
बुलढाणा/दि.13- महाराष्ट्र संतों की भूमि है. समाज प्रबोधन करने का कार्य संत विचारों ने किया है. इसरुल के श्री संत चोखोबाराय के मंदिर एवं यह भूमि तीर्थस्थल के रुप मे विकसित होने के लिए शासन द्वारा सर्वतोपरी मदद की जाएगी, ऐसा आश्वासन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने यहां दिया.
संत चोखोबाराय की जन्मभूमि मेहुणा राजा के समीप चिखली तहसील के इसरुल में संत चोखोबाराया के मंदिर का कलशारोहण व लोकार्पण समारोह मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के हाथों किया गया. ्इस समय वे बोल रहे थे. इस समय रोहये मंत्री संदीपान भुमरे, सांसद प्रताप जाधव, विधायक किरण सरनाईक, वसंत खंडेलवाल, नारायण कुचे, संजय रायमुलकर, संजय गायकवाड़, श्वेता म्हाले, गोपीकिसन बाजोरिया, हरिभाऊ बागड़े, विजय जगताप, हभप पुरुषोत्तम महाराज पाटील, पाटणकर महाराज समेत अनेक मान्यवर उपस्थित थे.
शिंदे ने कहा कि आध्यात्मिक परंपरा का स्थान राजकीय व अन्य क्षेत्रों से ऊपर है. मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें पंढरपुर में आषाढ़ी एकादशी की पूजा करने का सौभाग्य मिला. उन्होंने कहा कि वारकरी संप्रदाय महाराष्ट्र का भूषण है. हभप पुरुषोत्तम महाराज पाटील के प्रयासों से चोखोबाराय का मंदिर साकार हुआ है और यह परिसर के रुप में विकसित करने के लिए आवश्यक कई सुविधा साकार की जोगी. लाखों भाविक वारी करके पंढरपूर के लिए जाते हैं, उनसे प्रेरणा मिलती है. संत के विचारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए संत विद्यापीठ बनाया जाएगा. मंदिर के विकास हेतु सर्वतोपरि मदद की जाएगी, ऐसा भी मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा.
इसरुल के कार्यों से संत परंपरा का प्रतिक, पवित्रता दिखाई देती है. इस अवसर पर हभप ज्ञानेश्वर महाराज पठाडे, पंकज महाराज गावंडे सहित हजारों वारकरी उपस्थित थे. कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को संत चोखोबाराय की प्रतिमा भेंट की गई.
इसरुल के संत चोखोबाराय के मंदिर का लोकार्पण शुक्रवार को मुख्यमंत्री के हाथों किया गया. धार्मिक समारोह होने के कारण मुख्यमंत्री ने राजकीय विषयों पर चर्चा न करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के परिणाम पर अपेक्षानुसार बोलते हुए सूचन विधान किये. उन्होंनेे कहा कि इच्छा के अनुसार कल रिजल्ट लगा और आज संत शिरोमणी चोखोबा के चरणों में नतमस्तक होने का भाग्य मिला. इसलिए मैं स्वयं को भाग्यवान मानता हूं. ऐसी ग्वाही इस समय मुख्यमंत्री शिंदे ने की है.