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‘वह’ तीन साल की मादा तेंदूआ थी

सिर पर गहरी चोट लगने की वजह से हुई मौत

* पोस्टमार्टम रिपोर्ट के जरिए हुआ खुलासा
* आज्ञात वाहन ने मारी थी जोरदार टक्कर
* वनविभाग के तमाम आला अधिकारी पहुंचे मौके पर
अमरावती/दि.16 – आज सुबह करीब 8 बजे के आसपास चांदूर रेल्वे मार्ग पर एसआरपीएफ कैम्प के पीछे एकता टेकडी के पास एक तेंदूआ मृत पाया गया. जिसे देखकर ही अनुमान लगाया गया कि, संभवत: किसी तेज रफ्तार वाहन ने सडक पार कर रहे तेंदूए को जोरदार टक्कर मारी. जिसमें गंभीर रुप से घायल हो जाने के चलते उक्त तेंदूएं की मौत हो गई. वहीं अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी इस बात की पृष्टि हो गई है कि, अज्ञात वाहन द्वारा मारी गई टक्कर के चलते तेंदूए के सिर पर अगले हिस्से पर काफी गंभीर चोट लगी थी. जिसकी वजह से उक्त तेंदूए ने मौके पर ही दम तोड दिया. साथ ही यह भी पता चला कि, यह तीन वर्ष की आयु वाली मादा तेंदूआ थी.
वहीं दूसरी ओर सडक हादसे में मादा तेंदूए की मौत हो जाने की जानकारी मिलते ही अमरावती वनविभाग के तमाम आला अधिकारी तुरंत ही मौके पर पहुंच गए तथा पंचनामे की कार्रवाई के बाद तेंदूए के शव को पोस्टमार्ट हेतु भिजवाया गया. इसके साथ ही मादा तेंदूए को टक्कर मारकर फरार हो जाने वाले अज्ञात वाहन चालक की तलाश करनी भी शुरु कर दी गई. आज सुबह हुए हादसे की जानकारी मिलने के बा मेलघाट-परतवाडा के प्रादेशिक उपवन संरक्षक अग्रिम सैनी, सहायक उपवन संरक्षक ज्योति पवार, वडाली की वन परिक्षेत्र अधिकारी वर्षा हरणे, वन्यजीव अभ्यासक प्रा. डॉ. जयंत वडतकर, पशु वैद्यकीय अधिकारी डॉ. सागर ठोसर तथा ‘वॉर’ संस्था के अध्यक्ष नीलेश कंचनपुरे मौके पर पहुंच गए थे.

* जंगल में वन्यजीवों की संख्या बढना अच्छा संकेत
इस समय मीडिया के साथ बातचीत करते समय प्रादेशिक उपवन संरक्षक अग्रिम सैनी ने कहा कि, वडाली व पोहरा के वन परिक्षेत्र में तेंदूए जैसे वन्यजीवों की तादाद बढ रही है. यह एक तरह से अच्छा संकेत है. जंगलों में वन्यजीवों का संरक्षण व संवर्धन करने हेतु वनविभाग द्वारा तमाम आवश्यक प्रयास किए जाते है. जो काफी हद तक सफल हो रहे है, यह इससे साबित होता है. साथ ही वनविभाग द्वारा इस बात की भी भरसक ध्यान दिया जा रहा है कि, वन्यजीवों के लिए जंगल में ही उनके भोजन व पानी की व्यवस्था रहे. परंतु कई बार तेंदूए जैसे वन्य प्राणी जंगल छोडकर मानवी बस्तियों की ओर चले जाते है, इसे टालने हेतु सभी लोगों को कुछ छोटी-छोटी सतर्कता बरतना जरुरी है. जिसके तहत सबसे पहले तो जंगलों की सीमा पर बसी रिहायशी बस्तियों के लोगों ने खुले में खाने-पीने की वस्तुएं फेंकना बंद करना चाहिए. क्योंकि खुले में अथवा कचरे के ढेर पर फेंकी जाने वाली खाने-पीने की वस्तुओं के आसपास आवारा कुत्तों का जमघट लगा रहता है और इन्हीं आवारा कुत्तों का शिकार करने तेंदूए जंगल से शहर की ओर चले आते है. ऐसे में यदि थोडी सी सजगता दिखाई जाए, तो तेंदूओं का शहर की ओर आना बंद किया जा सकता है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि, जैसे-जैसे शहरों का विस्तार हो रहा है, वैसे-वैसे जंगलों का आकार सिकुड रहा है. जिसकी वजह से वन्यजीवों का अधिवास क्षेत्र घट रहा है. इस बात की ओर भी सभी ने गंभीरतापूर्वक ध्यान देना चाहिए.

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