छात्रों और प्रशासन के बीच संघर्ष निर्माण होने की संभावना
छात्रवृत्ति का सदोष वितरण

* छात्रवृत्तिधारक 17 छात्रों के हॉल टिकट अटके
* ऐन परीक्षा के समय बडी दिक्कत
अमरावती/दि.12-अंतिम परीक्षा के सामने हॉल टिकट अटकने से छात्रवृत्ति धारक 17 हजार छात्रों के सामने नई समस्या पैदा हो गई है. केंद्र सरकार ने इस साल से ट्यूशन फीस की रकम छात्रों के खाते में जमा करने का फैसला किया है. इस अजब नीति के कारण, कॉलेज प्रशासन में धांधली निर्माण हो गई है. कुछ कॉलेजों ने एक फतवा जारी किया है कि छात्र हमें वह रकम अभी दें, अन्यथा हॉल टिकट नहीं दिया जा सकता. वहीं दूसरी ओर यह रकम हमारे खाते में अब तक जमा ही नहीं हुई तो कैसे दें, यह सवाल छात्र कर रहे है. इसलिए अधिकांश महाविद्यालयों में विद्यार्थी-प्रशासन ऐसा संघर्ष निर्माण हो रहा है. शिक्षा शुल्क की रकम छात्रों के शिक्षा हेतु कॉलेजों को दी जाती है. छात्रवृत्ति की रकम में इसका समावेश होता है. हर साल यह रकम सीधे कॉलेज के खाते में जमा की जाती थी, किंतु सरकार विद्यार्थी हित में है, यह दर्शाने के चक्कर में इसबार यह रकम छात्रों के खाते में जमा की जाएगी, जिसके कारण यह दिक्कत निर्माण हो गई है.
भारत सरकार के सामाजिक न्याय विभाग के माध्यम से अनुसूचित जाति (एससी) के छात्रों को पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है. जिन छात्रों को छात्रवृत्ति के लिए चुना गया है वे पूर्ण शुल्क देने वाले छात्र इसमें शामिल है. हर साल यह राशि सीधे कॉलेज के खाते में जमा की जाती थी. फर्क सिर्फ इतना है कि उन्हें फीस खुद नहीं चुकानी पड़ती है, सरकार उनकी तरफ से इसका भुगतान करती है. सरकार ने इसके लिए पहले ही दो खातों का चयन कर लिया है. एक अकाउंट कॉलेज का है और दूसरा बाकी स्टूडेंट्स का.
विगत वर्ष तक जो रकम कॉलेजों को देय है, वह रकम कॉलेज के खाता में जमा की जाती थी. जिससे कोई दिक्कत नहीं होती थी. दोनों बैंक खातों को अपना अपना हिस्सा मिलता था. परंतु केंद्र सरकार ने इस वर्ष से 60-40 नीति स्वीकारी है. जिसके कारण छात्रवृत्ति की कुल रकम में से 60 प्रतिशत रकम छात्रों के खाते में तथा शेष 40 प्रतिशत रकम कॉलेज के खाते में जमा की जाएगी. किंतु अब तक कुछ छात्रों को छात्रवृत्ति का का पहला चरण प्राप्त नहीं हुआ. इसलिए हमेशा देरी से मिलने वाला दूसरा चरण कब जमा होगा और इसमें शिक्षा शुल्क की रकम कब आएगी? इसको लेकर छात्रों में संभ्रम निर्माण है.
* छात्र हित की भूमिका लेंगे
छात्र शिक्षा प्रणाली का केंद्र बिंदु है. इसलिए सरकार को पहले उन पर विचार करना चाहिए. जो रकम छात्रों को अब तक मिली ही नहीं उस की मांग करते हुए हॉल टिकट रोकने की भाषा करना उचित नहीं. सरकार को इस संबंध में संबंधित कॉलेजों को निर्देशित करना चाहिए. ऐसा नहीं होने पर एआईएसएफ आंदोलनात्मक रुख अख्तियार करेगा.
– प्रो. कैलास चव्हाण, सीनेट सदस्य, अमरावती विद्यापीठ
* …. तो ही हम गारंटी स्वीकार करेंगे
इस संबंध में विदर्भ शासकीय विज्ञान संस्थान के प्रभारी संचालक डॉ. जब भंडारकर से संपर्क करने पर उन्होंने माना कि सरकार की नई नीति से भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है. लेकिन जो छात्र शिक्षा शुल्क की राशि जमा नहीं कर पाएंगे उन्हें गारंटी के आधार पर राहत दी जाएगी. क्योंकि फीस जमा नहीं हुई है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र का हॉल टिकट ब्लॉक नहीं किया जाएगा.
* गारंटी पत्र देने की तैयारी
कई विद्यार्थियों ने कॉलेजों को गारंटी पत्र देने की तैयारी की है. उनका कहना है कि हम ट्यूशन फीस तब भरेंगे जब दूसरे चरण की स्कॉलरशिप हमारे खाते में आ जाएगी. दूसरे चरण की छात्रवृत्ति प्राप्त करते समय ट्यूशन फीस भी छात्र के खाते में जमा कर दी जाएगी. इसलिए छात्र मांग कर रहे हैं कि तब तक अनुमति दी जाए.