अमरावतीमहाराष्ट्र

मेलघाट में हाथियों की देखभाल का जिम्मा दिहाडी मजदूरों पर

महावत तथा चारा कापी के पद पडे है रिक्त

अमरावती/ दि. 24-मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प एवं वन विभाग की सेवा के साथ ही पर्यटकों के लिए आकर्षक का केन्द्र रहनेवाले कोलखास के चार मादा हाथियों की देखभाल के लिए आवश्यक रहनेवाले महावत व चारा कापी के पद रिक्त पडे है. जिसके चलते रोजंदारी मजदूरों के भरोसे इन हाथियों के देखभाल का काम चल रहा है. ऐसे में आदिवासी संगठन द्बारा रिक्त रहनेवाले पदों को तुरंत भरे जाने की मांग की जा रही है.
बता दें कि विगत 10 वर्षो से कोलखास में रहनेवाली सरकारी मादा हाथियों की देखभाल,संवर्धन व संरक्षण के साथ ही दुर्गम क्षेत्र के जंगलों में गश्त लगाने तथा पर्यटकों को हाथी की पीट पर बिठाकर उन्हें जंगल की सैर कराने जैसे काम रोजंदारी मजदूरों द्बारा किए जाते है. विगत 10 वर्षो से महावत एवं चारा कापी की पद भर्ती नहीं होने के चलते अल्प मजदूरी पर रोजंदारी का काम करनेवाले मजदूरों को इन पदों का जिम्मा भी संभालना पडता है. जहां एक ओर मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प अंतर्गत करोडों रूपए का खर्च विकासात्मक कामों सहित वृक्ष एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा पर किया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर मेलघाट वन विभाग के अख्तिार में रहनेवाली सुंदरमाला, जयश्री, चंपाकली व लक्ष्मी नामक 4 मादा हाथियों की देखभाल व सेवा के लिए कर्मचारी पदभर्ती भी नहीं की गई है. जिसके चलते विगत 10 वर्षो से अल्प मजदूरी पर काम करनेवाले रोजंदारी कर्मियों द्बारा इन मादा हाथियों की देखभाल का जिम्मा उठाया जा रहा. ऐसे में इन्हीं रोजंदारी कर्मियों को महावत एवं चारा कापी पदों पर कायम करने की मांग आदिवासी संगठन द्बारा मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस सहित व्याघ्र प्रकल्प के वरिष्ठ अधिकारियों से की गई है.

* गडचिरोली में भर्ती, मेलघाट को ठेंगा
एलीफेंट गाइड लाइन के अनुसार प्रत्येक हाथी के लिए एक महावत व एक चारा कापी का रहना आवश्यक होता है. परंतु कोलखास में महावत सहित चारा कापी के 5 पद रिक्त पडे है. गडचिरोली में जिला चयन समिति के जरिए चारा कापी की पदभर्ती प्रक्रिया शुरू है. उसी तरह की प्रक्रिया मेलघाट भी चलाने की मांग आदिवासी संगठन द्बारा की जा रही है. जिस पर अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ है.

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