विवि प्रशासन भूला विभाग प्रमुखों की रोटेशन चयन प्रक्रिया
व्यवस्थापन परिषद के निर्णय की हो रही अनदेखी

* 26 अप्रैल 2023 को लिया गया था निर्णय
अमरावती/दि.13– संत गाडगे बाबा अमरावती विद्यापीठ में शैक्षणिक विभाग प्रमुखों की बारी-बारी से तथा रोटेशन पद्धति से चयन करने की प्रक्रिया हेतु लिये गये निर्णय हेतु एक साल बाद भी अमल नहीं किया गया है. जिसके चलते विद्यापीठ का कामकाज कैसे चलता है, यह समझा जा सकता है. विशेष उल्लेखनीय है कि, रोटेशन पद्धति से चयन प्रक्रिया को लेकर व्यवस्थापन परिषद में 26 अप्रैल 2023 को निर्णय लिया गया था. परंतु विद्यापीठ प्रशासन द्वारा इस निर्णय की खुले तौर पर अनदेखी की जा रही है.
बता दें कि, तत्कालीन कुलगुरु डॉ. प्रमोद येवले की अध्यक्षता के तहत 26 अप्रैल 2023 को व्यवस्थापन परिषद की बैठक में शैक्षणिक पदव्युत्तर विभाग में कार्यरत कनिष्ठ प्राध्यापकों को विभाग प्रमुख होने का अवसर मिले. इस हेतु रोटेशन पद्धति से चयन प्रक्रिया को मंजूरी दी गई थी. लेकिन व्यवस्थापन परिषद के निर्णय को विद्यापीठ प्रशासन ने किस तरह से कचरे की टोकरी में डाल दिया, यह अब सामने आ रहा है.
ज्ञात रहे कि, विद्यापीठ में कुल 34 पदव्युत्तर विभाग है. जिनके विभाग प्रमुख के तौर पर सेवा ज्येष्ठ शिक्षक कार्यरत होते है. जहां पर कई वरिष्ठ शिक्षक सालोंसाल से ठिया जमाए बैठे है. ऐसे में व्यवस्थापन परिषद के निर्णयानुसार हर 3 वर्ष के अंतराल में सभी विभागों में शिक्षकों को विभाग प्रमुख बनने व अवसर देने हेतु निर्णय लिया गया. इस हेतु डॉ. प्रवीण रघुवंशी की अध्यक्षता के तहत एक समिति भी गठित की गई थी. परंतु व्यवस्थापन परिषद के निर्णय सहित समिति के निर्णय व रिपोर्ट को विद्यापीठ प्रशासन द्वारा पूरी तरह से अनदेखा कर दिया गया.
* रोटेशन से इंकार के पीछे मास्टर माइंड कौन?
विद्यापीठ में शैक्षणिक विभाग प्रमुखों का रोटेशन पद्धति से चयन करने से संबंधित निर्णय होने के बाद भी इसका पर्दे के पीछे से विरोध करने वाला मास्टर माइंड कौन है. इसे लेकर विद्यापीठ स्तर पर जबर्दस्त चर्चाएं चल रही है. वहीं सूत्रों के जरिए यह भी पता चला है कि, अपनी विभाग प्रमुख की कुर्सी न चली जाये, इस हेतु कुछ विभाग प्रमुखों द्वारा कुलगुरु को अलग पद्धति से ‘मैनेज’ किया जा रहा है.