आदिवासी किसानों को वनविभाग खेती करने से न रोके
मेलघाट के धरमडोह के किसानों के साथ खोज के बंड्या साने ने विभागीय आयुक्त से लगाई गुहार

अमरावती/दि.2– मेलघाट के किसानों को मानसून में बुआई के बाद खेत में जाने से रोका जा रहा है. वनविभाग और व्याघ्र प्रकल्प के अधिकारी व कर्मचारियों के इस बर्ताव से संतप्त हुए धरमडोह व आसपास के आदिवासी किसानों ने आज विभागीय आयुक्त डॉ. निधि पाण्डेय को खोज के बंड्या साने के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है.
ज्ञापन में कहा गया है कि, मेलघाट के धरमडोह के कोरकू-आदिवासी व अन्य समाज के लोग अपने परिवार का पेट भरने के लिए पिछले 35 से 40 सालो से खेती कर रहे है. उनके परिवार के किसी भी सदस्य को शासकीय अथवा निजी नौकरी प्राप्त नहीं हो सकी. नौकरी मिलने के लिए शासन की तरफ से भी कोई प्रयास नहीं किए गए. मेलघाट स्तर पर विविध प्रश्न व समस्या जानने के लिए गांव में कोई नहीं आता. आदिवासियों को ही शासकीय कार्यालय के चक्कर काटने पडते है. लेकिन काम नहीं हो पाता. नौकरी के अभाव के कारण खेती के अलावा परिवार का पेट भरने के लिए दूसरा कोई पर्याय नहीं है. वर्तमान में आदिवासी किसानों ने खेत में बुआई की है. वनविभाग और व्याघ्र प्रकल्प के अधिकारी सभी आदिवासियों को खेत में जाने से रोक रहे है. इस कारण धरमडोह सहित मेलघाट के आदिवासियों को न्याय देने की गुहार विभागीय आयुक्त डॉ. निधि पाण्डेय से लगाई गई है. ज्ञापन सौंपते समय बंड्या साने के साथ अनेक आदिवासी उपस्थित थे.