‘मैंने ही और मैं नहीं’ की वजह से उलझा भाजपा नेता सोमैया की बैठक का मामला
महापौर तेजवानी ने अपने बयान का गलत अर्थ निकाले जाने का किया खुलासा

* अपने ही पत्र पर ‘वह’ बैठक बुलाए जाने का स्पष्टीकरण दिया, विपक्ष द्वारा मुद्दे को नाहक तूल दिए जाने की बात कही
* भाजपा नेता किरीट सोमैया की मनपा में हुई बैठक पर शहर में तपी हुई है राजनीति
* पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख व पूर्व सांसद गुढे सहित कांग्रेस नेताओं ने बैठक के औचित्य पर उठाएं है सवाल
* मनपा की अगली आमसभा में जमकर गूंज सकता है ‘उस’ बैठक का मुद्दा
अमरावती /दि.24 – अमरावती शहर सहित जिले तथा राज्य के अन्य कई शहरों व तहसीलों में जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी तरीके से जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होने का विगत लंबे समय से मामला उठा रहे भाजपा नेता व पूर्व सांसद किरीट सोमैया द्वारा हाल ही में अमरावती पहुंचकर मनपा मुख्यालय में महापौर श्रीचंद तेजवानी व मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा-चांडक के साथ मनपा के सभागार में एक बैठक की गई. जिसमें पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने मनपा के जन्म-मृत्यु पंजीयन विभाग द्वारा फर्जी प्रमाणपत्र मामले में किए जा रहे कामकाज की समीक्षा करते हुए संबंधितों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए थे. जिसके बाद मनपा मुख्यालय में हुई पूर्व सांसद किरीट सोमैया की बैठक के औचित्य पर पूर्व जिला पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख व पूर्व सांसद अनंत गुढे सहित कांग्रेस के नेताओं व पदाधिकारियों द्वारा सवाल उठाने शुरु कर दिए गए. जिसके तहत सबसे मुख्य आपत्ति इस बार को लेकर उठाई गई कि, क्या किसी पूर्व सांसद को मनपा जैसे स्वायत्त निकाय में बैठक आयोजित कर प्रशासन को निर्देश देने का अधिकार है, या फिर सत्ता पक्ष से जुडे पूर्व सांसद को स्थानीय मनपा प्रशासन द्वारा कुछ ज्यादा ही महत्व दिया जा रहा है. इसी बीच कुछ स्थानीय अखबारों में प्रकाशित महापौर श्रीचंद तेजवानी के एक कथित बयान ने आग में घी डालने का काम किया. जिसमें दावा किया गया था कि, महापौर श्रीचंद तेजवानी को इस बैठक के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी. साथ ही उन्होंने मनपा प्रशासन को यह बैठक आयोजित करने के बारे में कोई पत्र नहीं दिया था. जबकि मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा-चांडक ने इस पूरे मामले को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि, महापौर श्रीचंद तेजवानी के पत्र पर ही उक्त बैठक आयोजित की गई थी. ऐसे में जब दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने इस पूरे मामले को लेकर अपने स्तर पर और अपने तरीके से पडताल की तो पता चला कि, महापौर तेजवानी का बयान सुनने और उसे प्रकाशित करने में ‘मैंने ही और मैं नहीं’ वाले संभ्रम की स्थिति के चलते यह पूरी तनातनी मची हुई है.
दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने जब इस पूरे हंगामे को लेकर जानकारी हासिल करने के लिए महापौर श्रीचंद तेजवानी से संपर्क किया, तो उन्होंने कुछ स्थानीय अखबारों में प्रकाशित अपने बयान पर आश्चर्य जताने के साथ ही कुछ हद तक नाराजगी भी जताई और कहा कि, पूर्व सांसद किरीट सोमैया भाजपा के एक बडे नेता है, जो विगत करीब डेढ-दो वर्षों से फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के मामलो को लेकर राज्यभर में आवाज उठा रहे है और उनके प्रयासों की वजह से ही अमरावती शहर में भी जन्म-मृत्यु के फर्जी प्रमाणपत्रों के कई मामले उजागर हुए है. जिसके बारे में पूर्व सांसद किरीट सोमैया की इससे पहले भी प्रशासक राज के दौरान मनपा मुख्यालय में कई बार बैठकें हो चुकी है. लेकिन तब किसी को उन बैठकों के बारे में कोई आपत्ति नहीं हुई, परंतु अब चूंकि अमरावती मनपा में भाजपा की सत्ता है, तो पूर्व सांसद किरीट सोमैया की बैठक को लेकर कई लोगों को पेट दर्द होना शुरु हो गया.
