जिले में केवल 33 हजार 753 हेक्टेयर क्षेत्र में मोटे अनाज की बुआई
ज्वार की बुआई का ग्राफ हो रहा कम

* कृषि विभाग कर रहा जनजागरूकता
अमरावती/दि.18-तृणधान्य को अधिक डिमांड रहने के बाद भी इसका उत्पादन क्षेत्र घट रहा है. यह चिंता का विषय बन गया है. एक ओर जहां सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय तृणधान्य वर्ष मनाया जा रहा है, वहीं तृणधान्य यानी मोटा अनाज की बुआई का क्षेत्र घटता दिखाई दे रहा है. पिछले 6 वर्षों में तृणधान्य की फसल का क्षेत्र काफी घटा है. इस बार कुल बुआई क्षेत्र के केवल 13 प्रतिशत क्षेत्र में मोटा अनाज की बुआई हुई. गौरतलब रहे कि, खरीफ ज्वार की बुआई केवल 9353 हेक्टेयर क्षेत्र में ही हुई है. दुर्लभ हो रहे तृणधान्य का जतन, मार्केट के बारे में जानकारी हो, इसके लिए कृषि विभाग द्वारा जनजागरूकता व मार्गदर्शन करने अभियान चलाया जा रहा है. इस वर्ष बीज उपलब्ध होने के लिए तृणधान्य के बीज की कीट किसानों को उपलब्ध कराई गई, बावजूद इसके खरीफ के तृणधान्य का क्षेत्र नहीं बढा. इस बार जिले में 33 हजार 753 हेक्टेयर क्षेत्र में तृणधान्य फसलों की बुआई हुई है.
मोटे अनाज यानी मिलेट्स को श्रेष्ठ अन्न भी माना जाता है. जो सदियों से हमारे भोजन में एक अभिन्न अंग रहे हैं और ये अनाज सेहत के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं. लेकिन समय के साथ इसकी पैदावार घटती दिखाई दे रही है. जिले में औसतन इस वर्ष 6 लाख 57 हजार 64 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की बुआई हुई है. कुल क्षेत्र के यह बुआई 95 प्रतिशत है. खरीफ सत्र में सोयाबीन, कपास, तुअर, मूंग और उडद के साथ ही ज्वार, मक्का, बाजरा, धान व अन्य तृणाधान्य की बुआई की गई. इसमें ज्वार 9353 हेक्टेयर, धान 5660, बाजरा 151, व मक्का 18,298 हेक्टेयर क्षेत्र में है. ऐसे कुल 33 हजार 753 हेक्टेयर क्षेत्र में तृणधान्य की बुआई हुई है. गेहूं के साथ साथ ज्वार को प्राधान्य दिया जाता है. विगत 6 साल में ज्वार की बुआई का ग्राफ कम-ज्यादा होता दिख रहा है. पिछले साल 10,839 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई होने पर इस साल उससे भी कम 9353 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हुई है. मेलघाट का आदिवासी समाज ज्वार और मक्के की बुआई करता है, इसलिए ज्वार का क्षेत्र बढा हुआ दिखता है. लेकिन वरूड व अचलपुर तहसील छोडकर अन्य तहसील में ज्वार की बुआई का प्रमाण नगण्य है. मक्का 18,398 हेक्टेयर में है. धारणी, चिखलदरा व वरूड तहसील में ही मक्का का क्षेत्र ज्यादा है. तृणधान्य श्रेणी के बाजरा की बुआई चिखलदरा तहसील में 129 और धामणगांव रेलवे तहसील में 151 हेक्टेयर में है. तथा धान की बुआई केवल धारणी में 4402 और चिखलदरा तहसील में 1258 हेक्टेयर में है.
* क्यों नहीं की जाती बुआई?
वर्तमान में ज्वार को खुले बाजार में बडी डिमांड होने पर भी बुआई क्षेत्र कम होने के पीछे वन्यजीव व पक्षियों से तकलीफ होने का कारण बताया जाता है. इसके अलावा बारिश से जल्द ही खराब होने के साथ ही उत्पादन औसतन घटने की बात कही गई. अतिवृष्टि से ज्वार काली पडने से बाजार में भी दाम नहीं मिलते.
वर्ष निहाय ज्वार की बुआई हेक्टेयर
वर्ष बुआई
2018-19 19,742
2019-20 13,918
2020-21 16,266
2021-22 14,855
2022-23 10,839
2023-24 9,353