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तिवसा में भाजपा से कौन होगा प्रत्याशी?

अचलपुर के बाद पार्टी उठा रही फूंक फूंककर कदम

* रविराज देशमुख व राजेश वानखडे की ओर से पेश की गई है दावेदारी
* ‘नये व पुराने’ को लेकर तिवसा में भी हो सकता है टकराव
अमरावती/दि.22 – जिस तरह से कुछ वर्ष पहले पार्टी में शामिल हुए प्रवीण तायडे को अचलपुर निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा द्वारा प्रत्याशी बनाये जाते ही पार्टी के पुराने व निष्ठावान पदाधिकारियों की ओर से बगावती सूर उठाये गये. कुछ वैसा ही खतरा इस समय पार्टी के समक्ष तिवसा निर्वाचन क्षेत्र में भी है. जहां पर पार्टी के बेहद पुराने व निष्ठावान कार्यकर्ता रहने वाले रविराज देशमुख तथा करीब दो-ढाई वर्ष पहले शिवसेना छोडकर भाजपा में शामिल हुए राजेश वानखडे भाजपा की टिकट पाने की रेस में है. इन दोनों की दावेदारी के चलते पार्टी नेतृत्व के सामने भी असमंजस वाली स्थिति बनी हुई है कि, आखिर दोनों में से किसे पार्टी द्वारा अपना प्रत्याशी बनाया जाये. क्योंकि यदि राजेश वानखडे प्रत्याशी बनाया जाता है, तो तिवसा में भी अचलपुर वाली स्थिति पैदा हो सकती है और पार्टी के पुराने व निष्ठावान कार्यकर्ताओं द्वारा बगावत की जा सकती है. वहीं यदि रविराज देशमुख को पार्टी प्रत्याशी बनाया जाता है, तो फिर भाजपा के उस वादे का क्या होगा, जो राजेश वानखडे के साथ शिवसेना छोडकर भाजपा में आते समय किया गया था.
उल्लेखनीय है कि, भाजपा सहित महायुति के लिए तिवसा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र पर जीत हासिल करना बेहद महत्वपूर्ण व प्रतिष्ठापूर्ण है. क्योंकि तिवसा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस नेत्री यशोमति ठाकुर लगातार तीन बार जीत हासिल कर चुकी है और अब अपना विजयी चौका लगाने के लिए मैदान में उतर रही है. इसके साथ ही इस समय तिवसा क्षेत्र से अमरावती जिले की कांग्रेस में विधायक यशोमति ठाकुर का निर्विवाद नेतृत्व है. ऐसे में महायुति द्वारा कांगे्रस प्रत्याशी यशोमति ठाकुर को हराने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकी जाएगी. यह अभी से तय है. लेकिन यशोमति ठाकुर के खिलाफ महायुति की ओर से प्रत्याशी कौन होगा. यहीं बात अभी तक तय नहीं हो पायी है. वहीं अब प्रत्याशियों के नामों की पहली सूची घोषित होते ही अचलपुर विधानसभा क्षेत्र में जिस तरह के बगावती स्वर पार्टीजनों द्वारा उठाये गये. उसे देखते हुए अब पार्टी द्वारा तिवसा निर्वाचन क्षेत्र को लेकर बडी सतर्कता के साथ कदम उठाये जा रहे है. क्योंकि अचलपुर की तरह तिवसा निर्वाचन क्षेत्र में भी नये विरुद्ध पुराने वाला विवाद खडा हो सकता है.
बता दें कि, रविराज देशमुख शुरुआत से भाजपा के साथ जुडे हुए है और पार्टी के बेहद समर्पित व प्रतिबद्ध पदाधिकारी भी है. वहीं तिवसा निर्वाचन क्षेत्र पर अपनी मजबूत पकड रखने के साथ ही विगत लोकसभा चुनाव में तिवसा निर्वाचन क्षेत्र से राजेश वानखडे ने सेना प्रत्याशी के तौर पर कांग्रेस नेत्री यशोमति ठाकुर को बेहद तगडी चुनौती दी थी. लेकिन आगे चलकर शिवसेना में हुई दोफाड के बाद शिवसेना के किसी भी गुट में शामिल होने की बजाय राजेश वानखडे ने भाजपा का दामन थाम लिया था और भाजपा नेताओं द्वारा उन्हें पार्टी ेमें शामिल किये जाते समय आश्वासन दिया गया था कि, विधानसभा चुनाव में उन्हें पार्टी की ओर से टिकट देते हुए प्रत्याशी बनाया जाएगा. ऐसे में तिवसा निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा का टिकट पाने की रेस में पुराने व निष्ठावान कार्यकर्ता रहने वाले रविराज देशमुख के साथ ही टिकट के आश्वासन पर ही शिवसेना छोडकर भाजपा में आये राजेश वानखडे शामिल है. इन दोनों में से अब किसे टिकट दिया जाये और किसे समझा बुझाकर शांत बिठाया जाये. इस सवाल को लेकर भाजपा काफी असमंजस में दिखाई दे रही है. साथ ही साथ पार्टी द्वारा इस बात का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है कि, अब जिले के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में अचलपुर जैसी स्थिति न बने और कही से भी पार्टीजनों द्वारा बगावत न की जाये. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि, भाजपा द्वारा तिवसा निर्वाचन क्षेत्र में रविराज देशमुख या राजेश वानखडे में से किसे अपना प्रत्याशी बनाकर कांगे्रस नेत्री यशोमति ठाकुर के समक्ष चुनौती के तौर पर पेश किया जाता है.

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