बच्चों के करिअर हेतु कुछ परिक्षण जरुरी

अमरावती /दि.2– कक्षा 10 वीं व 12 वीं की परीक्षा शुरु होने के बाद अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता लग जाती है. ऐसे समय अपने बच्चे का बुध्यांक कैसा है, यह जानने हेतु कुछ परिक्षण करने पर बच्चों के करिअर के लिहाज से बेहतरिन मार्ग खोजना आसान हो सकता है.
* बच्चों के करिअर की चिंता अभिभावकों को
अपने बच्चों का भविष्य बेहतर हो ऐसा प्रत्येक अभिभावक को लगता है. इसके लिए अपने पाल्यों के करिअर की दृष्टि से कई अभिभावक चिंता करने के साथ ही प्रयास भी करते है और सभी अभिभावक चाहते है कि, उनके बच्चे डॉक्टर व इंजीनियर ही बने.
* कौनसे परिक्षण जरुरी
– रुची परिक्षण – अपने बच्चे का किस विषय की ओर रुझान है और उसे कौनसा विषय पसंद आता है, यह पता करने के लिए रुची परिक्षण किया जाता है.
– अभिक्षमता परिक्षण – इसमें बच्चे के पास रहनेवाली अभिक्षमता के बारे में जाना जाता है और बच्चे की अभिक्षमता के अनुसार उसे करिअर चुनने में मदद होती है.
– बुध्यांक परिक्षण – इसके जरिए बच्चे का बुध्यांक कितना है, यह पता चलता है. जिला सामान्य अस्पताल में भी इस तरह का बुध्यांक परिक्षण किया जाता है.
* कब करवाएं परिक्षण?
यह सभी परिक्षण 14 वर्ष की उम्र के बाद किए जाते है. करिअर के संदर्भ में अगर कोई संभ्रम है तो इस तरह के परिक्षण करते हुए बच्चे के करिअर हेतु योग्य राह पकडना आसान होता है. साथ ही प्रौढ लोगों के लिए भी इस तरह के परिक्षण किए जाते है तथा नौकरी के लिहाज से भी ऐसे परिक्षण करवाएं जाते है.
* कौन करता है परिक्षण?
अभिरुची परिक्षण, अभिक्षमता परिक्षण व बुध्यांक परिक्षण को मानसोपचार विशेषज्ञ द्वारा किया जाता है. साफ्टवेयर के जरिए किए जानेवाले ऐसे परिक्षणों के जरिए बच्चों के करिअर हेतु योग्य निर्णय लेने में सहायता होती है.
* पालकों के लिए क्यों है उपयोगी?
कई अभिभावक इस सवाल से जुझते रहते है कि, उनके पाल्य कक्षा 10 वीं और 12 वीं के बाद कौनसा विषय लें और किस शाखा में जाए. ऐसे समय बच्चों की बौद्धीक क्षमता की जांच करते हुए अभिभावक योग्य निर्णय ले सकते है.
* अभिभावकों ने अपने बच्चों की अभिरुची व अभिक्षमता को ध्यान में रखते हुए उन्हें उनकी पसंदवाले क्षेत्र में करिअर बनाने हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए. इसके लिए अपने बच्चों की पसंद और उनकी बौद्धीक क्षमता की जांच करने के बाद उन्हें योग्य करिअर चुनने का मौका देना चाहिए. साथ ही करिअर चुनने के मामले में बच्चों की पसंद व नापसंद को सबसे अधिक महत्व देना चाहिए और उन पर अभिभावकों ने अपनी पसंद को बिलकुल भी नहीं लादना चाहिए.
– अमिता दुबे
क्लिनिकल सायकोलॉजिस्ट व सायकोथेरपिस्ट
संचालिका, अस्तित्व परामर्श केंद्र