मेडिकल चला रहे हैं या किराना दुकान?
एक साल में 120 दवा विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित

नागपुर/दि.21 – रोगियों की जान से खिलवाड़ करने वाले दवा विक्रेताओं के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाएं देने और तकनीकी नियमों का उल्लंघन करने के मामलों में जिले के करीब 120 खुदरा और थोक दवा विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं, जबकि 6 लाइसेंस रद्द किए गए हैं.
बता दें कि, नागपुर जिले में थोक और खुदरा मिलाकर लगभग 6 हजार मेडिकल स्टोर संचालित हैं, लेकिन उनकी नियमित जांच के लिए पर्याप्त मनुष्यबल उपलब्ध नहीं है. इसका फायदा उठाकर कई दुकानदार नियमों की अनदेखी करते पाए गए. जांच में सामने आया कि कई मेडिकल स्टोर्स में जिस फार्मासिस्ट के नाम पर लाइसेंस है, वह दुकान पर मौजूद ही नहीं रहता. लाइसेंस किराये पर देकर अनुभवहीन लोगों से दवा बिक्री कराई जा रही है, जिससे गलत दवा देने का खतरा बढ़ जाता है.
* कार्रवाई का विवरण
अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच अन्न व औषध प्रशासन की कार्रवाई में 104 खुदरा दवा विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित, 5 खुदरा विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द, 16 थोक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित, 1 थोक विक्रेता का लाइसेंस रद्द किए गए है. कुल मिलाकर 120 निलंबन और 6 रद्दीकरण किए गए.
* एक्सपायरी दवा पर विशेष चेतावनी
प्रशासन ने नागरिकों को दवा खरीदते समय स्ट्रिप पर लिखी एक्सपायरी डेट जांचने की सलाह दी है. एक्सपायर्ड दवा लेने से रिएक्शन या बीमारी बढ़ने का खतरा रहता है. कानून के अनुसार मेडिकल स्टोर में एक्सपायर्ड दवाओं के लिए अलग कम्पार्टमेंट होना जरूरी है, लेकिन कई दुकानों में इन्हें बिक्री के लिए रखा जाता पाया गया.
* मेडिकल हब बनने के साथ बढ़ी अनियमितताएं
नागपुर को मध्य भारत का मेडिकल हब माना जा रहा है. मल्टीस्पेशियलिटी अस्पतालों के साथ शहर और जिले में दवा दुकानों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन प्रतिस्पर्धा के चलते नियमों की अनदेखी भी बढ़ रही है.
* बिल लेना जरूरी
सहायक आयुक्त मनीष चौधरी के अनुसार, दवा निरीक्षक समय-समय पर जांच करते हैं. बिना पर्ची दवा बिक्री, फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति, तापमान नियमों का उल्लंघन जैसी त्रुटियां मिलने पर नोटिस और संतोषजनक जवाब न मिलने पर कार्रवाई की जाती है. उन्होंने नागरिकों से दवा खरीदते समय पक्का बिल लेने की भी अपील की है.





