
अमरावती/प्रतिनिधि दि.७ – बुलढाणा जिले के चितोडा (अंबिकापुर) में सवर्ण व दलित परिवार में व्यक्तिगत विवाद हुआ था. उस मामले में सवर्णों के पक्ष में विधायक संजय गायकवाड सामने आये और उन्होंने दोनों समाज का विवाद सामंजस्य से मिटाने की बजाए एट्रासिटी एक्ट अंतर्गत बेताल बयानबाजी कर दो समाज में तेढ निर्माण करने का प्रयास किया है. एट्रासिटी एक्ट यह पिछडा वर्गीय समाज को भारतीय संविधान ने दिया हुआ मौलिक अधिकार है. वह दलितों का कवचकुंडल है. व्यवस्था ने जिनके मानवी अधिकार छिन लिये उन्हें मानवी हक्क बहाल करने वाला संविधान सर्वोच्च और संविधान ने प्रदान किया कानून लोकनियुक्त प्रतिनिधि संजय गायकवाड अमान्य करते है, यह चिंताजनक बाब है, ऐसा कहते हुए मानवी हक्क सुरक्षा दल व मानवी हक्क अभियान ने विधायक संजय गायकवाड पर एट्रासिटी एक्ट के तहत कार्रवाई करने की मांग की है. आज यहां पत्रकार परिषद में मानवी हक्क अभियान के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष दादासाहेब क्षिरसागर, मानवी हक्क सुरक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष भाई जगदीश इंगले, सामाजिक कार्यकर्ता प्रा.बबन इंगोले, देवानंद वानखडे, विष्णुपंत गवली व शेख नूर ने यह मांग की.
पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कायदा काही भी रहे वह दुधारी तलवार की तरह रहता है.उसका उपयोग और दुरुपयोग करने वाले लोगों पर अमल लाने की मानसिकता पर निर्भर रहता है. किंतु संजय गायकवाड केवल एट्रासिटी का दुरुपयोग के संबंध में एक तरफा बोलते है और एट्रासिटी अंतर्गत आने वाले समूह का एक प्रकार से अपमान करते है. एट्रासिटी लगाने वालों के खिलाफ डकैती के झूठे अपराध दर्ज करे, इस तरह का चेतावनी युक्त बयान विधायक संजय गायकवाड व्दारा करने से एट्रासिटी अंतर्गत आने वाले समुदाय में भय निर्माण हुआ है, इस तरह का बयान यानी एट्रासिटी एक्ट अंतर्गत आने वाले समूह का मनोबल तोडन व एट्रासिटी विरोध में रहने वाले समूह को प्रोत्साहित करना, एक विधायक ने गैर जिम्मेदाराना बयान कर दो समाज में तनाव निर्माण किया है. इसका निषेध करते हुए भारतीय संविधान ने बहाल किये हुए कानून के विरोध में बोलने वाले संजय गायकवाड को एट्रासिटी एक्ट के तहत कार्रवाई करने की मांग इस समय की गई.