
अमरावती / दि.१७– यहां के शासकीय विदर्भ ज्ञान विज्ञान संस्था के यानि पहले के विदर्भ महाविद्यालय विएमवि के ४३ वर्ष पूर्व के छात्रों ने एकजुट होकर संस्था के विकास के लिए योगदान देने का सुनिश्चित किया है. वर्तमान में विविध क्षेत्र में कीर्तिवान इन पूर्व छात्रों का सम्मेलन हालही में हुआ. इस सम्मेलन में पूर्व छात्रों ने यह संकल्प किया है. यह सभी विद्यार्थी १९८० के बैच के है. विएमवि में बीएससी के छात्र रहे है. इनमें से शरद जिचकार वर्तमान में प्रादेशिक परिवहन अधिकारी है. उनकी ही अध्यक्षता में सम्मेलन आयोजित किया गया. इसी विभाग से सेवानिवृत्त हुए एआरटीओ ज्ञानदेव मोडक की अगुवाई में आयोजित सम्मेलन में देश के विविध स्थान में रहने वाले अधिकांश पूर्व छात्र उपस्थित थे. इनमें पूर्व पालकमंत्री व राज्य के पूर्व वनराज्यमंत्री जगदिश गुप्ता, मिशन आईएएस के संचालक प्रा.डॉ.नरेशचंद्र काठोले बतौर अतिथि उपस्थित थे. विदर्भ महाविद्यालय को १०० साल पूरे हो रहे है. इस उपलक्ष्य में इस सम्मेलन को विशेष महत्व प्राप्त हुआ है. बडनेरा रोड पर मोडक के फार्म हाऊस में आयोजित सम्मेलन में संस्था के हित में अनेक निर्णय लिए गए. हर ६ महिने के बाद सम्मेलन लेने का प्रस्ताव भी मंजूद किया गया. कार्यक्रम दौरान सामाजिक कार्या में हमेशा अग्रसर रहने वाले ज्ञानदेव मोडक का मिशन आईएएस द्वारा सम्मानपत्र देकर सम्मान किया गया. अत्यंत विपरित हालातों में विदर्भ महाविद्यालय में शिक्षा लेकर अनेक विद्यार्थी आज उच्च पदों पर काम कर रहे है. ऐसी स्थिति वर्तमान में अध्ययनरत छात्रों की भी है. इसलिए जरूरतमंद छात्रों की मदद करने का निर्णय सम्मेलन में लिया गया. इस अवसर पर राज्य के मुख्य वनसंरक्षक रवींद्र वानखडे, विद्यापीठ के ग्रंथपाल डॉ.मोहन खेरडे, बांबू गार्डन व ऑक्सिजन पार्क के निर्माता वनाधिकारी अशोक कविटकर, उप जिलाधिकारी मोहन पातुरकर, उपजिलाधिकारी विनोद शिरभाते, प्राचार्य हरिदास भुस्कट, प्रा. डॉ. मनोहर येऊल, मुख्याध्यापक दिव्यानंद माथने, उद्योजक परमानंद मोटवानी, किसान दिलीपसिंह नहाटा, पंजाब नेशनल बैंक के मैनेजर मनोहर वासनकर, प्रा.एन.बी.राऊत, प्राचार्य भास्करराव शिंगणे, वनपरिक्षेत्र अधिकारी मिलींद तोरो, प्रा.दिलीप देशमुख, डॉ.विनोद पाटील, सुरेंद्र ठाकरे, उद्योजक महेश सोमानी, किशोर संपले, आशोक दोशी, विनोद रुमाले, मातोश्री वृद्धाश्रम के राजेंद्र राऊत, संगीता राऊत, सुरेश कनोजिया उपस्थित थे.
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