बरसात पूर्व प्रबंधन पर दे ध्यान

मानसून के आगमन को अब थोडे ही दिन शेष रह गये है. लेकिन बरसात पूर्व प्रबंधन के लिए जो कार्य किए जाने थे उन्हें अभी तक गति प्रदान नहीं हुई है. परिणामस्वरूप कोरोना महामारी के संकट से जूझ रहे अमरावती महानगर ग्रामीण क्षेत्रों को बरसात में अन्य समस्याओं से न उलझना पडे. हर वर्ष बरसात पूर्व प्रबंधन में मई माह के आरंभ से ही नालों में जमा गाल निकालने का कार्य शुरू किया जाता है. लेकिन इस बार ऐसा कुछ कार्य आरंभ हुआ हो यह स्पष्ट नहीं है. सारी यंत्रणा कोरोना संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए प्रयत्नशील है. इसके लिए आवश्यक उपाय योजनाएं, समय पर लसीकरण सहित अन्य बातों को पूरा करने के लिए प्राथमिकता दी जा रही है. यह बात अलग है कि अनेक केन्द्रों पर टीके उपलब्ध नहीं है. जिसके कारण लोगों को बार-बार चक्कर लगाने पड रहे है. खासकर सरकार ने पहला टीका लगाते समय निजी अस्पतालो में भी टीके की व्यवस्था की थी. अब वह व्यवस्था भी हटा ली गई है. टीके केवल जिलाधीश द्वारा निर्धारित कोविड केन्द्रों में उपलब्ध है्. अनेक लोगों ने टीके लगाते वक्त कोवैक्सीन का टीका लगवाया है. यह टीका लोगों ने निजी अस्पतालों में लगाया है. लेकिन अब निजी अस्पतालों में टीका उपलब्ध नहीं है. विशेष यह कि कोविशील्ड टीके में पहले व दूसरे के बीच ८४ दिन का अंतर रखा गया है. लेकिन कोवैक्सीन के मामले में कितने दिन का अंतर रखना चाहिए इस बारे में कोई गाईड लाईन नहीं जारी की गई है. इस हालत में प्रशासन को सही गाइड लाइन जारी कर टीके उपलब्ध कराना चाहिए.
बेशक यंत्रणा कोविड १९ के संक्रमण को रोकने के लिए भरपूर योगदान दे रही है. लेकिन यह सब करते हुए बरसात पूर्व प्रबंधन के कार्य को भी गतिशील करना चाहिए. अमरावती में अनेक स्थानों पर बरसात आने पर जल जमाव की स्थिति निर्माण हो जाती है. ऐसे में पानी निकासी के लिए भरपूर प्रबंध का होना अपेक्षित है. हालांकि संबंधित यंत्रणा ने इस दिशा में कार्य आरंभ तो किया है पर उसे गति नहीं मिल पा रही है. आनेवाली ७ तारीख को मानसून का महाराष्ट्र में आगमन हो जायेगा. वैसे भी मानसून की आहट महसूस होने लगी है. हाल ही में अरब समुद्र में तूफान के कारण राज्य में अनेक स्थानों पर बरसात हुई है. अब बंगाल की खाडी में भी तूफान की शुरूआत हो गई है. जाहीर है आनेवाले दिनों में यह तूफान और भी आगे बढेगा. जिससे अनेक प्रांतों में बरसात होने की संभावना है. इसलिए योग्य रूप से बरसात का प्रबंधन का कार्य शुरू हो जाना चाहिए.
मुख्यमंत्री द्वारा इस समय लॉकडाउन की बात कही गई थी. तब उन्होंने कहा था. लॉकडाउन में बरसात पूर्व प्रबंधन के कार्य किए जायेंगे. अत: इस बात का अहसास सरकार को है. लेकिन सरकार की ओर से अधिकृत तौर पर भविष्य में यह कार्य आरंभ करने की घोषणा भी तभी तय कर देनी चाहिए थी. लेकिन अब बरसात सिर पर आ गई है. इसलिए जरूरी है कि बरसात पूर्व प्रबंधन के कार्य आरंभ किए जाए. यदि कार्य अभी भी आरंभ किए जाते है तो आनेवाले दिनों ेमें कोई कठिनाई नहीं होगी. बरसात पूर्व प्रबंधन के दौरान इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए. मानवीय सृष्टि को बचाना अति आवश्यक है. बरसात में यदि पानी निकासी की व्यवस्था रहती है तो जल जमाव का खतरा कम हो जायेगा. हाल ही में शहर में बनी कांक्रीटीकरण किया गया है. जिससे सडके ऊंची हो गई है.परिणामस्वरूप बहाव का पानी ऐसे घरों में घुस जाता है. नालों का गाल न निकालने के कारण पानी का बहाव सुचारू हो जाता है. लेकिन इस वर्ष यह कार्य आरंभ नहीं हो पाया है. जिससे भविष्य में यदि मूसलाधार वृष्टि होती है तो लोगों को भारी परेशानी से गुजरना पड सकता है. इसलिए प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल कार्य आरंभ करे.
कुल मिलाकर बरसात पूर्व प्रबंधन का कार्य मई के आरंभ में ही हो जाना चाहिए था. लेकिन अब यह कार्य पिछड़ रहा है. जरूरी है कि इस कार्य को गतिशील बनाया जाए व बरसात आरंभ होने से पहले सारे कार्य पूर्व किए जाने चाहिए. बरसात के मौसम में पर्यावरण को भी विशेष ध्यान देना जरूरी हो गया है. क्योंकि पर्यावरण की आवश्यकता इस वर्ष हर किसी को महसूस हुई. कोविड-१९ के मरीजों को जहां ऑक्सीजन के लिए भटकना पडा वहीं पर सामान्य वातावरण में भी ऑक्सीजन की कमी महसूस की जा रही है. इस कमी को पूरा करने के लिए पर्यावरण का जतन जरूरी है. आनेवाले ५ जून को पर्यावरण दिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है. हमें भी इस दिन की महत्ता को समझते हुए पर्यावरण सवंर्धन में अपना योगदान देने का कार्य करना चाहिए.