कृषि जमीन पर कर सकेंगे निमार्णकार्य, ‘एनए’ के लिए नहीं लगेगी अनुमति

महाराष्ट्र जमीन राजस्व नियमों में बदलाव, नागरिकों को राहत

अमरावती /दि.4 – महाराष्ट्र जमीन राजस्व कानून (2025) में बदलाव किया गया है. उसके अनुसार अकृषक (एनए) अनुमति सनद और हर साल आकारे जाने वाला अकृषक कर अब कायम स्वरुपी रद्द कर दिया गया है. जिससे अब कृषि जमीन पर घर या प्रकल्प का निर्माण किया जा सकेगा तथा राजस्व विभाग सहित स्थानीय प्राधिकरण के कार्यालय में नागरिकों को चक्कर मारने की जरुरत नहीं पडेगी.
इसके पूर्व जमीन अकृषक के रुप में वापरने के लिए राजस्व विभाग की अनुमति अनिवार्य थी. जिसमें स्थानीय स्वराज्य संस्था द्वारा संपत्ति कर आकारा जाता था. जिससे सर्वसामान्य नागरिकों को परेशानी का सामना करना पडता था. नये नियमों के अनुसार नियोजन प्राधिकरण ने निर्माणकार्य का नक्शा मंजूर करने के बाद संबंधीत जमीन अकृषक समझी जाएगी.
जिसके लिए जिला अधिकारी की अनुमति की आवश्यकता नहीं पडेगी, ऐसे स्पष्ट आदेश राजस्व विभाग द्वारा 10 फरवरी को जारी किये गये है. राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले द्वारा इस संदर्भ में प्रयास किये जाने से नागरिकों को बडी राहत मिली है. अनेक बैंक गृह कर्ज देते समय अकृषक प्रमाणपत्र की मांग करती है. अब निर्माण कार्य की अनुमति मिलने के बाद बैंक अकृषक प्रमाणपत्र न मांगे, ऐसा आदेश में स्पष्ट कहा गया है.

* अब हर वर्ष शुल्क अदा करने की आवश्यकता नहीं
अब हर साल शुल्क भरने की बजाय रेडीरेकनर दर के अनुसार एक मुश्त शुल्क भरना होगा. जिसमें एक हजार चौरस मीटर तक भूखंड के लिए चालू बाजार मूल्य के 0.10 प्रतिशत, 1001 से 4000 चौरस मीटर भूखंड के लिए चालू बाजार मूल्य 0.25 प्रतिशत तथा 4000 चौरस मीटर से अधिक भूखंड के लिए (एक एकड से अधिक) चालू बाजार मूल्य के 0.25 प्रतिशत शुल्क रहेगा.

* परिवर्तित शुल्क का होगा विभाजन
राजस्व वसूली को सहज बनाने के लिए स्थानीय स्वराज्य संस्था के विकास को साकार करने के लिए शुल्क का विभाजन किया जाएगा ‘अ’ श्रेणी मनपा क्षेत्र में 30 प्रतिशत रकम महापालिका को, 70 प्रतिशत शासन को अन्य मनपा/नगरपालिका को 50 प्रतिशत रकम पालिका को 50 प्रतिशत शासन को तथा ग्रामपंचायत क्षेत्र में 50 प्रतिशत रकम जिला परिषद को (इसमें का 25 प्रतिशत हिस्सा संंबंधित ग्रामपंचायतों को मिलेगा.)

* पुरानी संपत्ति का क्या?
31 दिसंबर 2001 पूर्व की अकृषक जमीन के लिए साल 2001 के बाजार मूल्य के अनुसार संबंधित दर से एक मुश्त शुल्क अदा करना पडेगा तथा 1 जनवरी 2002 के बाद एक जमीन के निर्माणकार्य की अनुमति के लिए बाजार मूल्यानुसार शुल्क भरना होगा.

* जिलाधिकारी की स्वतंत्र अनुमति की आवश्यकता नहीं
1. नये नियमानुसार जमीन का इस्तेमाल विकास प्रारुप के अनुसार ग्राह्य धरा जाएगा तथा प्राधिकरण द्वारा दी गई निर्माणकार्य की अनुमति यहीं ‘एनए’ की अनुमति मानी जाएगी. जिलाधिकारी की स्वतंत्र अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी.
2. सरकार ने जमीन के इस्तेमाल के बदले प्रक्रिया में संरचनात्मक सुधारना कर राजस्व व नगररचना की दोहरी यंत्रणा को खत्म किया है. एक ही बार अधिमूल्य भरकर अनुमति मिलेगी. जिससे जमीन धारकों को राहत मिलेगी.

* बैंक कर्ज के लिए अब सनद की शर्त रद्द
अनेक बैंक कर्ज देते समय अकृषक सनद मांगती है. किंतु अब शासन ने स्पष्ट किया है कि, नियोजन प्राधिकरण की अनुमति मिलने के बाद बैंक सनद न मांगे. जिलाधिकारी यह आदेश सभी बैंकों के निदर्शन में लाये, ऐसे शासन के निर्देश है. जिसकी वजह से नागरिकों को बडी राहत मिली है और कर्ज के प्रकरण का मार्ग प्रशस्त होगा तथा अनेक सुविधा इस निर्णय की वजह से मिलेगी.

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