चिखलदरा बन सकता था भारत की ‘समर कैपिटल’!

ब्रिटिश लाईब्रेरी के ऐतिहासिक संदर्भ से सामने आई महत्वपूर्ण जानकारी

* शिमला की बजाए चिखलदरा को समर कैपिटल बनाने का था प्रस्ताव, ब्रिटिश दौर का चौंकाने वाला इतिहास आया सामने
अमरावती/दि.31 – विदर्भ का कश्मीर कहे जाते और विदर्भ क्षेत्र के एकमात्र हिल स्टेशन चिखलदरा को देश में ब्रिटिश राज के दौरान देश की ग्रीष्मकालीन राजधानी यानि समर कैपिटल बनाने का प्रस्ताव लगभग तैयार कर लिया गया था. हालांकि बाद में ब्रिटिश शासकों ने तत्कालीन कारणों के चलते चिखलदरा की बजाए हिमाचल राज्य के शिमला को अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया था. ऐसे में कहा जा सकता है कि, शिमला के साथ-साथ विदर्भ क्षेत्र का ख्यातनाम हिल स्टेशन चिखलदरा भी कभी ब्रिटिश शासन के दौरान देश की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनने की दौड़ में शामिल था. ऐसा ब्रिटिश लाईब्रेरी के ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए अमरावती के ख्यातनाम शिक्षाविद डॉ. वी. टी. इंगोले द्वारा बताया गया है.
डॉ. वी. टी. इंगोले द्वारा ब्रिटिश लाईब्रेरी में उपलब्ध कई दस्तावेजों के आधार पर उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक उन ऐतिहासिक संदर्भों से यह पता चलता है कि 19 वीं सदी में अंग्रेजों ने चिखलदरा को ‘समर कैपिटल’ बनाने पर गंभीरता से विचार किया था. हालांकि बाद में ब्रिटिश काल के दौरान शिमला को वर्ष 1864 में भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया था. लेकिन उससे पहले मध्य भारत के ठंडे और ऊंचाई वाले क्षेत्र चिखलदरा पर भी विचार हुआ था. हालांकि बाद में कुछ प्रशासनिक, राजनीतिक व रणनीतिक वजहों के चलते अंग्रेजों ने इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डालते हुए शिमला को अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया था.
* क्यों पसंद आया था चिखलदरा?
इतिहासकारों के अनुसार, चिखलदरा की कई विशेषताएं ब्रिटिश प्रशासन को आकर्षित करती थीं, जैसे कि, समुद्र तल से लगभग 1100 मीटर की ऊंचाई, चिखलदरा क्षेत्र का ठंडा और सुहावना मौसम, परिसर में प्राकृतिक रूप से सुरक्षित घाटियां तथा संसाधनों की उपलब्धता और रणनीतिक स्थिति. ब्रिटिश अधिकारी गर्मी से बचने के लिए ऐसे ही स्थानों की तलाश में थे, जहां से प्रशासन भी चलाया जा सके.
* फिर क्यों नहीं बन पाया राजधानी?
जानकारी के मुताबिक इतनी खूबियों के बावजूद चिखलदरा अंतिम चयन में पीछे रह गया. इसके मुख्य कारण थे, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, परिवहन और संपर्क की कमी, 1857 के विद्रोह के बाद सुरक्षा संबंधी चिंताएं और इस क्षेत्र का अपेक्षाकृत अलग-थलग होना. इसके विपरीत, शिमला में बेहतर संपर्क व्यवस्था, सैन्य उपस्थिति और विस्तार की संभावनाएं अधिक थीं, जिसके कारण उसे अंतिम रूप से समर कैपिटल बनाया गया.
* इतिहास में दर्ज लेकिन अधूरा सपना
इतिहासकारों का मानना है कि चिखलदरा केवल एक पर्यटन स्थल नहीं था, बल्कि एक समय पर देश की सत्ता का केंद्र बनने की दहलीज तक पहुंच चुका था. हालांकि यह सपना साकार नहीं हो सका, लेकिन यह तथ्य आज भी इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास को दर्शाता है. उल्लेखनीय है कि, आज चिखलदरा एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसका यह अनजान इतिहास इसे और भी खास बनाता है.

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