शिवशाही बसों की दुर्घटनाओं का प्रमाण अधिक!
खराब बसों की वजह से यात्रियों की जान खतरे में

अमरावती/दि.30– महाराष्ट्र राज्य परिवहन महामंडल द्वारा चलाई जाने वाली एसटी बसों में से शिवशाही बसों के दुर्घटनाग्रस्त होने का प्रमाण सबसे अधिक है. इन बसों की खटारा अवस्था में रहने के बावजूद महामंडल द्वारा वातानुकूलित के नाम पर सर्वाधिक यात्री किराया वसूला जाता है, लेकिन बसों की देखभाल व दुरुस्ती की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता. जिसके चलते आये दिन कही न कही शिवशाही बसों के साथ हादसा घटित होने की खबरे सामने आती रहती है. वहीं अब गोंदिया जिले में शिवशाही बस के साथ हुए हादसे के चलते एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में आया है.
बता दें कि, राज्य के एसटी महामंडल के काफिलें में लगभग 15 हजार 600 एसटी बसें है. जिनमें 892 शिवशाही बसों का समावेश है. कोविड काल में यात्री ढुलाई का काम लंबे समय तक बंद रहने के चलते एसटी महामंडल की आर्थिक स्थिति काफी हद तक खराब हो गई थी और तब से ही एसटी महामंडल में बसों के स्पेअर पार्ट की आपूर्ति पर परिणाम भी हुआ है. वहीं दूसरी ओर एसटी महामंडल में आवश्यकता की तुलना में तांत्रिक कर्मचारियों की काफी हद तक कमी है. जिसके चलते अन्य कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ गया है. इसका सीधा परिणाम शिवशाही बसों की देखभाल व दुरुस्ती पर हो रहा है.
उल्लेखनीय है कि, राज्य में एसटी महामंडल की बसों के दुर्घटनाग्रस्त होने का प्रमाण 0.17 फीसद है. यानि प्रति 6 लाख किमी की यात्रा में एक हादसा दर्ज होता है. इसमें शिवशाही बसों के साथ घटित होने वाले हादसों का प्रमाण 0.29 फीसद है. यानि प्रति 3.50 लाख किमी की यात्रा में एक शिवशाही बस के साथ हादसा घटित होता है. जिसके चलते शिवशाही बस से यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगते नजर आ रहे है.
* एसटी महामंडल की ओर से बसों के स्पेअर पार्ट समय पर नहीं मिलते और तांत्रिक विभाग में भी अनेकों पद रिक्त है. जिसके चलते एसटी की सेवा में रहने वाले कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ रहा है. साथ ही बसों की गुणवत्ता पर भी परिणाम हो रहा है. ऐसे में एसटी चालकों को मजबुरी में कबाड स्थिति वाली एसटी बसों को चलाना पडता है और ऐसी खटारा बसों के साथ हादसे घटित होने का प्रमाण लगातार बढ रहा है.
श्रीरंग बर्गे,
राज्य महासचिव,
महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी कांग्रेस.