चाईल्ड हेल्पलाईन ने चार बाल विवाह रोके

यवतमाल जिले के नेर, बाभुलगांव व महागांव तहसील की घटना

* ग्राम पंचायत और पुलिस की सहायता से चारों युवतियों के पालकों का किया समुपदेशन
यवतमाल/ दि. 27- ग्रीष्मकाल की शुरूआत होते ही जिले में बाल विवाह की शुरूआत हो गई है. हर दिन मजदूरी के लिए गांव और जिला छोडने के पूर्व बेटी के हाथ पीले कर जिम्मेदारी से मुक्त होने की भावना में ग्रामीण क्षेत्र में होनेवाले चार बाल विवाह प्रशासन की सतर्कता से टल गये. साथ फेरे होने के पूर्व चाईल्ड हेल्पलाइन और जिला बाल संरक्षण कक्ष द्बारा यह बाल विवाह रोक दिए गये. यह चारों घटना यवतमाल जिले के नेर, महागांव और बाभुलगांव तहसील में घटी थी.
यवतमाल जिले के नेर तहसील के रत्नापुर बेडा, बाबुलगांव के गणोरी, यवतमाल शहर के पास वाघाडी और महागांव तहसील के पिंपलगांव इजारा ऐसे चार गांव में नाबालिग युवतियों का विवाह किया जा रहा है, ऐसी गोपनीय जानकारी चाईल्ड हेल्पलाइन को मिली थी. शादी की तैयारी अंतिम चरण में रहते सतर्क नागरिक और हेल्पलाइन के दल ने स्थानीय प्रशासन की सहायता से वहां छापा मारा. समय पर प्रशासकीय यंत्रणा पहुंचने से नियोजित विवाह रोका गया. जिलाा महिला व बाल विकास अधिकारी विशाल जाधव और जिला बाल संरक्षक अधिकारी देवेन्द्र राजूरकर के मार्गदर्शन में महेश हलदे, मनीष शेलके के दल ने चारों बाल विवाह रोककर यह कार्यवाही पूर्ण की. केवल विवाह रोककर यह दल नहीं रूका. बल्कि उन्होंने स्थानीय ग्राम पंचायत और पुलिस की सहायता से संबंधित चारों युवती के पालकों का समुपदेशन किया. बेटियों का अपने पैरों पर खडे होने के लिए और उनके उज्वल भविष्य के लिए शिक्षा कितनी महत्व की है. इस बाबत समझाकर बताया गया. शादी के लिए बाल विवाह प्रतिबंधक कानून 2006 के मुताबिक युवक की आयु 21 और युवती की आयु 18 वर्ष पूर्ण होना अनिवार्य हैं. इस आयु के पूर्व विवाह करवाना यह केवल सामाजिक अपराध नहीं बल्कि गंभीर अपराध है. इस बाबत सभी युवतियों के पालकों को जानकारी दी गई. इस कार्यवाही के बावजूद कुछ पालकों ने विवाह रोकने का विरोध किया. उन्हें कानून का डर दिखाते ही युवती की आयु 18 वर्ष पूर्ण होने के बाद ही विवाह करने का आश्वासन पालक और रिश्तेदारों ने दिया. पश्चात प्रकरण निपट गया.

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