काजू की कमी के कारण प्रसंस्करण उद्योग संकट में

उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका

मुंबई/दि.26 – देश में काजू उत्पादन में भारी गिरावट और आयात में कमी के कारण काजू प्रसंस्करण उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है.जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों के चलते इस वर्ष काजू उत्पादन में 50 से 60 प्रतिशत तक गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है.

* उत्पादन पर मौसम की मार
इस वर्ष मानसून का प्रभाव नवंबर के पहले सप्ताह तक बना रहा.पश्चिमी तट पर तेज हवाओं और लगातार बारिश के कारण काजू के फूल झड़ गए, जबकि बचे हुए फूल अत्यधिक नमी और फफूंद के कारण सड़ गए.इसके बाद ठंड और दिन के समय बढ़ते तापमान ने फलों के विकास को प्रभावित किया, जिससे उत्पादन बुरी तरह घट गया.

* आयात में कमी से बढ़ी चिंता
देश का काजू उद्योग बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है.कुल प्रसंस्करण क्षमता लगभग 12 से 16 लाख टन है, जिसमें आधा कच्चा काजू देश में उत्पादित होता है और आधा अफ्रीका व दक्षिण-पूर्व एशिया से आयात किया जाता है. लेकिन इस वर्ष घाना, आइवरी कोस्ट और तंजानिया जैसे प्रमुख अफ्रीकी देशों ने अपने घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कच्चे काजू के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे भारत की आपूर्ति प्रभावित हुई है.

* महाराष्ट्र पर सबसे ज्यादा असर
देश के कुल काजू प्रसंस्करण उद्योग का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा महाराष्ट्र में स्थित है, खासकर सिंधुदुर्ग, रत्नागिरी और कोल्हापुर जिलों में.ऐसे में कच्चे माल की कमी का सीधा असर राज्य के प्रसंस्करण उद्योग और रोजगार पर पड़ेगा.

* कीमतों में उछाल, दिवाली तक कमी की आशंका
कोंकण क्षेत्र में कच्चे काजू की कीमत 170-180 रुपये प्रति किलो (स्थानीय दर) तक पहुंच गई है, जो अब तक का उच्चतम स्तर माना जा रहा है.

* विशेषज्ञों के अनुसार:
– गणेशोत्सव तक स्थानीय काजू की उपलब्धता बनी रह सकती है इसके बाद कमी बढ़ेगी.
– दिवाली तक काजू की भारी किल्लत हो सकती है.
– खुदरा कीमतें 1,500 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने का अनुमान है.

* समाधान की दिशा में प्रयास
महाराष्ट्र काजू बोर्ड के विशेषज्ञ निदेशक डॉ. परशराम पाटिल के अनुसार, प्राकृतिक और जैविक खेती के जरिए काजू उत्पादन बढ़ाने के दीर्घकालिक उपाय किए जा रहे हैं.साथ ही केंद्र सरकार से कच्चे काजू की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बातचीत जारी है. वहीं, किसान संगठनों ने काजू बोर्ड को अधिक स्वायत्त और प्रभावी बनाने तथा उत्पादन बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है. कुल मिलाकर, काजू उत्पादन में गिरावट और आयात बाधाओं के कारण उद्योग पर दोहरा संकट मंडरा रहा है, जिसका असर आने वाले महीनों में बाजार और उपभोक्ताओं दोनों पर दिखाई देगा.

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