खुद की गलतियों को छिपाने मुझ पर लगाया झूठा व भद्दा आरोप
प्राचार्य डॉ. श्रीरंग ढोले ने विनयभंग संबंधित मामले पर दिया खुलासा

* दैनिक अमरावती मंडल से मामले को लेकर की खुलकर बातचीत
अमरावती/दि.4 – मै विगत कई वर्षों से होमियोपैथी चिकित्सक रहने के साथ ही पंडित जवाहरलाल नेहरु कॉलेज ऑफ होमियोपैथी एण्ड मेडिकल साइंस का प्राचार्य भी हूं और इतने वर्षों के दौरान मेेरे मार्गदर्शन में कई युवक-युवतियां होमियोपैथ चिकित्सक के रुप में तैयार हुए है. यह बात सभी जानते है और इतने वर्षों के दौरान मेरा कार्यकाल व जीवन पूरीत तरह से बेदाग व निष्कलंक भी रहा है. परंतु दो दिन पूर्व हमारे कॉलेज की एक छात्रा ने मुझे लेकर जिस तरह से पुलिस थाने मेें विनयभंग व छेडछाड का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है, वह खेदजनक रहने के साथ ही पूरी तरह से तथ्यहीन भी है. क्योंकि जो कुछ भी शिकायत में कहा गया है, वैसा कुछ भी घटित नहीं हुआ था, बल्कि कॉलेज द्वारा उठाई गई आपत्तियों के चलते खुद को अपनी ही गलतियों ने फंसता देख उक्त छात्रा ने कॉलेज और मुझे बदनाम करने के लिए पुलिस में झूठी शिकायत दज कराने का सहारा लिया. इस आशय का स्पष्टीकरण पंडित जवाहरलाल नेहरु मेमोरियल कॉलेज ऑफ होमियोपैथी एण्ड मेडिकल साइंस के प्राचार्य डॉ. श्रीरंग ढोले द्वारा किया गया.
बता दें कि, दो दिन पूर्व बडनेरा रोड स्थित होमियोपैथी कॉलेज की एक छात्रा ने बडनेरा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था कि, वह परीक्षा का फॉर्म भरने हेतु कॉलेज पहुंची थी. जहां पर प्राचार्य श्रीरंग ढोले उसे अपने कक्ष में लेकर गये थे और वहां पर तलाशी लेनेक के नाम पर प्राचार्य ढोले ने उसकी कमर पर स्पर्श करने के साथ ही उसकी पीठ पर हाथ घुमाया था. जिसके चलते उसके मन में लज्जा उत्पन्न हुई थी. इस शिकायत के आधार पर बडनेरा पुलिस ने प्राचार्य ढोले के खिलाफ छेडछाड व विनयभंग की धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया था. इस संदर्भ में प्राचार्य श्रीरंग ढोले का पक्ष जानने हेतु जब दैनिक अमरावती मंडल ने उसने संपर्क किया, तो प्राचार्य ढोले ने बताया कि, उन पर लगाये गये आरोप और उनके खिलाफ दर्ज शिकायत पूरी तरह से तथ्यहीन व निराधार है. क्योंकि ऐसी कोई घटना घटित ही नहीं हुई थी.
