अमरावती

धारणी अस्पताल में दो प्रसुताओं के साथ दो नवजात शिशुओं की मौत

धारणी/ दि.26 – धारणी उपजिला अस्पताल में दो नवजात शिशुओं की मौत हो गई. नवंबर में दो प्रसुताओं की मौत हो जाने के बाद यह नवजात काल का ग्रास बने. इस तरह दो प्रसुताओं के साथ दो नवजातों की मौत हो जाने से सरकारी अस्पताल को लेकर आदिवासियों में भय का वातावरण देखा जा रहा है.
एक तरफ जहां शासन-प्रशासन कुपोषण का अभिशाप झेल रहे है. मेलघाट में माता व बाल मौतों पर नियंत्रण का दावा किया जा रहा है. दूसरी तरफ नवंबर में दो माताओं और दो नवजात शिशुओं की मौत से दावों की पोल खुल गई है. साद्राबाडी निवासी सुनीता सुधाकर पवार प्रसूति धारणी उपजिला अस्पताल में की गई. सिजेरियन के बगैर ही प्रसूति हुई, लेकिन इस दौरान नवजात शिशु की मौत हुई. इससे नाराजी व्यक्त की जा रही है. नवजात के जन्म से पूर्व ही मृत्यु हो जाने के कारण अस्पताल प्रशासन ने सिजेरियन क्यों नहीं किया, ऐसी भी चर्चा है.
इसी तरह धारणी उपजिला अस्पताल में तीन दिनों बाद हिराबंबई गांव की एक महिला प्रसूति के लिए भर्ती हुई. प्रसूता नवजात बालक भी मृत जन्मा. डॉक्टरों को कहना है कि, बच्चा जन्म से पहले ही चल बसा था. इस प्रसूता का सिजेरियन नहीं किया गया था. इस तरह दो माताओं की एक के बाद एक मौत के साथ ही नवजात बच्चे भी काल का ग्रास बन गए. जिसके कारण आदिवसियों में फिर एक बार सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे है.
मेलघाट में वर्ष 1993-94 में कुपोषण और बालमृत्यु के कारण पूरा महाराष्ट्र दहल उठा था. इसी वजह से धारणी ग्रामीण अस्पताल को उपजिला अस्पताल का दर्जा दिया गया था. पांच वर्ष में ही प्रशस्त ईमारत में करोडों रुपए खर्च कर स्वास्थ्य सेवाओं के हिसाब से इसका आधुनिकीकरण किया गया. विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई गई, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की रिढ की हड्डी माने जाने वाले डॉक्टरों का उपजिला अस्पताल में अभाव है. स्वास्थ्य कर्मचारी भी वक्त पर उपलब्ध नहीं रहते. यहां की लापरवाही को देखते हुए आदिवासियों में फिर से भय का वातावरण दिखाई दे रहा है.

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