भाजपा की शारदा खेडकर अकोला की मेयर
अमोल गोगे भी 45 वोट लेकर उप महापौर निर्वाचित

* विदर्भ में पहली मनपा में स्थापित हुई सत्ता
अकोला/ दि. 30- विदर्भ में हाल के महापालिका आम चुनाव पश्चात पहली सत्ता स्थापना अकोला मनपा में हुई. जब शहर सुधार समिति की ओर से भाजपा की शारदा रणजीत खेडकर बहुमतों से महापौर निर्वाचित हुई. उन्होंने शिवसेना उबाठा की सुरेखा काले को परास्त किया. काले को 32 वोट पर सतोष करना पडा. अकोला महापौर पद ओबीसी महिला केे लिए आरक्षित था. उसी प्रकार उप महापौर पद पर भाजपा के ही अमोल गोगे चुने गये. दोनों ही महापौर और उप महापौर उम्मीदवारों को 45 वोट प्राप्त हुए. जिसके बाद भाजपा और समर्थक दलों ने प्रसन्नता महापालिका अहाते में व्यक्त की. उप मुख्यमंत्री अजीत दादा पवार के निधन के कारण जश्न को सीमित रखा गया. ढोल ताशे न बजाते हुए केवल फूल मालाएं नवनिर्वाचित मेयर और डेप्युटी मेयर को समर्थकों ने पहनाई. यहां तक कि नारे भी नहीं लगाए गये.
इस प्रकार मिले वोट
शारदा खेडकर को 45 वोट प्राप्त हुए. इनमें भाजपा के 38, राष्ट्रवादी शरद पवार के 3, राष्ट्रवादी अजीत पवार और शिवसेना शिंदे गट का एक- एक एवं दो निर्दलीय नगरसेवकों का समावेश रहा. एमआयएम के तीन पार्षद तटस्थ रहे. कांग्रेस द्बारा किया गया चमत्कार का दावा फुस्स साबित हुआ. स्पष्ट बहुमत न होने के बाद भी बीजेपी ने सहयोगी दलों के साथ मिलकर अकोला सदन में सतत तीसरी बार सत्ता अपने पास बनाए रखी.
चुनाव प्रक्रिया दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो, इसके लिए पुलिस का बंदोबस्त कडा रहा. आम सभा की अध्यक्षता जिलाधिकारी वर्षा मीना ने की. नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने सभी नगरसेवकों का आभार व्यक्त करते हुए अकोला शहर विकास और जनहित के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प जताया.
पवित्रकार का कदम
कांग्रेस गठबंधन में गए भाजपा के बागी नगरसेवक आशीष पवित्रकार ने ऐन समय पर बीजेपी को समर्थन देकर समीकरण बदल दिए. कांग्रेस विधायक साजिद पठान के दावे धरे रह गये. प्रशासन ने सावधानी रखते हुए चुनाव प्रकिया सुचारू रूप से संपन्न की.
मनपा सदन में दलीय स्थिति
अकोला महापालिका सदन में 80 सदस्य रहे. भाजपा के 38, कांग्रेस के 21, शिवसेना उबाठा के 6, राष्ट्रवादी शरद पवार के 3, वंचित आघाडी के 5, एमआयएम के 3, निर्दलीय 2 और शिवसेना शिंदे एवं राष्ट्रवादी अजीत पवार के एक- एक सदस्य है.
आधा दर्जन मीटिंग फेल
महाविकास आघाडी ने बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए 7-8 ग गुप्त बैठकें की. कांग्रेस और वंचित ने शिवसेना उबाठा के प्रत्याशी को समर्थन का ऐलान कर 42 का आंकडा प्राप्त करने का दावा किया था. हकीकत में महापौर और उप महापौर पद के उम्मीदवार 32 से आगे नहीं बढ पाए. एमआयएम के तटस्थ रहने से आघाडी की अडचन बढ गई थी. उसी प्रकार निर्दलीय आशीष पवित्रकार ने समय पर बीजेपी खेमे में प्रवेश कर लिया. बीजेपी ने बहुमत का 42 का जादुई आंकडा पार कर लिया. शहर की राजनीति पर बीजेपी ने अपनी पकड घट होने की बात साबित कर दी.





