बुद्धि को धर्म से जोडिए राम बन जाएंगे

सुधांशु जी महाराज का प्रतिपादन

* सांस्कृतिक भवन में विश्व जागृति मिशन का आयोजन
अमरावती /दि.24 – विश्व जागृति मिशन के प्रसिद्ध प्रवचनकार सुधांशु जी महाराज ने आज दोपहर कहा कि, बुद्धि को अधर्म से जोडेंगे, तो रावण, कंस, शकुनी बनने का डर है. वहीं धर्म से जोडेंगे तो कल्याण होगा. राम बनने की ओर अग्रक्रम होगा. जीवन को उंचा उठाना है, तो बुद्धि को धर्म से जोडिएं. वे सांस्कृतिक भवन में उपस्थित विशाल समुदाय को संबोधित कर रहे थे. अनुयायियों की बडी संख्या में यह प्रवचन सुनने पधारे थे. आरंभ में दीप प्रज्वलन और गुरु का गुणगान किया गया.
अत्यंत सहज भाव और शब्दों में पूज्य सुधांशु जी महाराज ने अपनी बात कही. उन्होंने कहा कि, परमात्मा ने हमें सभी चीजें धन, दौलत, वस्तुएं दी है. किंतु एक ही वस्तु अपने पास रखी हैं. भगवती भी भगवान से पूछती है कि, आपने मनुष्य को सभी चीजें दे दी. फिर वह आपके पास क्यो कर आएगा? जिसका प्रभु स्नेहमयी उत्तर देते हैं कि, विश्व की सबसे कीमती चीज के लिए. यह बात उदृधत करते हुए महाराज जी ने समझाया कि, विश्व में शांति से बढकर कुछ नहीं. शांति परमात्मा के चरणों में प्राप्त होगी. अत: अपने आप को अपनी बुद्धि को परमात्मा से जोडने का आवाहन आपने किया.
महाराज श्री ने कहा कि, शांति की खोज में मनुष्य अनेकानेक कार्य और प्रयास करता है. उससे अशांत हो जाता है. इसलिए आज के ही सत्संग से हम प्रारंभ कर सकते हैं. यह सोचना सार्थक होगा कि, आज बची हुई जिंदगी का पहला दिन है. आज से नियोजन पूर्वक, अनुशासित जीवन जीना है. जीवन में अनुशासन, नियमों से हम सबकुछ हासिल कर सकते हैं. इसी प्रकार रणनीति बनाकर कार्य करना आपको जीवन में सफल कर सकता है, फिर वह कोई भी क्षेत्र हो. महाराज जी ने कहा कि, राजकारण में भी वहीं सफल और आगे है. जो रणनीति बनाकर चलता है. अपनी सहज वाणी में महाराज जी ने उपस्थितों को अनेक अवसरों पर तालियों की गडगडाहट के लिए प्रेरित किया. उसी प्रकार तेरी शरण चले गुरु की शरण सहित अनेक प्रिय भजन गाये. समस्त सांस्कृतिक भवन उनके स्वर में स्वर मिलाकर गुनगुनाने लगा था. आपकी सहज वाणी ने सभी को प्रभावित किया. आपने कहां कि, झंझटों से छूटकारा पाने के लिए परमात्मा की प्राप्ति के लिए प्रयत्न जारी रखने चाहिए. किंतु मन को शांत रखना आवश्यक है. मन शांत है तो रचना होती है, निर्माण होता है. मन अशांत रहने पर विध्वंस. कई छोटे मोटे वाकयों, किस्सों, कहानियों के जरिए पूज्य सुधांशु महाराज ने अपनी बात को समझाने का प्रयत्न किया.
विश्व जागृति मिशन के अमरावती प्रमुख नंदलाल जी खत्री, भरत खासबागे, किशोर खंडेलवाल, जुगलकिशोर गट्टानी, सीताराम खंडेलवाल, डॉ. नितिन सेठ, अरूण कालबांडे, अनीता राजेंद्र काकडे, विमल भारसाकले, कमला मालोकार, रूपाली महल्ले, गणेशराव अविनाशे, सुभाष रोहणकर, शुभांगी खानदेव, विजय खानदेव, वैभव ठवले, गौरीशंकर अग्रवाल, अजित सारडा, रामभाउ प्रांजले, देवराव कटारिया, मनोज शास्त्री, राहुल घेवड, श्यामसुंदर खंडलेवाल, सावित्री खंडेलवाल, विजय भगेरिया, जयेश मांडले, राजीव गांधी वरुड, गौरीशंकर अग्रवाल, मुकुंद वाघमारे, बैतूल के अशोक हीरानी, नागपूर के नंदलाल जैन, चमनलाल खत्री, हुक्मीचंद खंडेलवाल, अनिल खत्री आदि ने महाराज श्री का पुष्पमाला और उपहार देकर आशीर्वाद प्राप्त किया. देवराज कटारिया और मनोज शास्त्री ने सुंदर, संस्कृतनिष्ठ श्लोक से संचालन किया.

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