इस पूरे मामले को लेकर जानकारी देते हुए प्राचार्य ढोले ने बताया कि, बडनेरा रोड स्थित पं. नेहरु स्मृति होमियोपैथी में सरकार द्वारा विद्यापीठ के जरिए प्रवेश प्रक्रिया चलाई जाती है और शिकायतकर्ता छात्रा ने वर्ष 2016 की प्रवेश प्रक्रिया के समय 4 वर्षीय होमियोपैथी पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था. प्रवेश हेतु पात्र नहीं रहने के बावजूद भी उक्त छात्रा ने लिखित तौर पर कॉलेज प्रबंधन व विद्यापीठ को आश्वस्त किया था कि, वह कॉलेज की पूरी फीस अदा करने के साथ ही अपने प्रवेश व पाठ्यक्रम के लिए खुद जिम्मेदार रहेगी तथा कॉलेज के नियमों का पालन भी करेगी. परंतु उक्त छात्रा कभी भी नियमित रुप से कॉलेज की कक्षाओं में उपस्थित नहीं रही. यही वजह है कि, आज 8 वर्ष बीत जाने के बावजूद उक्त छात्रा ने जैसे-तैसे प्रथम वर्ष का पाठ्यक्रम पूरा किया है और इस समय वह द्वितीय वर्ष की छात्रा है. जबकि नियमानुसार उस छात्रा ने 4 वर्ष पहले ही अपना पाठ्यकम पूरा करते हुए अगले एक वर्ष के दौरान अपनी इंटर्नशीप पूरी कर लेनी चाहिए थी. पाठ्यक्रम को पूरा करने हेतु निर्धारित से अधिक समय लगाने वाले विद्यार्थियों के बारे में कॉलेज प्रबंधन द्वारा हाईकोर्ट के निर्देशानुसार समय-समय पर विद्यापीठ एवं उच्च व तंत्रशिक्षा संचालनालय को जानकारी भेजी जाती है. जिसके चलते संचालक कार्यालय द्वारा संबंधित छात्रा को इस संदर्भ में नोटीस भी भेजी गई थी. इसी दौरान उक्त छात्रा ने विद्यापीठ द्वारा ली जाने वाली परीक्षा के लिए फार्म भरा था. जिसके लिए उक्त छात्रा को कॉलेज से एनओसी तथा नो ड्यू सर्टीफिकेट लेना अनिवार्य था. इस हेतु छात्रा द्वारा किये गये आवेदन में कई तरह की त्रृटियां थी, जिन्हें दूर करने के लिए महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा उक्त छात्रा को कॉलेज में बुलाया गया था और उसे लिखित तौर पर कुछ दस्तावेजों की पूर्तता व खानापूर्ति करने हेतु कहा गया. इस समय वह छात्रा अकेली नहीं थी, बल्कि इसी तरह की प्रक्रिया का पूरा करने के लिए करीब 13 अन्य लडकियां व 5 लडके भी महाविद्यालय परिसर में उपस्थित थे. चूंकि इस समय महाविद्यालय में अवकाश चल रहा हैै. ऐसे में सभी को प्राचार्य कक्ष के बाहर खडे रखकर एक-एक कर भीतर छोडा जा रहा था. जहां पर बैठकर सभी छात्र-छात्राओं ने अपने आवेदनों में रहने वाली त्रृटियों को दुरुस्त किया. इस समय संबंधित छात्रा के आवेदन में कई तरह की त्रृटिया रहने और उससे संबंधित एक मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन रहने के चलते उसे अन्य कुछ दस्तावेज लेकर एक-दो दिन बाद आने हेतु कहा गया, तो चूंकि संबंधित छात्रा खुद से संबंधित मामले को लेकर रहने वाली त्रृटियों को दूर ही नहीं कर सकती थी. ऐसे में खुद को फंसता देख उसने कॉलेज से बाहर निकलते ही पुलिस थाने में जाकर शिकायत दर्ज कराने का अजीबोगरीब रास्ता चुना और कॉलेज को बदनाम करने के उद्देश्य से अपने साथ विनयभंग व छेडछाड होने की झूठी शिकायत दर्ज कराई.
इस जानकारी के साथ ही डॉ. श्रीरंग ढोले ने कहा कि, वे अपने खिलाफ दर्ज हुई शिकायत से विचलित हुए बिना अपना काम कर रहे है तथा उन्होंने बिना किसी दबाव में आये विद्यापीठ को पहले ही अपनी रिपोर्ट भेज दी है. साथ ही अब जो कुछ भी हुआ है, उससे संबंधित विस्तुत जानकारी भी विद्यापीठ सहित उच्च व तंत्रशिक्षा संचालक के पास भेजने वाले है.