महापौर श्रीचंद तेजवानी का यह भी कहना रहा कि, पूर्व सांसद किरीट सोमैया की मनपा मुख्यालय में होनेवाली बैठक की उन्हें पूरी तरह से जानकारी एवं पूर्व सूचना थी. जिसके लिए उन्हें पूर्व सांसद किरीट सोमैया के कार्यालय से निवेदन पत्र भी प्राप्त हुआ था. जिसके बाद खुद उन्होंने ही अपने लेटरपैड पर मनपा आयुक्त के नाम पत्र जारी करते हुए बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया था. जिसके आधार पर आयुक्त सौम्या शर्मा द्वारा संबंधित महकमों के अधिकारियों को आमंत्रित करते हुए समीक्षा बैठक बुलाई गई थी. साथ ही महापौर श्रीचंद तेजवानी ने यह भी स्पष्ट किया कि, उस बैठक की अध्यक्षता पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने नहीं, बल्कि महापौर होने के नाते खुद उन्होंने की थी तथा बैठक में उपस्थित पूर्व सांसद सोमैया की ओर से दी गई जानकारियां के आधार पर संबंधितों के नाम आवश्यक कार्रवाई करने से संबंधित दिशा-निर्देश भी जारी किए थे.
इसके साथ ही महापौर श्रीचंद तेजवानी ने यह भी स्पष्ट किया कि, फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र का मामला राज्य सहित देश की आंतरिक सुरक्षा से संबंधित संवेदनशील मुद्दा है और इसे लेकर विपक्ष द्वारा किसी भी तरह की कोई राजनीति नहीं की जानी चाहिए. साथ ही महापौर तेजवानी ने यह भी स्पष्ट किया कि, यदि कोई भी पूर्व सांसद या पूर्व विधायक अमरावती मनपा क्षेत्र से संबंधित किसी महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर उनके पास आता है और उस मुद्दे पर मनपा मुख्यालय के संबंधित विभागों की बैठक बुलाए जाने का आग्रह करता है, तो वे मनपा के संवैधानिक प्रमुख होने के नाते ऐसे आग्रह को सहर्ष स्वीकार करेंगे, ताकि संबंधित पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री अथवा पूर्व विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दे पर विचार-विमर्श करते हुए संबंधित मामले का समाधान किया जा सके. उपरोक्त प्रतिपादन के साथ ही महापौर श्रीचंद तेजवानी ने पूर्व सांसद किरीट सोमैया की फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र मामले को लेकर मनपा में हुई बैठक के संदर्भ में राजनीति नहीं करने का आवाहन विपक्षी दलों से किया है.
* ‘उस’ बैठक को लेकर किसने क्या कहा?
– अन्य पदाधिकारियों को क्यों नहीं बुलाया?
कांग्रेस के शहराध्यक्ष एवं मनपा पार्षद बबलू शेखावत ने उस बैठक को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि, चूंकि अब मनपा का जननिर्वाचित सदन अस्तित्व में है. जिसके चलते जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जैसे संवेदनशील मुद्दे को लेकर बुलाई गई बैठक में उपमहापौर, सभागृह नेता, नेता प्रतिपक्ष व सभी गुट नेताओं को भी आमंत्रित किया जाना चाहिए था. साथ ही सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी इस बैठक की सूचना दी जानी चाहिए थी. परंतु सत्ता पक्ष एवं प्रशासन द्वारा ऐसा करने की बजाए केवल मनपा व पुलिस अधिकारियों को बुलाकर गुपचुप तरीके से बैठक कर ली गई, जिसका कोई औचित्य नहीं है.

