‘साधयती संस्कार भारती भारते नवजीवनम्’
‘पाडवा पहाट’ के रजत महोत्सव पर एक से बढकर एक सुंदर गीत व नृत्यों की प्रस्तुति

* गणेश स्तवन व गीत रामायण के समूह नृत्य ने सभी का मन मोहा
* व्यंकटेश लॉन में मराठी नववर्ष के अवसर पर संस्कार भारती का आयोजन
अमरावती /दि.31– गुढी पाडवा से प्रारंभ होने वाले हिंदू नववर्ष का स्वागत जल्लोष के साथ तथा पारंपारिक सुसंस्कृत पद्धति से कैसे किया जा सकता है. यह बीते 25 वर्षों से लगातार दिखाते आ रही संस्कार भारती ने इस बार पाडवा पहाट के रौप्य महोत्सवी कार्यक्रम में रजत महोत्सव सुवर्ण पलों के साथ प्रस्तुत किया. अमरावतीवासियों की नये साल की प्रभात व्यंकटेश लॉन में सुबह 5.30 बजे शंखनाद के साथ होती आयी है. इस वर्ष भी विश्वावसुनाम संवत्सर का प्रारंभ ‘साधयती संस्कार भारती भारते नवजीवनम्’ इस ध्येय गीत से हुआ और अगले ढाई घंटे हजारों प्रेक्षकों की गवाही में चला यह कार्यक्रम एक से बढकर एक सुंदर गीतों, नृत्यों और नाट्य प्रवेश से सजा.
‘मोरया मोरया’ इस गणेश स्तवन के बाद गीत रामायण के ‘राम जन्मलाग सखे’ इस गीत पर आकर्षक समूह नृत्य की प्रस्तुति की गई. उसके बाद वर्षा ऋतु का वर्णन करने वाला ‘गरज गरज’ नृत्य और श्रीरामचरित का स्मरण करने वाला त्रिवार जय जयकार प्रस्तुत हुआ. नई पीढी मोबाइल, गेम्स और नूडल्स की शिकार होने से उनका स्वास्थ्य कैसे प्रभावित हुआ है और उस पर उपाय क्या, यह दर्शाने वाला अनोखा लघुनाट्य पाडवा पहाट की विशेषता थी. शिवाजी महाराज की विशेषता थी. शिवाजी महाराज को गायी हुई ‘गुणी बाळ’ यह अंगाई, महाराष्ट्र की लोकधारा दर्शाने वाला ‘लल्लाटी भंडार’ नृत्य, विभिन्न प्रदेशों के लोकनृत्यों के प्राकृतिक स्वरुप के तौर पर ‘घूमर घूमर’ की भी प्रस्तुति की गई. उसके बाद विठू माउली की दिंडी को प्रेक्षकों ने सिर पर उठा लिया. इस कार्यक्रम का संचालन प्रा. रसिका वडवेकर, रसिका वैष्णव व गायत्री खरे ने किया.
नए साल का सूर्योदय होते ही परंपरागत गुढी का पूजन किया गया. बीते 25 वर्षों की ‘पाडवा पहाट’ की राह में विशेष सहयोग प्राप्त अस्मिता शिक्षा मंडल के मुरलीधरपंत भोंडे, सुरमणी कमलाताई भोंडे, आरएसएस के विभाग संचालक चंद्रशेखर भोंदू, स्मिता भोंदू को शाल व श्रीफल देकर संस्कार भारती के विवेक कवठेकर, प्रा. डॉ. जयश्री वैष्णव, एड. मिलिंद वैष्णव ने कृतज्ञता व्यक्त की. गढी पूजन कार्यक्रम का संचालन प्रा. सीमा पेलागडे ने व आभार प्रदर्शन अनुराधा रघुवंशी ने किया.
विख्यात ओडिशी नृत्य गुरु प्रा. डॉ. मोहन बोंडे के मार्गदर्शन में प्रस्तुत हुए मृत्याविष्कार में कोरिओग्राफर प्रकाश मेश्राम के दिग्दर्शन में आस्था जोंधलेकर, अंतरा भगत, सानवी धोंगड़े, कनक वासेवय, अक्षय बहाले, श्रद्धा भगत, विधि बनकर, परुष्णी राणे, संयुक्ता बहाले, वेदिका दशस्त्र, धनश्री दशस्त्र, प्रीति गजभिये, टीना अदकने, विजया यादव, दीक्षा डकरे, मोनिल मिसाल, आदित्य निगम, प्रतीक मोरे, गोलू पाथर्डे और खुद प्रकाश मेश्राम ने हिस्सा लिया. युवा नृत्य दिग्दर्शिका वैभवी बोंडे के दिग्दर्शन में श्रुतिका पारलकर, अरवा खंडारे, तृप्ति डांगे, इशिका तेलगोटे, ग्रही बदरके, परि जवारकर, सुवर्णा देशमुख, अक्षदा बोडे, प्रणीति यादव, कीर्ति डोंगरकर, सलोनी श्रीवास, मैथीली जोशी, श्रावणी, हिरुलकर, अंबिका मोरनकर, श्रद्धा प्रधान, गौरी प्रधान, महिमा खिचरे, अन्वी चंदेल, किम्या गडकरी, प्रतिभा सराफ, वीरा चौहान, ईश्वरी बेर्डे, अनुष्का अदालिंग, जुई सुने, जीविका दांडगे, प्रणदा कोंडे, इशिता इंगले, प्रियांशी गेवई और अश्विनी राठौड़ ने विभिन्न नृत्य प्रस्तुत किए. विद्या सावले के मार्गदर्शन में भाविका शिरभाटे, मीनल असरकर, जयश्री सौतकर, अनुष्का चित्तकेश्वर, आराध्या कडु, मेधा बनकर, वैदेही तांबस्कर, सांची जुराफे, लावण्या ठाकरे, तक्षिका शेंडे, प्राजक्ता पेलागड़े, अदिति मेहता, दिव्या कल्याणकर और स्वयं विद्या सावले ने नृत्य प्रस्तुत किया. इस पूरे कार्यक्रम में शामिल हों अमरावती की गायिका सोनाली शिलेदार, केतकी मोहदारकर, अंबिका बदंखे, हिमांशी शिश्ते, शीतल भट्ट, मनस्वी जोशी, ओवी व्यालेकर, गरिमा चौहान, देवश्री चिमोटे, आदित्य बारोकर, शुभम पांडे और शुभंकर निस्वंकर. पूरे क्षेत्र को रंगोली से सजाया गया था. दीपक जोशी, स्वप्निल जोशी, विदुला जोशी, संध्या देवले, शीतल पटेरिया, तनिका पुर्वाने, शर्वरी धनोकार और अपर्णा उमप ने अथक परिश्रम किया.