आदिवासी आश्रमशाला के शिक्षकों की सेवा समाप्त करने का षडयंत्र

जीआर रद्द करने की मांग

* शिक्षक नेता दिलीप कडू ने आंदोलन की दी चेतावनी
अमरावती/दि.7 -आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत आनेवाली सरकारी, अनुदानित, केंद्रीय और एकलव्य निवासी आश्रमशाला के शिक्षकों को टीईटी अनिवार्य कर उनकी सेवा समाप्त करने का षडयंत्र सरकार द्वारा किया जा रहा है, यह आरोप किया जा रहा है. इस अन्यायकारक सरकारी निर्णय को तुरंत रद्द किया जाए, अन्यथा विदर्भ माध्यमिक शिक्षक संघ द्वारा पूरे राज्य में आंदोलन किया जाएगा, यह चेतावनी शिक्षक नेता दिलीप कडू ने दी है.
आश्रमशाला शिक्षकों की सेवा और शर्तों के बारे में सरकार ने जारी किए निर्णय पर विचार विमर्श करने के लिए अमरावती में शिक्षकों की विशेष सभा ली गई थी. इस सभा में मार्गदर्शन करते हुए दिलीप कडू बोल रहे थे. सभा की अध्यक्षता भोजराज काले ने की. दिलीप कडू ने आगे कहा कि, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का गलत हवाला देकर सरकार यह षडयंत्र कर ही है. शिक्षा अधिकार कानून 2009 लागू होने से पूर्व नियुक्त हुए शिक्षकों की सेवाशर्तों में कहीं भी टीईटी का उल्लेख नहीं था. विगत अनेक वर्षों से दुर्गम क्षेत्र में आदिवासी बालकों को शिक्षा के प्रवाह में लाने के लिए दिनरात मेहनत करने वाले शिक्षकों को अब 1 सितंबर 2027 से पूर्व परीक्षा उत्तीर्ण होने की शर्त लागू करना, अन्यथा सेवा समाप्त करना, यह निर्णय पूर्णत: अमानवीय है. इस जीआर के कारण अनेक वर्षों से सेवा देने वाले हजारों शिक्षकों की नौकरी खतरे में आ गई है. सरकार ने शिक्षकों की भावना को ध्यान में लेकर यह निर्णय तुरंत रद्द करने की मांग सभा में की गई. उक्त मांग मंजूर नहीं होने पर विमाशि संघ सडक पर पर आंदोलन करेंगी, ऐसा स्पष्ट किया है. इस सभा में संगठन के पदाधिकारी प्रवीण दिवे, अनिल भारसाकले, मधुकर रोडे, अतुल देशमुख, दशरथ रसे, रमेश काले, ललित चौधरी, प्रदीप नानोटे, गजानन मानकर आदि उपस्थित सहित जिले के शिक्षक बडी संख्या में उपस्थित थे.

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