शहर की जलापूर्ति ठप रहने से हाहाकार, आज होगा दुरूस्ती का काम पूर्ण
कांतानगर परिसर में पाईपलाईन फुटने से निर्माण हुई समस्या

* मजीप्रा के 6 अभियंता और 30 कामगार जुटे है दुरूस्ती कार्य में
अमरावती/दि.18- पंचवटी चौक से जिलाधिकारी कार्यालय की तरफ जानेवाले मार्ग के कांतानगर- शिवाजी नगर परिसर में 90 सेंटी मीटर आकार व 1 मीटर चौडी सिंभोरा से तपोवन तक पानी लेकर जानेवाली पाईपलाइन सोमवार 16 फरवरी की रात 11.30 बजे के दौरान अचानक फुट जाने से हजारों लीटर पानी सडक पर बह गया. इस कारण परिसर के छात्राओं के छात्रावास में भी पानी घुस गया. अचानक पानी सडकों पर बहने से तत्काल महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण को सूचना दी गई. पश्चात अभियंता और अधिकारियों ने घटनास्थल पहुंचकर मुख्य वॉल बंद किया. तब तक भारी मात्रा में पानी बह गया था. पाईपलाईन फुटने से अमरावती और बडनेरा शहर की जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो गई हैं. आज बुधवार 18 फरवरी की रात तक पाईपलाईन दुरूस्ती का काम पूर्ण होगा तो गुरूवार को जलापूर्ति होगी, ऐसी जानकारी मजीप्रा के विभागीय उपअभियंता ने दी हैं.
पाईपलाईन रात 11.30 बजे फुटने से सडक पर जलजमाव हो गया था. काफी समय तक पानी बहने से पीडीएमसी छात्राओं के छात्रावास में यह पानी घुस गया. जिससे कुछ समय तक छात्राओं में अफरा-तफरी मच गई. रात को संपूर्ण छात्रावास में ग्राउंड फ्लोअर पर जलजमाव हो गया था. इस कारण परिसर में भागदौड शुरू हो गई थी. मजीप्रा के अभियंता से संपर्क शुरू हुआ. तत्काल अभियंता का दल घटनास्थल पहुंच गया. रात को दुरूस्ती का काम संभव नहीं था. इस कारण मुख्य वॉल बंद कर जितना पानी पाईपलाईन में था उसे बाहर जाने दिया गया. सुबह तक पानी का दाब भी कम हो गया. पश्चात दुरूस्ती का काम शुरू हुआ.
* दो दिन से जलापूर्ति ठप
पाईपलाईन फुटने से अमरावती और बडनेरा शहर की दो दिन से जलापूर्ति ठप हो गई है. इस कारण सभी तरफ पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ हैं. लोग सार्वजनिक कुएं और हैंडपंप के अलावा टैंकरों का सहारा ले रहे हैं. अब ग्रीष्मकाल की शुरूआत होने से नागरिकों को पानी की अधिक आवश्यकता महसूस हो रही हैं. पाईपलाईन दुरूस्ती के लिए मजीप्रा के 6 अभियंता और 30 कामगार लगातार जुटे हुए है.
* पानी के दाब से पुरानी पाईपलाईन फुटी
पानी के भितरी दाब और सडक के नीचे से मुख्य पाईपलाईन का जाल रहने से कोई जड वाहन यदि मार्ग से गुजरा तो उसके दाब से पाईपलाईन फुट सकती हैं. पाईपलाईन फुटने से हजारों लिटर पानी बह गया. अनेक पाईपलाईन पुरानी हो गई है. भीतर से लगातार भारी दाब से पानी बहता रहने से वह कुछ स्थानों पर तेज घर्षण से कमजोर होती है और फुट जाती है. यह पाईपलाईन आकार में बडी रहने से दुरूस्ती के लिए दो दिन अथवा उससे ज्यादा समय लगनेवाला हैं.
* 865 करोड रुपए की नई पाईपलाईन डालना शुरू
सिंभोरा हेडवर्क्स से नेरपिंगलाईन संतुलन टंकी तक और वहां से तपोवन के जलशुध्दिकरण केंद्र तक जो पाईपलाइन डाली गई वह करीबन 32 साल पूरानी हैं. 1994 में इस पाईपलाईन का निर्माण किया गया था. वह अब पुरानी हो गई है. ग्रीष्मकाल के दिनों में यह पाईपलाईन अनेक बार फुटती है. इस कारण अमृत -2 योजना के तहत 865.26 करोड रुपए की नई पाईपलाईन समेत कुछ जलकुंभ के निर्माण को मंजूरी मिली हैं. इसमें से 295.64 करोड रुपए मजीप्रा को देना हैं. यह पैसे पानीपट्टी कर से वसूल करने की गारंटी मजीप्रा ने ली हैं. इसी तरह शेष रकम केंद्र सरकार, राज्य सरकार और मनपा को खडे करना है. नई मजबूत पाईपलाइन बिछाने का काम 25 प्रतिशत पूर्ण हो गया हैं.
* बुधवार देर रात दुरूस्ती संभव
पाईपलाईन काफी बडी है. इस कारण तेजी से रात दिन काम किया तो भी दुरूस्ती के लिए दो दिन लग सकते है. दुरूस्ती के लिए 6 अभियंता, 30 कामगार, 1 जेसीबी और एक के्रन का इस्तेमाल किया जा रहा है. बुधवार रात तक दुरूस्ती का काम पूर्ण होने की संभावना हैं. नागरिकों को इस कारण जलापूर्ति नहीं की जा सकती. पानी का इस्तेमाल सभी लोग संभलकर करें.
– संजय लेवरकर,
उपविभागीय अभियंता, मजीप्रा