– किस अधिकार के तहत हुई बैठक?
शिवसेना उबाठा के संपर्क प्रमुख व पूर्व सांसद अनंत गुढे ने भी ‘उस’ बैठक को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि, पूर्व सांसद रहनेवाले भाजपा नेता सोमैया को किस अधिकार के तहत मनपा जैसे स्वायत्त निकाय में बैठक बुलाने की अनुमति दी गई, इसका जवाब मनपा प्रशासन को देना ही होगा. साथ ही पूर्व सांसद अनंत गुढे ने यह भी कहा कि, यदि अमरावती मनपा क्षेत्र में वाकई कोई बांग्लादेशी या रोहिंग्या आकर बसें है, तो उन्हें पकडकर बाहर करने के अन्य भी कई तरीके है. परंतु इस मुद्दे की आड लेकर सर्वसामान्य नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए.

– आमसभा में उठाया जाएगा मुद्दा
कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख के मुताबिक किरीट सोमैया को पूर्व सांसद होने के नाते मनपा में किसी भी तरह की बैठक आयोजित करने का कोई संवैधानिक अधिकार ही नहीं है. इसके बावजूद यदि सत्ता पक्ष एवं प्रशासन द्वारा सोमैया को यह अधिकार दिया जा रहा है, तो इसी तरह का अधिकार शहर में रहनेवाले पूर्व सांसदों, पूर्व मंत्रियों व पूर्व विधायकों को भी दिया जाना चाहिए. साथ ही पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने यह भी कहा कि, मनपा की आगामी आमसभा में कांग्रेस के पार्षदों द्वारा इस मुद्दे पर आवाज उठाते हुए संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की जाएगी.

– आखिर उस बैठक से कांग्रेस को इतनी तकलिफ क्यों?
विपक्षी नेताओं द्वारा लगाए जा रहे तमाम तरह के आरोपों के बीच भाजपा नेता व पूर्व पार्षद तुषार भारतीय ने पलटवार करते हुए जानना चाहा कि, फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र मामले को लेकर आयोजित बैठक से कांग्रेस को इतनी तकलिफ क्यों है और कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे को लेकर आयोजित बैठक का इतना विरोध क्यों किया जा रहा है. पूर्व पार्षद भारतीय के मुताबिक भाजपा नेता व पूर्व सांसद सोमैया द्वारा किए गए प्रयासों की बदौलत ही अमरावती शहर में जन्म-मृत्यु के फर्जी प्रमाणपत्रों का भांडा फूटा था और कई लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी. ऐसे में यदि उसी मामले में हो रही कार्रवाई का जायजा लेने हेतु पूर्व सांसद सोमैया के आग्रह पर मनपा प्रशासन द्वारा समीक्षा बैठक बुलाई भी गई, तो इसमें गलत क्या हुआ, यह समझ से परे है.

* महापौर के पत्र पर ही बुलाई गई थी वह बैठक
वहीं पूर्व सांसद किरीट सोमैया की मनपा मुख्यालय में हुई बैठक को लेकर गत रोज विपक्षी दलों द्वारा हंगामाखेज आपत्ति उठाए जाते ही मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा ने अपनी ओर से स्थिति स्पष्ट कर दी थी. जिसके तहत आयुक्त सौम्या शर्मा ने कहा था कि, उन्हें उक्त बैठक आयोजित करने के बारे में महापौर श्रीचंद तेजवानी की ओर से बाकायदा एक लिखित पत्र प्राप्त हुआ था. जिसके आधार पर उन्होंने बैठक बुलाते हुए संबंधित महकमों के प्रमुख अधिकारियों को बैठक में उपस्थित रहने हेतु कहा था.






