
* दिवाली के नाश्ते का मजा ही कुछ अलग है
अमरावती/दि.9– दिवाली का नाश्ता यानी मीठा, तिखा और नमकीन पदार्थ का स्वादिष्ट रहता है. यदि हम किसी सफर पर निकले तो बीच रास्ते में इस नाश्ते का अनुभव लेते है. इसी तरह दिवाली के नाश्ते का है. कभी कोई पदार्थ अपेक्षानुरुप बनता है तो कभी बिगड भी जाता है. कभी-कभी अपेक्षा से भी ज्यादा अच्छा हुआ तो आगामी समय भी उसकी विशेष रुप से फरमाइश होती रहती है. इस कारण इस बार की दिवाली पर केवल नाश्ते के तौर पर नहीं बल्कि सुबह-शाम की चाय के साथ खाने में उपयुक्त मठरी और खाने में भी चले से घेवर निश्चित बनाकर देखे.
राजस्थानी खाद्य संस्कृति की पहचान कर देनेवाला पदार्थ यानी घेवर. यह पदार्थ मूल राजस्थानी रहा तो भी वह अब मीठाई की दुकान पर मिलने लगा है. राजस्थान में घेवर तीज और रक्षाबंधन को बनाते है. अपने यहां भी भाईदूज चंद्र की पूजा से संबंधित रहा पर्व दिवाली के पांच दिन में आता है. तो फिर इस वर्ष भाई के लिए घेवर बनाने में क्या हरकत है? घेवर बनाने के लिए तीन कप बेसन, दो चम्मच घी, तीन से चार बर्फ के टूकडे, चार कप पानी, 1/4 टीस्पून पीला रंग, डीप फ्राय के लिए धी चाहिए. साथ ही घेवर के प्रमुख घटक रहे सिरप के लिए एक कप शक्कर, एक कप पानी टॉपिंग के लिए, एक टीस्पून इलायची पावडर, एक टीस्पून बादाम और पीस्ता, एक बडा चम्मच केसर चाहिए. इस पदार्थ को बनाते समय सर्वप्रथम एक तार तार वाली छन्नी ले. पश्चात बाऊल में धी और बर्फ के टूकडे डालते रहे, जब तक वह सफेद नहीं होता. बाद में दूध-बेसन और पानी मिक्स कर पतला मिश्रण तैयार करें.
थोडे से पानी में पीला रंग मिक्स करें. मिश्रण पतला रहना चाहिए. उसके बाद एक स्टील का बर्तन लेकर उसमें आधा बर्तन धी डाले और गरम करें. जब धी से धुआं निकलने लगे तब मिश्रण भरकर बर्तन में डाले, एक पतली धार के मुताबिक. बाद में मिश्रण को अच्छी तरह जमा होने दें, तब तक और एक ग्लास मिश्रण किनारे से डाले, घेवर बर्तन पर न चिपके और उसमें छोटे-छोटे छेद दिखाई देगे. चलनी एक खुले बर्तन में रखे. गरम मीठई चासनी में डूबोकर बाहर निकाले और अधिक चासनी निकालने के लिए उसके तार पर ध्यान दें. ठंडा होने के बाद घेवर पर सिल्वर फॉइल लगाए. पश्चात केसर डाले. काटा ड्रायफूट्स और चूटकीभर इलायची पावडर डाले. इस तरह कुछ कठिन, लंबी प्रक्रिया वाला लेकिन उतना ही स्वादिष्ट और खुशी देनेवाला पदार्थ पूरी तरह तैयार.
* नाश्ते अथवा चाय के साथ खाए मठरी
मेथी मठरी बनाने के लिए अपने पास गेहूं का आटा, रवा, देशी धी, ओवा, तिल्ली, काला मिर्टी पावडर, देगी मिर्ची पावडर, हिंग, मका का आटा आदि साहित्य चाहिए. साहित्य जमा करने के बाद खस्ता मेथी मठरी बनाने के लिए मेथी स्वच्छ धोकर काट ले. अब कढ़ई में पहले धी गरम कर उसमें काटी मेथी भून ले. एक बर्तन में गेहूं का आटा और रवा ले और उस पर धी डाले. पश्चात ओवा, तिल्ली, काला मिरी पावडर, देगी मिर्ची पावडर और हिंग डालकर उसमें पानी डालकर मिला ले. बाद में कॉर्नप्लोअर, मेल्टेड धी डालकर आटा अच्छी तरह मिला ले. अब आटे का गोला ले और बाद में गोल आकार में बले. अब उसमें तैयार किया मेथी का मिश्रण डाले. उस पर कॉर्नफ्लोअर पावडर डाले. चपाती की तरह घडी करें और बाद में अच्छी तरह बेले. इस तरह सभी मठरी बना ले. अब तेल गरम कर उसमें सभी मठरी तल ले. एक बर्तन में निकाले और बाद में ठंड होने पर डिब्बे में स्टोअर करें. नाश्ते में तथा सुबह-शाम गरमागरम चाय के साथ इस मेथी मठरी का अवश्य स्वाद लेे.