काम एक का, सभा दूसरे की, प्रचार तीसरे का
‘छांछ लेने जा रहे और बर्तन भी छिपा रहे’

* हर कोई राजनीतिक तौर पर एक्सपोज होने से बच रहा
* इस बार के चुनाव में दिख रहा जबर्दस्त राजनीतिक दबाव
* राजनीति से इतर व्यापारिक व व्यक्तिगत संबंध आ रहे आडे
अमरावती/दि.19- अमूमन चुनाव के समय लोगबाग अलग-अलग राजनीतिक खेमों में बंट जाते है और खुलकर अपने-अपने पसंदीदा पार्टियों व प्रत्याशियों का समर्थन करते हुए उनके पक्ष में जमकर प्रचार भी करते है. किंतु इस बार के चुनाव में पहली मर्तबा ऐसा हो रहा है कि, ज्यादातर लोगबाग खुलकर यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि वे हकीकत में किस ओर है. साथ ही कई लोगों के साथ स्थिति यह भी है कि, वे सुबह किसी एक प्रत्याशी का काम करते दिखाई देते है, दोपहर में किसी दूसरे प्रत्याशी की सभा में मौजूद रहते है और शाम ढलते-ढलते किसी तीसरे प्रत्याशी का प्रचार करते दिखते है. साथ ही साथ अपने व्यक्तिगत समर्थन के बारे में किसी से कुछ भी खुलकर नहीं कहते. यानि कुल मिलाकर स्थिति यह है कि, ‘छांछ लेने जा रहे और बर्तन भी छिपा रहे.’ कुछ लोगों के साथ तो यहां तक की मजबूरी है कि, उन्हें बर्तन के साथ-साथ छांछ भी छिपानी पड रही है.
बता दें कि, आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अमरावती संसदीय सीट से भाजपा प्रत्याशी नवनीत राणा, महाविकास आघाडी के कांग्रेस प्रत्याशी बलवंत वानखडे व प्रहार जनशक्ति पार्टी के प्रत्याशी दिनेश बूब को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है. अमरावती लोकसभा क्षेत्र में इस बार जहां एक ओर भाजपा को लेकर एक अलग ही तरह का माहौल चल रहा है. वहीं दूसरी ओर इस बार सर्वे रिपोर्ट में कांग्रेस की स्थिति सबसे मजबूत बतायी जा रही है. वहीं प्रहार जनशक्ति पार्टी की ओर से दिनेश बूब की दावेदारी को भी काफी हद तक सशक्त माना जा रहा है. इन तीनों प्रमुख प्रत्याशियों का अमरावती शहर व ग्रामीण इलाकों में अच्छा खासा जनसंपर्क है. साथ ही आगामी चुनाव के लिए उनके समर्थक पहली एवं ग्रामीण क्षेत्रों में समाज के सभी घटकों तक अपनी पहुंच बना रहे है.
अभी तक सार्वजनिक और दबे स्वर में मुस्लिम, दलित तथा कुणबी, मराठा व पटेल समूदाय द्वारा अपनी भूमिका स्पष्ट की जा चुकी है, जो सबको लगभग पता भी है. इसके अलावा चूंकि तीनों राजनीतिक दलों के नेताओं तथा प्रत्याशियों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत रहने वाले लोगों के अच्छे खासे राजनीतिक, व्यापारिक व व्यक्तिगत संबंध है और कही-कही पर इन संबंधों की ‘ओवर लैपिंग’ भी हो रही है. ऐसे में कई लोगों की स्थिति ‘सांप-छछूंदर’ वाली हो गई है तथा उनसे न उगलते बन रहा है और न ही निगलते बन रहा है. यही वजह है कि, ऐसे लोग ‘छांछ लेने जाते समय बर्तन छिपाने के साथ-साथ छांछ भी छिपा रहे’ है, ताकि वे किस ओर है, इसका पता किसी को न चल सके.
यह स्थिति विशेष तौर पर औद्योगिक व व्यापारिक क्षेत्र के साथ जुडे लोगों की है. जिनके लिए किसी एक राजनीतिक दल या प्रत्याशी का समर्थन करना और किसी के प्रति विरोध दर्शाना यानि ‘इधर कुआं, उधर खाई’ वाली स्थिति बन जाती है. ऐसे में औद्योगिक व व्यापारिक क्षेत्र से जुडे लोग अपने आपको चुनावी काल के दौरान सभी के साथ दिखाने का प्रयास कर रहे है तथा हर प्रत्याशी के बुलावे पर उसकी चौखट पर जाकर हाजिरी लगा रहे है. यहीं वजह है कि, ऐसे कई लोग लगभग हर जगह दिखाई दे रहे है. लेकिन यह पता ही नहीं चल पाता कि, वे आखिर किस ओर है. लगभग और प्रत्याशी की चौखट पर दिखाई देने वाले ऐसे कई लोगों की यह कोशिश भी होती है कि, इस बात का पता दूसरे प्रत्याशी को न चल पाये. जिसके लिए वे जरुरी एहतियात भी बरतते दिखाई देेते है. इससे यह भी स्पष्ट हो रहा है कि, इस बार अमरावती संसदीय सीट का मुकाबला वाकई बेहद कडा होने वाला है और इस बार किसका पलडा भारी रहेगा, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है. ऐसे में जीत किसकी होगी. इसे लेकर संभ्रम के साथ-साथ जबर्दस्त उत्सुकता भी बनी हुई है तथा इसी संभ्रम की वजह से लोगबाग ‘छांछ लेने जाते समय बर्तन छिपाने’ का काम कर रहे है.