
गुरुकुंज मोझरी/दि.25– आशा स्वंयसेविकाओं की विगत 18 अक्टूबर से शुरु बेमियादी हडताल के कारण स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हुई है. स्वास्थ्य सेवा का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा. गुरुकुंज मोझरी में कुछ स्थानों पर गर्भवती माता व बालकों को 20 प्रतिशत टीकाकरण 2 तो कही 0 प्रतिशत टीकाकरण हुआ है. टीकाकरण उपकेंद्रों में स्वास्थ्य सेवक व अधिकारी अपने काम में व्यस्त दिखाई देते हे. आम जनता के लिए स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिलें इसके लिए 14 साल पूर्व आशा सेविकाओं की नियुक्ति की गई, कम मानधन पर भी वह जनता को सेवा दे रही है. मानधन के लिए कई बार आंदोलन किया, किंतु सरकार ने अनदेखी की. इसलिए आशा वर्कर ने बेमियादी हडताल का ऐलान करने से कई स्थानों पर स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हुई है.
तथा टीकाकरण के काम को ब्रेक लगा है. टीकाकरण नहीं होगा तो प्रतिरोधक शक्ति कम होगी, इसके लिए जिम्मेदार कौन?, यह सवा जनता कर रही है. स्वास्थ्य सेवा का महत्वपूर्ण जरिया रहने वाले आशा सेविकाओं को 24 घंटे काम करना पडता है. गांव-गांव जाकर डेंगू, मलेरिया, टीबी के मरीजों की खोज कर उन्हें सेवा देनी होती है. प्रसुति के लिए महिलाओं को जिला अस्पताल, डफरीन अस्पताल, तिवसा के सरकारी अस्पताल में भर्ती करना पडता है. गर्भवति की प्रसुति सुरक्षित हो और बाल मृत्यु का प्रमाण कम होने के लिए आशा सेविकाएं अस्पताल में निरंतर सेवा देती है. इतनाही नहीं तो उन्हें मातृवंदन योजना, टीकाकरण, मिशन इंद्रधनुष, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, आभाकार्ड आदि अनेक काम सरकार ने कम वेतन देकर सौंपे है. हर साल दिवाली बोनस, स्वास्थ्य सेवा में शामिल करने की मांग को लेकर आशा वर्कर्स हडताल कर ही है. सरकार ने आशा सेविकाओं की मांगों पर ध्यान केंद्रीत कर उन्हें दिवाली बोनस, 10 हजार रुपए तक वेतन देने की मांग आशा स्वयंसेविकाओं ने सरकार से की है.