बच्चू कडू हिमालय की वादियों में कर रहे ट्रैकिंग

वहां से किया विरोधियों को टारगेट

* हाथ में संविधान और भगवत गीता
अमरावती/दि.8 – प्रहार जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व राज्य मंत्री बच्चू कडू इस समय हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं में ट्रेकिंग का आनंद ले रहे हैं. इस अभियान के दौरान उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है. इसमें उन्होंने प्रकृति के वर्णन के साथ अपने राजनीतिक सफर और सिद्धांतों पर भी बात करते हुए विरोधियों पर अप्रत्यक्ष तंज कसा है.
* हिमालय की चुनौती, सह्याद्री की याद
वीडियो में बच्चू कडू एक ऊंची चट्टान पर खड़े दिखाई दे रहे हैं और उनके पीछे बर्फ से ढके हिमालय के शिखर नजर आ रहे हैं. इस दौरान उन्होंने कहा, मैं सह्याद्री पर्वतों में घूम चुका हूं. पन्हाला-पावनखिंड घूमते समय बारिश की बूंदें गिरती थीं, उसकी याद यहां आ रही है. रायगढ़ चढ़ते समय जो कठिनाइयां महसूस होती थीं, उसकी याद ‘नामचे बाजार’ की चढ़ाई के दौरान आती है. सह्याद्री में बहुत गर्मी होती है, जबकि यहां उतनी ही ठंड है, ऐसा कहते हुए उन्होंने दोनों भौगोलिक परिस्थितियों की तुलना की.
* ईमानदारी बनाम बेईमानी
बच्चू कडू ने इस दौरान सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर भी टिप्पणी की. वर्तमान में उन पर सत्ताधारियों द्वारा आरोप लगाए जा रहे हैं. भाजपा के अचलपुर के विधायक प्रवीण तायडे के चचेरे भाई की शिकायत पर कडू सहित तीन लोगों के खिलाफ जान से मारने की साजिश रचने का मामला दर्ज किया गया है. बच्चू कडू ने कहा, जैसे आकाश और पर्वत की स्पर्धा है, वैसे ही आज बेईमानी से जीने वाले लोग और ईमानदारी से जीने वाले लोगों के बीच मुकाबला है. हमें इस स्पर्धा में जीतकर सभी को समानता के मार्ग पर लाना है. जिसके पास मेहनत ज्यादा है, उसे भागीदारी भी ज्यादा मिलनी चाहिए, यह सोच लेकर ही हम आगे बढ़ रहे हैं.
* संविधान साथ लेकर कूच
बच्चू कडू ने कहा, हिमालय जैसे आकाश से प्रतिस्पर्धा कर रहा है. ऐसे बुद्धभूमि में हम भगवद्गीता और भारतीय संविधान को साथ लेकर एवेरेस्ट के बेस कैंप की ओर जा रहे हैं. यह एक अच्छा अनुभव है.
* पहले ही दी थी जानकारी
बच्चू कडू के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद उन्होंने आरोपों का खंडन करते हुए अपनी हिमालय यात्रा की जानकारी दी थी. यह योजना 15 से 20 दिन पहले ही बनाई गई थी. इसलिए यह कहना कि मैं भाग गया, ऐसा कोई भी अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए. मैं संविधान साथ लेकर इस यात्रा पर गया हूं. हम रक्तदान करने वाले लोग हैं, किसी की जान लेने वाले नहीं हैं. किसानों और दिव्यांगों के अधिकारों के लिए मैं लड़ता रहूंगा, मुझे गिरफ्तारी से डर नहीं है, ऐसा बच्चू कडू ने कहा था.

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