बाघ जीवित रहेगा तभी टिक सकेगा पर्यावरण अन्यथा विनाश
वन्यजीव अभ्यासक मुकेश चौधरी का प्रतिपादन

* रामकृष्ण महाविद्यालय दारापुर का अभिनव उपक्रम
दर्यापुर/ दि. 11– वन्यजीव यह अनमोल प्राकृतिक संपत्ति है. मनुष्य का प्राकृतिक पर आक्रमण करने से वनस्पति खतरे में आ गई है. जीवसृष्टि का पूरा चक्र ही बिगड गया है. पर्यावरण नष्ट होने से बचाने के लिए फिर एक बार उसे सूचारू करने के लिए बहुत बडा आवाहन युवा पीढी के सामने उपस्थित है. इसके लिए बाघ जीवित रहेगा तभी पर्यावरण टिकेगा अन्यथा पर्यावरण का विनाश निश्चित है, ऐसा प्रतिपादन वन्यजीव अभ्यासक मुकेश चौधरी ने किया है.
सोनारखेडा में रामकृष्ण महाविद्यालय दारापुर की ओर से आयोजित रासेयो विशेष श्रम संस्कार शिविर में प्रकृति सुरक्षा में युवा पीढी का सहभाग इस विषय पर मार्गदर्शन करते समय वे बोल रहे थे. इस कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रा. गंगाधर पांडे थे. आगे उन्होंने कहा कि जंगल में बाघ होना यह जंगल समृध्द होने का प्रतिक है. जंगल में रहनेवाला बाघ अन्न श्रृखंला में यह मुख्य घटक है तथा बाघ के कारण जंगल में रहनेवाली वनस्पति और अन्य तृणभक्षी प्राणियों में समतोल रखा जाता है. जिसके कारण बाघ यह पर्यावरण में असमतोल रखने के लिए जैविक श्रृंखला का महत्वपूर्ण घटक है. बाघों की संख्या जिस जंगल में अधिक होती है. वह जंगल अथवा वहां का भाग यह सभी दृष्टि से परिपूर्ण रहता है. ऐसा माना जाता है. जंगल के लिए सभी वन्य जीवन बचाना यह अपना प्रथम कर्तव्य है, जिसमें बाघ यह जैविक श्रृंखला का महत्वपूर्ण घटक है ऐसा वन्यजीवन अभ्यासक मुकेश चौधरी ने कहा.
इस कार्यक्रम में डॉ. कुंदन अलोने,डॉ. सारिका दांडगे, प्रा. डॉ. शीतलबाबू तायडे, प्रा. कुमार भटकर , राहुल पोलादे, प्रा. गंगाधर पांडे ,श्रेया भुसारी, ऋत्विक कावरे तथा गांव के नागरिक आदि बडी संख्या में उपस्थित थे.