‘उस’ परिवार के 14 और सदस्यों की जात वैधता रद्द!
आखिर क्यों निरस्त हुए प्रमाणपत्र?

अमरावती/दि.19 – अनुसूचित जनजाति की ‘मन्नेरवारलू’ जाति की वैधता को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है. राजस्व सेवा में कार्यरत दो तहसीलदारों की जात वैधता रद्द होने के बाद अब महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग से चयनित एक और उम्मीदवार का जात वैधता प्रमाणपत्र भी अवैध ठहराया गया है. इसी परिवार के कुल 14 अन्य सदस्यों के जाति प्रमाणपत्र और जात वैधता भी रद्द किए गए हैं.
जानकारी के मुताबिक छत्रपति संभाजीनगर जिले में तहसीलदार पद पर कार्यरत दत्ता बलीराम निलावाड और अमरावती विभाग में तहसीलदार पद पर कार्यरत उत्तम सयाजी निलावाड की ‘मन्नेरवारलू’ अनुसूचित जनजाति की जात वैधता पहले ही रद्द हो चुकी है. इसके बाद महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के माध्यम से महाराष्ट्र वित्त एवं लेखा सेवा विभाग में सहायक संचालक वर्ग-1 पद पर 5 जनवरी 2026 को चयनित शिल्पा उत्तम निलावाड का भी ‘मन्नेरवारलू’ जनजाति का सशर्त जात वैधता प्रमाणपत्र 9 जनवरी 2026 को अमान्य घोषित किया गया. इसके साथ ही इसी परिवार के 14 अन्य सदस्यों के जाति प्रमाणपत्र और जात वैधता भी रद्द किए गए हैं. अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र जांच समिति, किनवट ने 6 नवंबर 2026 को इन सभी प्रमाणपत्रों को निरस्त किया. इससे राज्यभर में गलत जानकारी देकर अनुसूचित जनजाति का लाभ लेने वालों में हड़कंप मच गया है.
बता दें कि, शिवजीत उत्तम निलावाड का ‘मन्नेरवारलू’ जाति दावा 25 अगस्त 2023 को रद्द किया गया था. उसी आदेश में इन 14 लोगों की जात वैधता भी निरस्त की गई थी, लेकिन मामला उच्च न्यायालय में चला गया था. अब पुनः जांच के बाद दूसरी बार इन सभी की जात वैधता रद्द की गई है.
* जात वैधता प्रमाणपत्र क्यों रद्द हुए?
पुलिस सतर्कता दल को परिवार के रक्त संबंधियों के शालेय अभिलेखों में जाति की प्रविष्टियां ‘मुनूरवार’, ‘मनूरवाड’ और ‘मनूरवार’ जैसी मिलीं. जाति कॉलम में ‘लू’ शब्द अलग स्याही और अलग हस्तलेखन में जोड़कर संशोधन किए जाने के प्रमाण पाए गए. साथ ही, दावे के विरुद्ध उपलब्ध जाति संबंधी साक्ष्यों को जानबूझकर जांच समिति से छिपाकर जात वैधता प्रमाणपत्र हासिल किए गए थे.
* इनके जात वैधता प्रमाणपत्र रद्द किए गए
जिन लोगों के जातिवैधता प्रमाणपत्र रद्द किए गए है, उनमें माधव बालाजी निलावाड, भानुदास बलीराम निलावाड, विवेक दिगांबर निलावाड, स्वाती दिगांबर निलावाड, ज्योत्सना व्यंकट निलावाड, नागेश व्यंकट निलावाड, मयुरी माधव निलावाड, सुभाष बालाजी निलावाड, मारोती बळीराम निलावाड, व्यंकटी बलीराम निलावाड, स्नेहा व्यंकट निलावाड, सुप्रिया माधव निलावाड, स्वप्निल व्यंकट निलावाड और पंकज मारोती निलावाड का समावेश है.
* कानूनी स्थिति:
महाराष्ट्र में ‘मन्नेरवारलू’ जनजाति का मूल आंध्र प्रदेश से होने के कारण अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (संशोधन) अधिनियम 2002 के तहत आंध्र प्रदेश से ‘मन्नेरवारलू’ जनजाति को हटाकर उसके स्थान पर ‘कोलावर’ जोड़ा गया है. इसी तर्ज पर महाराष्ट्र में भी संशोधन की मांग शासन से की गई है, लेकिन यह मामला अभी भी लंबित है.





