मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में ‘बंपर वोटिंग’ : वीआईपी प्रभागों में ‘मामला सुस्त’
शहर में सुबह मतदान की रफ्तार रही बेहद सुस्त, धीरे-धीरे मतदान का बढा प्रतिशत

* पश्चिमी क्षेत्र के मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लग गई थी कतारें
* शहर के अन्य क्षेत्रों में कई मतदान केंद्रों पर ज्यादातर समय दिखा सन्नाटा
* पिछडी बस्तियों के मतदाताओं में मतदान को लेकर दिखा जबरदस्त उत्साह
* पढे-लिखे व साधन संपन्न एवं प्रबुद्ध क्षेत्रों के चिंतनशील मतदाताओं में मतदान को लेकर उदासीनता
* इक्का-दुक्का स्थानों से सामने आई शिकायतें, अधिकांश केंद्रों पर मतदान रहा शांतिपूर्ण
अमरावती/दि.15 – करीब 9 साल के लंबे अंतराल और लगभग 4 साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद आज हुए अमरावती महानगर पालिका के चुनाव को लेकर पूरी उम्मीद थी कि, शहर के नागरिकों द्वारा लंबे समय बाद हो रहे चुनाव को लेकर जबरदस्त उत्साह दिखाया जाएगा और शहर के सभी प्रभागों के मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की अच्छी-खासी भीडभाड दिखाई देने के साथ ही बंपर वोटिंग के आंकडे भी सामने आएंगे. लेकिन हकीकत का नजारा इस उम्मीद की तुलना में काफी हद तक विपरित रहा. क्योंकि आज शहर ने मतदान के दिन दो अलग-अलग चेहरे दिखा दिए. एक तरफ वे इलाके थे, जिन्हें हमेशा हाशिए पर रखा गया-जहां मुस्लिम बहुल और पिछड़ी बस्तियों में लोकतंत्र सुबह से जागा और मतदान केंद्रों पर कतारें खुद बयान बन गईं. दूसरी तरफ वे प्रभाग रहे, जिन्हें वीआईपी, पढ़ा-लिखा, संभ्रांत और प्रबुद्ध कहा जाता है-जहां लोकतंत्र दिनभर एसी कमरों और ड्रॉइंग रूम की बहसों में कैद रहा. ऐसे में कहा जा सकता है कि, पिछडी बस्तियों में वोट की ताकत सड़कों पर दिखी, वहीं दूसरी ओर वीआईपी इलाकों में लोकतंत्र घर में सोता रहा.
आज सुबह 7.30 बजे से मतदान की प्रक्रिया शुरु होने के बाद शहर में मतदान की शुरुआत बेहद सुस्त रही, लेकिन जैसे-जैसे समय बढ़ता गया, कुछ क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत ने रफ्तार पकड़ी. खासकर पश्चिमी क्षेत्र के मुस्लिम बहुल इलाकों में सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं और मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह नजर आया. इसके उलट, शहर के कई वीआईपी, पढ़े-लिखे और साधन-संपन्न माने जाने वाले प्रभागों में दिनभर मतदान केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहा. यहां के चिंतनशील और प्रबुद्ध मतदाताओं में मतदान को लेकर स्पष्ट उदासीनता दिखाई दी, जिससे लोकतांत्रिक भागीदारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं. वहीं, पिछड़ी बस्तियों और आम मेहनतकश तबके के मतदाताओं ने लोकतंत्र के प्रति अपनी जागरूकता का परिचय देते हुए बढ़-चढ़कर मतदान किया. कई केंद्रों पर मतदाता सुबह से ही कतारों में खड़े नजर आए. ऐसे में कहा जा सकता है कि, जहां हाशिए के समाज ने मतदान को अधिकार और जिम्मेदारी समझा, वहीं तथाकथित वीआईपी इलाकों की बेरुखी ने चुनावी प्रक्रिया की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए.
* सुबह सुस्ती, दोपहर में बदला मिजाज
आज सुबह मतदान की प्रक्रिया शुरु होने के बाद शुरुआती दो घंटों में शहर के अधिकांश मतदान केंद्रों पर मतदान की रफ्तार धीमी रही और सुबह 9.30 बजे तक शहर में कुल 6.60 फीसद मतदान ही हुआ था. आलम यह था कि, कई केंद्रों पर तो घंटों तक सन्नाटा पसरा रहा. हालांकि दोपहर चढ़ते-चढ़ते मतदान ने थोडी रफ्तार पकडी और सुबह 11.30 बजे तक मतदान का औसत आंकडा 17.10 फीसद पर पहुंच गया था. वहीं दोपहर 1.30 बजे तक शहर के 22 प्रभागों में औसत 27.89 फीसद मतदान हो पाया. जिसे अपेक्षाकृत लिहाज से कम औसत भी कहा जा सकता है.
