
* नेट परीक्षा में 87 पर्सेंटाईल लेकर की सफलता हासिल
* आईएएस की परीक्षा के लिए कर रही है तैयारी
अमरावती/दि.21 – बचपन से ही घर की परिस्थिति काफी हलाकान और पिता का उत्पन्न काफी अल्प और मां मेहनत मजदूरी कर किसी तरह पांच सदस्यों वाले परिवार का पालन पोषण कर रही थी. लेकिन बेटी की शिक्षा पूर्ण करने की जिद के आगे परिवार के सदस्य भी उसे प्रोत्साहित करने मजबूर हो गए. रेखा धुर्वे नामक छात्रा ने नेट परीक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर 87 फीसदी अंक प्राप्त कर शानदार सफलता प्राप्त की. आदिवासी समाज की इस छात्रा का शिक्षा का यह सफर काफी प्ररेणादायी साबित हो रहा है. अब जिलाधिकारी पद की परीक्षा की तैयारी में रही रेखा परिवार को आर्थिक आधार देने के लिए निजी महाविद्यालय में नौकरी कर रही है.
स्थानीय हनुमान नगर निवासी रेखा कमल धुर्वे नामक छात्रा ने बुधवारा की मनपा शाला में 10 वीं तक पढाई करते हुए प्राविण्यता प्राप्त की. तत्कालीन आयुक्त अरुण डोंगरे ने उसके घर जाकर सराहना करते हुए उसे प्रोत्साहित किया था और भविष्य में उसके काफी आगे बढने की अपेक्षा व्यक्त की थी. यह बात वर्तमान में सही साबित हुई है. कक्षा 12 वीं में भी प्रावीण्य सूची में स्थान कायम रखते हुए रेखा ने संत गाडगे बाबा अमरावती विद्यापीठ से कला शाखा से पदवी और इतिहास विषय से स्नातक अभ्यासक्रम भी प्रावीण्य श्रेणी में पूर्ण किया. रेखा का शिक्षा का यह प्रवास अनेकों के लिए प्रेरणादायी है. पांच सदस्यों के परिवार में मुखिया कमल धुर्वे मजदूरी कर उपजीविका चलाने वाले और उन्हें पत्नी ने साथ दिया. इसके बावजूद परिवार का घर खर्च चलाना दोनों के लिए कठिन था. लेकिन रेखा ने ऐसी परिस्थिति में भी अपने शिक्षण की जिद्द नहीं छोडी. उसने अपनी इसी जिद्द और लगन से स्नातक तक शिक्षा प्राविण्यता प्राप्त करते हुए हासिल की और अपने माता-पिता के प्रयासों को सफल किया. पश्चात नेट परीक्षा में भी राष्ट्रीय स्तर पर 87 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सफलता का सीढी को आगे बढाया. वर्तमान में रेखा शिवाजी कला व वाणिज्य महाविद्यालय में आंशकालीन प्राध्यापिका के तौर पर कार्यरत हैं. सादगी से अपना जीवन जीने वाली रेखा महाविद्यालय में साइकिल से जाती है. यूपीएससी की तैयारी उसकी शुरु है. आईएएस की परीक्षा देने का उसका मानस है.
* शिक्षकों ने काफी सहायता की
शिक्षा लेते समय परिस्थिति के कारण काफी समस्याएं आई. लेकिन शिक्षण में लगन को देखकर मनपा कन्या शाला बुधवारा और महाविद्यालय के शिक्षकों ने भी हर दफा काफी सहायता की. गरीबी शिक्षा में रोडा नहीं आ सकती. अब यूपीएससी की तैयारी शुरु की है.
– रेखा धुर्वे, अमरावती.