहाय विभाग कार्यालय द्बारा कुल 24 सरकारी छात्रावास चलाए जाते है. जिसमें से छात्राओं के लिए 13 और छात्रों के लिए 11 छात्रावास है. इन छात्रावासों से बाहर निकलते समय इसकी जानकारी रजिस्टर में करनी पडती है. साथ ही छात्रावास में रहने वाले किसी भी छात्र अथवा छात्रा का व्यवहार यदि ठीक नहीं है, तो उसके बारे में उसके अभिभावकों को सूचित किया जाता है. इसके अलावा समाज कल्याण विभाग से संबंधित अधिकारी कभी-कभी अचानक छात्रावास को भेंट देते हुए वहां रहने वाले छात्र-छात्राओं की दिक्कतों को समझने का काम करते है. साथ ही छात्रावास परिसर में नजर रखने हेतु सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए है.
* जिले में सामाजिक न्याय विभाग के 24 छात्रावास
जिले में सामाजिक न्याय विभाग के कुल 24 छात्रावास है. जिनकी प्रवेश क्षमता 2,990 है. इन सभी छात्रावासों में प्रतिवर्ष प्रवेश पूरे होते है.
* छात्राओं के 13 छात्रावास
जिले में समाज कल्याण विभाग द्बारा छात्राओं के लिए 13 होस्टल चलाए जाते है. जिनकी प्रवेश क्षमता 1465 है और प्रतिवर्ष इन सभी छात्रावासों में पूरी क्षमता के साथ प्रवेश होते है.
* छात्रावासों में रहने को लेकर कोई दिक्कत तो नहीं
– लडकियों का छात्रावास जेल क्वॉटर परिसर में है. इस परिसर में आने-जाने हेतु किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं आती.
– छात्रावास में सभी छात्र व छात्राएं पढाई-लिखाई के लिए रहते है. ऐसे में उन्हें अनुशासन बनाए रखने हेतु कुछ नियमों का पालन करना होता है. साथ ही छात्रावास से बाहर निकलते समय रजिस्ट्रर पर इसकी जानकारी भी दर्ज करनी होती है. साथ ही सभी निर्देशों व नियमों का पालन करना होता है.
– समाज कल्याण विभाग के अधिकारी महिने में कम से कम एक बार छात्रावास को आकस्मिक भेंट देकर वहां रहने वाले छात्र-छात्रों की समस्यां को जानते है.
– सभी छात्रावासों में सुरक्षा रक्षक तैनात रहते है. विशेष तौर पर लडकियों के छात्रावासों में सुरक्षा रक्षकों की तैनाती को लेकर विशेष सतर्कता भी बरती जाती है.
– छात्रावास की इमारत सहित परिसर में सीसीटीवी कैमरों के जरिए नजर रखी जाती है. साथ ही छात्रावास में आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर नजर रखने के साथ ही उनकी जानकारी भी दर्ज की जाती है.
– इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए बच्चों को सरकारी छात्रावासों में रखने को लेकर कोई समस्या या दिक्कत तो नहीं है.
* छात्रावासों में सभी छात्र, छात्राओं की ओर विशेष ध्यान दिया जाता है. जिसके लिए छात्रावासों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के साथ ही सुरक्षा रक्षकों की तैनाती भी होती है. छात्रावास के किसी भी काम के लिए बाहर जाते समय बच्चों को रजिस्टर में इसकी जानकारी दर्ज करनी होती है और बाहर से आने वाले किसी व्यक्ति की जानकारी भी छात्रावास में दर्ज की जाती है. ऐसे में छात्रावासों को छात्र-छात्राओं के लिए पूरी तरह से सुरक्षित कहा जा सकता है.
– माया केदार,
सहायक आयुक्त,
समाज कल्याण विभाग