कपास के गारंटी से कम भाव, ‘सीसीआई’ की 15 मार्च की समय सीमा
मूल्यवृध्दि की प्रतिक्षा में कपास का भंडार किए किसान परेशानी में

अमरावती/दि.10 – इस सीजन में हुई भारी बारिश के कारण कपास की फसल को काफी नुकसान हुआ है. इसके बावजूद कई किसानों ने दाम बढ़ने की उम्मीद में अपनी कपास घरों में ही भंडारित कर रखी थी. लेकिन खुले बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दाम मिलने के कारण अब किसान बड़ी संख्या में कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के खरीद केंद्रों की ओर रुख कर रहे हैं.
सीसीआई केंद्रों पर कपास खरीद की समय सीमा समाप्त होने वाली थी, जिससे किसानों में चिंता बढ़ गई थी. कई किसानों के पास अभी भी बड़ी मात्रा में कपास भंडार में पड़ी हुई है. किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने कपास खरीद की समय सीमा बढ़ाकर 15 मार्च तक कर दी है. इससे किसानों को अपनी बची हुई कपास बेचने में कुछ राहत मिली है. बताया जा रहा है कि इस वर्ष उत्पादन में कमी के बावजूद बाजार में अपेक्षित तेजी नहीं आई है. निजी व्यापारी फिलहाल करीब 7 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से कपास खरीद रहे हैं, जबकि स्थानीय बाजार समितियों में कपास की कीमत 7,100 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है.
केंद्र सरकार ने मध्यम धागे वाली कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य 7,020 रुपये प्रति क्विंटल तथा लंबे धागे वाली कपास का 8,110 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. यह दर निजी बाजार से अधिक होने के कारण किसान सरकारी खरीद केंद्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं. खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कपास बिक्री हेतु ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग अनिवार्य की गई है. केवल उन्हीं किसानों की कपास खरीदी जा रही है, जिन्होंने पंजीकरण कर स्लॉट प्राप्त किया है.
सूत्रों के अनुसार अब तक विभिन्न केंद्रों के माध्यम से करीब एक लाख क्विंटल कपास की खरीद की जा चुकी है. समय सीमा बढ़ने के बाद इस आंकड़े में और वृद्धि होने की संभावना है. किसान अशोक ठाकरे ने बताया कि भारी बारिश के कारण कपास की गुणवत्ता प्रभावित हुई थी. उन्होंने कीमत बढ़ने की उम्मीद में कपास घर में रखी थी, लेकिन बाजार में दाम बढ़ने के बजाय कम हो गए, इसलिए अब उन्हें सीसीआई केंद्रों पर ही कपास बेचनी पड़ रही है.





