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शपथविधि को लेकर 10 वर्ष पुराने इतिहास की पुनरावृत्ति

तब उद्धव ठाकरे फंसे थे पेंच में, अब आयी शिंदे की बारी

मुंबई/दि.5 – राज्य में महायुति की सरकार के शपथविधि समारोह का ेलेकर विगत दो दिनों से रहने वाला सस्पेंस आखिरकार आज खत्म हुआ और एकनाथ शिंदे डेप्यूटी सीएम बनने हेतु राजी हुए. साथ ही शिंदे के नाम का पत्र राजभवन भेजा गया. इसके साथ ही 10 वर्ष पुराने इतिहास की पुनरावृत्ति होती दिखाई दी. फर्क केवल इतना रहा कि, सन 2014 में शिवसेना के पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे तकनीकी पेंच में फंसे थे. वहीं अब वर्ष 2024 में शिंदे गुट वाली शिवसेना के मुखिया एकनाथ शिंदे पेंच में फंसे दिखाई दिये.
बता दें कि, वर्ष 2014 का विधानसभा चुनाव सभी राजनीतिक दलों ने स्वतंत्र तौर पर लडा था. उस समय 122 सीटें जीतकर भाजपा सबसे बडी राजनीतिक पार्टी बनी थी. वहीं 63 सीटें जीतकर शिवसेना दूसरे स्थान पर थी. उस वक्त भाजपा को बहुमत साबित करने हेतु 23 विधायकों के समर्थन की जरुरत थी. जिसकी वजह से शिवसेना की ‘बार्गेनिंग पॉवर’ बढ गई थी. उस वक्त 41 सीटें जितने वाले शरद पवार की राकांपा ने भाजपा को बाहर से समर्थन देते हुए शिवसेना को झटका दिया था. जिसके चलते फडणवीस मुख्यमंत्री बने थे और भाजपा की सरकार बनी थी. वहीं दूसरे स्थान पर रहने वाली शिवसेना को दो माह तक विपक्ष में बैठना पडा था. इस दौरान एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना विधायकों ने पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे पर भाजपा के साथ सत्ता में शामिल होने को लेकर दबाव बनाया था और कहा था कि, शिवसेना पिछले 15 वर्षों से विपक्ष में बैठी है और अब पार्टी का सत्ता में जाना जरुरी है. जिसके चलते 5 दिसंबर 2014 को ही फडणवीस सरकार में शिवसेना शामिल हुई थी. जिसके लिए एकनाथ शिंदे की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी. वहीं अब 10 वर्ष बाद 5 दिसंबर 2024 को एक बार फिर भाजपा व शिवसेना के समावेश वाली सरकार बनने जा रही है. जिसमें देवेंद्र फडणवीस के साथ एकनाथ शिंदे भी शामिल है.
उल्लेखनीय यह भी है कि, इस बार सत्ता स्थापना को लेकर उठापठक जारी रहते समय शिवसेना के पूरे सूत्र एकनाथ शिंदे के ही पास है. लेकिन इस बार भी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की वजह से ही शिवसेना की ‘बार्गेनिंग पॉवर’ कमजोर हुई है. क्योंकि अजीत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने पहले ही मुख्यमंत्री पद हेतु देवेंद्र फडणवीस को अपना समर्थन दे दिया है तथा भाजपा व राकांपा का एकत्रित संख्याबल बहुमत से अधिक रहने के चलते शिवसेना को कुछ हद तक ‘बैक फुट’ पर आना पडा.
सूत्रों के मुताबिक मौजूदा राजनीतिक स्थिति में सत्ता से बाहर रहकर भाजपा व राकांपा की सरकार को समर्थन देने का विचार एकनाथ शिंदे द्वारा किया जा रहा था. परंतु उनके विधायकों ने सत्ता में शामिल होने का ठीक उसी तरह आग्रह किया. जिस तरह का आग्रह 10 वर्ष पहले खुद एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के सामने किया था और जिस तरह से वर्ष 2014 में अपने विधायकों के आग्रह को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने सत्ता में शामिल होने का निर्णय लिया था. ठीक उसी तरह इस बार एकनाथ शिंदे ने सत्ता में शामिल होने व डेप्यूटी सीएम का पद स्वीकार करने का निर्णय लिया.

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