तेंदूपत्ता संग्रह के चलते बढ़ीं जंगल में आग की घटनाएं

वन विभाग सतर्क

नागपुर/गडचिरोली/दि.28 – महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र, खासकर गडचिरोली और नागपुर वन मंडलों में जंगल में आग लगने की घटनाओं में तेजी देखी जा रही है. इन घटनाओं के पीछे तेंदूपत्ता संग्रह से जुड़ी गतिविधियों को प्रमुख कारण माना जा रहा है. वन विभाग के अनुसार, कई स्थानों पर लोग तेंदूपत्ता की बेहतर पैदावार के लिए जंगल में जानबूझकर आग लगा रहे हैं. स्थानीय स्तर पर यह गलत धारणा है कि आग लगाने से नए और कोमल पत्ते जल्दी उगते हैं, जिससे संग्रह आसान हो जाता है.
* गडचिरोली में कार्रवाई, आरोपी गिरफ्तार
हाल ही में गडचिरोली जिले के देचली वन क्षेत्र में जंगल में आग लगाने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. वन विभाग ने मौके पर कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ वन कानून के तहत मामला दर्ज किया है.
* मानव गतिविधियां मुख्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, महाराष्ट्र में लगभग 90% से अधिक वनाग्नि मानवजनित होती हैं. तेंदूपत्ता और महुआ जैसे वन उत्पादों के संग्रह के लिए जंगल में आग लगाने की प्रवृत्ति इन घटनाओं को बढ़ा रही है.
* विदर्भ सबसे ज्यादा प्रभावित
आंकड़ों के मुताबिक, गडचिरोली, चंद्रपुर और नागपुर क्षेत्र में वनाग्नि की घटनाएं सबसे ज्यादा सामने आती हैं. गर्मी के मौसम (फरवरी से जून) में सूखी घास और पत्तों के कारण आग तेजी से फैलती है.
* वन विभाग की अपील
वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि जंगल में आग न लगाएं, तेंदूपत्ता संग्रह के लिए अवैध तरीकों का उपयोग न करें, आग लगने की सूचना तुरंत प्रशासन को दें. तेंदूपत्ता संग्रह से जुड़ी गलत प्रथाएं महाराष्ट्र के जंगलों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं. यदि समय रहते जागरूकता और सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे पर्यावरण, वन्यजीव और स्थानीय पारिस्थितिकी को गंभीर नुकसान हो सकता है.

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