
धामणगांव रेलवे/दि.22- विद्यां ददाति विनयं,विनयाद् याति पात्रताम् ।पात्रत्वात् धनमाप्नोति,धनात् धर्मं ततः सुखम् ॥विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता आती है, पात्रता से धन आता है, धन से धर्म होता है, और धर्म से सुख प्राप्त होता है, यह विवेचन श्री राम कथा वाचक राधारानीजी ने किया. उन्होंने भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि, आज की शिक्षा पद्धति इससे बिल्कुल विपरीत है.
माहेश्वरी महिला मंडल एवं तहसील माहेश्वरी महिला संघठन द्वारा आयोजित श्री राम कथा में वाचक श्री राधारानीजी आज राम बाल लीला के अवसर पर कथा सुनाते हुए शिक्षा पर उचित मार्गदर्शन कर रही थी. इस दरमियान उन्होंने कहा आज शिक्षा हमारे ग्रंथ नहीं पढ़ाती पहले हम शिक्षा स्थल को मां सरस्वती का वास समझते थे और वहां तक जूते चप्पल भी नहीं लेकर जाते थे किंतु आज शिक्षा स्थल पर जूते चप्पल तो छोड़िए उससे भी घृणास्पद समय आया हुआ है.
प्रातःकाल उठकर माता-पिता और गुरु को मस्तक नवाते हैं और आज्ञा लेकर नगर का काम करते थे. सर्वस्व ज्ञानी प्रभु मानव रूप में थे और राम अवतार में उन्होंने मात-पिता और गुरु को महत्व दिया. सर्वज्ञानी होकर भी गुरुकुल पहुंचकर शिक्षा ग्रहण की श्री राम ने व्यवहारिक ज्ञान गुरु वशिष्ट से पाया और दीक्षा अध्यात्मिक ज्ञान विश्वामित्र से हासिल किया अनेक राक्षसों का धारण कर बाल अवस्था में है धर्म की रक्षा का अपना पहला कदम उठाया. बाल राम लीला के अवसर पर झांकी में राम-दूर्वांग टावरी, लक्ष्मण- ध्रुव मूंधड़ा, भरत- हार्दिक मूंधड़ा, शत्रुघन- प्राची राठी ने भूमिका निभाई.