मुस्लिम बहुल क्षेत्रों व पिछड़ी बस्तियों में लोकतंत्र का उत्सव
खास बात यह भी रही कि, शहर के पश्चिमी क्षेत्र स्थित मुस्लिम बहुल इलाकों में मतदान ने सुबह से ही अच्छी-खासी तेजी पकड़ी और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों के मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की कतारें लगती दिखाई दी. इन क्षेत्रों में बुजुर्ग, महिलाएं और युवा, ऐसे तीनों वर्गों के मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी यहां साफ दिखाई दी. इसके साथ ही शहर की पिछड़ी बस्तियों और मेहनतकश तबकों में भी मतदान को लेकर खासा उत्साह देखा गया. ऐसे क्षेत्रों के लोगों ने इसे सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि अपनी आवाज और अस्तित्व से जुड़ा सवाल माना. कई मतदाताओं ने सुबह-सुबह मतदान कर दैनिक कामकाज पर निकलना प्राथमिकता दी, जिससे इन इलाकों में मतदान प्रतिशत औसत से कहीं अधिक रहा.
* वीआईपी इलाकों में ‘कम्फर्ट जोन’ की राजनीति
इसके उलट, वीआईपी और पॉश प्रभागों में मतदान को लेकर गहरी उदासीनता देखने को मिली. आरामदेह जीवन, निजी साधनों की उपलब्धता और ‘कुछ नहीं बदलेगा’ जैसी मानसिकता ने यहां के मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचने से रोके रखा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही वर्ग चुनावी बहसों में सबसे ज्यादा सक्रिय दिखता है, लेकिन मतदान के दिन सबसे ज्यादा अनुपस्थित रहता है. सबसे चिंताजनक तस्वीर शिक्षित और प्रबुद्ध माने जाने वाले क्षेत्रों से सामने आई, जहां लोकतांत्रिक जिम्मेदारी के प्रति उदासीनता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. यह विरोधाभास साफ नजर आया कि जो वर्ग नीति, व्यवस्था और शासन पर सबसे अधिक चर्चा करता है, वही मतदान के दिन दूरी बनाए रखता है.
* बदले संकेत, बदले समीकरण
राजनीतिक जानकारों के अनुसार मतदान का यह असंतुलित पैटर्न चुनावी नतीजों को सीधे प्रभावित कर सकता है. जहां एक ओर संगठित और जागरूक मतदान ने कुछ प्रभागों में मुकाबले को एकतरफा बनाने के संकेत दिए हैं, वहीं कम मतदान वाले वीआईपी इलाकों में हार-जीत का अंतर बेहद कम रहने की संभावना जताई जा रही है. क्योंकि राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो जहां बंपर वोटिंग हुई है, वहां सत्ता के समीकरण पलटने की पूरी संभावना है और जहां मतदान सुस्त रहा, वहां हार-जीत का फैसला कुछ सौ वोटों की लापरवाही से तय होगा. * इक्का-दुक्का स्थानों से सामने आई गडबडी की शिकायतें
आज सुबह 7.30 बजे से मतदान की प्रक्रिया शुरु होने के बाद जैसे-जैसे चुनाव आगे बढा, वैसे-वैसे मतदान प्रक्रिया को लेकर काफी हद तक उत्सुकता वाला माहौल भी बनता चला गया. जिसके तहत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं सहित प्रत्याशियों द्वारा मतदान केंद्रों पर चल रही वोटिंग की प्रक्रिया पर अपनी नजरे गडाकर रखी गई, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता या गडबडी को पकडा जा सके. हालांकि प्रशासन द्वारा पहले से ही चुनाव को पूरी तरह से पारदर्शक व नि:ष्पक्ष तरीके से कराने का दावा किया गया था. जिसके चलते जहां एक ओर शहर के अधिकांश मतदान केंद्रों पर मतदान की प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढी, वहीं दूसरी ओर इक्का-दुक्का स्थानों से ईवीएम मशीनों में ऐन समय पर आई तकनीकी खराबी को लेकर शिकायतें भी सामने आई. जिसके तहत प्रभाग क्र. 2 संत गाडगेबाबा-पीडीएमसी के मतदान केंद्र क्र. 6 में एक ईवीएम की बटन ही नहीं दबने का मामला सामने आया. जिसके चलते इस मतदान केंद्र के कक्ष क्र. 3 के बाहर मतदाताओं की अच्छी-खासी भीड जमा हो गई और पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे पाटिल को भी अपने परिवार सहित काफी देर तक कतार में खडा रहना पडा. इसके साथ ही प्रभाग क्र. 18 राजापेठ-संत कंवरराम अंतर्गत द्वारकानाथ अरोरा विद्यालय स्थित मतदान केंद्र में भी तकनीकी दिक्कतों के चलते करीब आधे घंटे तक ईवीएम बंद रही. इसके अलावा साईनगर परिसर स्थित साईबाबा विद्यालय के मतदान कक्ष क्र. 3 में भी आज सुबह करीब डेढ से दो घंटे तक मतदान की प्रक्रिया इवीएम में आई तकनीकी दिक्कत के चलते बाधित रही. इसके अलावा अधिकांश केंद्रों पर मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ. प्रशासन के अनुसार स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही.





