युद्ध के कारण केला, आम, हल्दी का माल खराब होने की कगार पर

निर्यात ठप, रेट धराशाही, उत्पादक संकट में

पथ्रोट/अमरावती/नवी मुंबई/दि.7 – पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच छिडी जंग की अवधी बढते जाने से महाराष्ट्र के फल उत्पादक किसान परेशान हो गये हैं. केले से लेकर आम, अंगूर और हल्दी की निर्यात पर बुरा असर होने के कारण रेट धराशाही हो गये है. वहीं बंदरगाहों पर भेजा गया माल वहां फंस जाने से नष्ट होने की आशंका से भी उत्पादक वर्ग चिंतातुर हो गया है, संकट में फंस गया है. अमरावती के पथ्रोट से केले प्रदेश और देश के अन्य भागों में भेजे जाते है. वह अब औने-पौने दाम पर यहां बेचने पड रहे हैं.
* हापूस उत्पादकों पर दोहरी मार
नवी मुंबई और रत्नागिरी से प्राप्त समाचार के अनुसार हापूस आम का सीजन इस बार पहले ही विलंब से शुरु हुआ. अब युद्ध के कारण निर्यात पर अनिश्चितता मंडरा रही है. जिससे उत्पादकों को भारी नुकसान की आशंका हो गई है. कोंकण से हर वर्ष फरवरी में ही मुंबई के मार्केट में हापूस आम आ जाते हैं. फिर वहां से पश्चिम एशिया के देशों में निर्यात होती है. युद्ध के कारण यह माल फंस गया है. इस बार हापूस का उत्पादन पहले ही 30-40 प्रतिशत घट का अंदेशा था. अब निर्यात ठप हो जाने से देशज मार्केट में कम दाम पर माल बेचना पडेगा. उससे कोंकण के आम उत्पादकों का भारी नुकसान का अंदेशा बताया जा रहा है. आम व्यापारी और मुंबई एपीएमसी के फल मार्केट संचालक संजय पानसरे ने बताया कि, 20 मार्च के बाद आम की आवक पर रेट तय होंगे. अभी तो उत्पादन कम होने से दरों में बढोत्तरी की पूरी संभावना है. किंतु इस बार उत्पादन कम बताया जा रहा है. युद्ध के कारण निर्यात प्रभावित हो सकता है.
* काटा हुआ केला कहां बेचे?
उधर पथ्रोट के जगदंबा केला सप्लायर्स के संचालक सचिन मांगुलकर ने कहा कि, रमजान के कारण देश में केले की मांग बनी हुई है. नया तरबूज भी अभी आवक सीमित होने से केले की डिमांड कायम है. युद्ध के कारण अगले सप्ताह तक चित्र अधिक भयानक होने की आशंका सचिन मांगुलकर ने व्यक्त की. उधर जानकारों ने बताया कि, लोकल मार्केट में बेचे जाने पर केले के औने-पौने दाम मिलेंगे. इस बीच केला उत्पादक किसान प्रवीण टेहरे ने सवाल उठाया कि, काटा हुआ केला अब कहां बेचा जाये, यह सवाल उत्पादकों के सामने है. किसानों का काफी नुकसान होने की आशंका प्रवीण टेहरे ने बोलकर बतायी. उन्होंने कहा कि, युद्ध की स्थिति रहने से व्यापारी मांग में टालमटोल कर रहे हैं. जलगांव जिले से भी केले का बडे प्रमाण में निर्यात मध्य एशिया के अरब देशों में होता है. अब अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण निर्यातक और किसान हलकान हो गये है. भारतीय बाजार में केले को केवल 1700-2000 रुपए प्रति क्विंटल रेट मिल रहे हैं.
* हल्दी के दाम भी धडाम
हल्दी के रेट भी 2000 हजार रुपए प्रति क्विंटल कम हो जाने की जानकारी सांगली मार्केट में दी गई. अध्यक्ष अमरसिंह देसाई ने बताया कि, युद्ध के कारण एक हजार टन माल बंदरगाह पर अटका है. व्यापारियों की चिंता बढ गई है. ट्रान्सपोटर्स ने माल वापिस ले जाने के लिए कह दिया है. यहां हल्दी के रेट 18300 रुपए प्रति क्विंटल थे. जो अचानक घटकर 16 हजार से भी नीचे आ गये है. हल्दी की बडे प्रमाण में खाडी देशों में निर्यात होती है. निर्यात बंद होने से उत्पादक और व्यापारी दोनों ही चिंता में डूब गये हैं.
* प्याज, अंगूर, अनाज अटका
जेएनपीटी बंदरगाह पर निर्यात के लिए भेजा गया प्याज, अंगूर, अनाज का माल अटका है. वह खराब न हो जाये, इसके लिए उपाय किये जा रहे हैं. मगर व्यापारियों को कंटेनर वापिस ले जाने के लिए कहा गया है. यह जानकारी जेएनपीटी के अधिकारी रवि राव ने दी. उन्होंने बताया कि, अकोडिया कंपनी ने प्याज के 10 कंटेनर दुबई भेजने की तैयारी की थी. किंतु माल भेजा नहीं जा सका. अब एक कंटेनर मॉल शुक्रवार को एपीएमसी में लाया गया. जिसे केवल 9-10 रुपए रेट मिलने से करीब सवा लाख रुपए का नुकसान हो गया.

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