राजापेठ से भाजपा के दो नामांकन अवैध होना कहीं कोई ‘राजनीतिक चाल’ तो नहीं
भाजपा ने 9 नहीं, 5 ही सीटें छोडी थी वायएसपी के लिए

* भाजपा नेताओं ने युवा स्वाभिमान के लिए 9 सीट छोडने की घोषणा की थी
* भाजपा ने 75 में से 70 सीटों पर खडे किए हैं अपने अधिकृत उम्मीदवार
अमरावती/दि.1 – अमरावती महानगर पालिका के चुनाव हेतु भाजपा द्वारा शिंदे गुट वाली शिवसेना सहित विधायक रवि राणा के नेतृत्व वाली युवा स्वाभिमान पार्टी के साथ युति को लेकर चल रही चर्चाओं के दौरान भाजपा की ओर से मनपा चुनाव हेतु निर्वाचन प्रभारी बनाकर भेजे गए विधायक संजय कुटे ने कई बार स्पष्ट रुप से कहा था कि, युति के तहत युवा स्वाभिमान पार्टी के लिए भाजपा द्वारा 9 सीटें छोडे जाने की बात पूरी तरह से तय है. वहीं शिंदे गुट वाली शिवसेना के साथ युति के तहत सीट बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही है. हालांकि आगे चलकर भाजपा और शिंदे गुट वाली शिवसेना के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बात नहीं बनी. जिसके चलते यह तय माना गया कि, तीन मुस्लिम बहुल प्रभागों की 12 सीटों को छोडकर 87 में शेष 75 सीटों में से 9 या 10 सीटें भाजपा द्वारा युवा स्वाभिमान पार्टी के लिए छोडी जाएंगी और 65-66 सीटों पर कमल चुनाव चिन्ह के साथ भाजपा की ओर से अपने खुद के प्रत्याशी खडे किए जाएंगे. लेकिन हैरतवाली बात यह है कि, भाजपा की ओर से 75 सीटों को लेकर अपने अधिकृत प्रत्याशियों की जो सूची जारी की गई है, उसमें भाजपा की ओर से 70 सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम दिए गए है. वहीं युति के तहत महज 5 सीटें ही युवा स्वाभिमान पार्टी के लिए छोडे जाने की बात दर्शायी गई है. जिसके चलते हर कोई भाजपा की इस ‘सदाशयता’ व ‘सहृदयता’ पर आश्चर्य जता रहा है. साथ ही साथ अब प्रभाग क्र. 18 राजापेठ-संत कंवरराम से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो नामांकन अवैध घोषित किए जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. जिसके तहत यह चर्चा चल पडी है कि, कहीं युवा स्वाभिमान पार्टी के साथ मामला ‘सेटल’ करने हेतु भाजपा द्वारा जानबुझकर तो अपने दो प्रत्याशियों की ‘बलि’ नहीं चढाई जा रही.
उल्लेखनीय है कि, भाजपा और युवा स्वाभिमान पार्टी (वायएसपी) के बीच हुए समझौते को लेकर भी तस्वीर स्पष्ट होती नजर नहीं आ रही है. भाजपा नेताओं द्वारा सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की गई थी कि युवा स्वाभिमान पार्टी के लिए 9 सीटें छोड़ी गई हैं, लेकिन वास्तविकता में भाजपा ने केवल 5 सीटें ही वायएसपी के लिए छोड़ी होने की जानकारी सामने आई है. वहीं दूसरी ओर युवा स्वाभिमान पार्टी ने भाजपा के साथ युति में रहने के बावजूद 41 सीटों पर अपने प्रत्याशी खडे करने की घोषणा करते हुए अपने प्रत्याशियों के नामों की प्रभागनिहाय व सीटनिहाय सूची भी जारी कर दी है. जबकि भाजपा ने कुल 75 सीटों में से 70 सीटों पर अपने अधिकृत उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि दोनों पार्टियों ने अधिकांश प्रभागों में अपने अकेले के दम पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है.
* तकनीकी भूल या सोची-समझी राजनीतिक साज़िश?
अमरावती महानगरपालिका चुनाव में राजापेठ प्रभाग से भारतीय जनता पार्टी के दो नामांकन अवैध घोषित होना अब केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं रह गई है, बल्कि यह मामला राजनीतिक संदेह और अंदरूनी रणनीति के आरोपों तक पहुँच गया है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस पार्टी ने चुनाव से पहले अनुशासन, संगठन और कानूनी तैयारी का दावा किया था, उसी भाजपा के दो नामांकन एक ही क्षेत्र से रद्द कैसे हो गए? क्या यह केवल दस्तावेज़ी चूक थी, या फिर भीतरखाने चल रही गुटबाज़ी का नतीजा?
* 9 सीटों की घोषणा, ज़मीनी हकीकत में सिर्फ 5
भाजपा नेतृत्व ने बड़े मंच से युवा स्वाभिमान पार्टी (वायएसपी) के लिए 9 सीटें छोड़ने की घोषणा की थी, लेकिन नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आया कि वायएसपी को वास्तव में केवल 5 सीटें ही दी गईं. यह अंतर सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि विश्वसनीयता और राजनीतिक ईमानदारी पर सवाल खड़े करता है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विरोधाभास जानबूझकर बनाया गया भ्रम भी हो सकता है, ताकि चुनावी समीकरण साधते हुए भविष्य में जवाबदेही से बचा जा सके.
* भाजपा का ‘एकला चलो’ प्रयोग
आंकड़े साफ बताते हैं कि भाजपा ने 75 में से 70 सीटों पर अपने अधिकृत उम्मीदवार खड़े कर सहयोगी दलों को हाशिये पर धकेल दिया है. इससे यह संकेत मिलता है कि गठबंधन केवल नाम का रह गया है और वास्तविक नियंत्रण पूरी तरह भाजपा के हाथ में है.
* भाजपा पदाधिकारियों के जवाब में गोलमाल
मनपा चुनाव हेतु निर्वाचन प्रमुख बनाए गए भाजपा पदाधिकारी जयंत डेहनकर से जब सीटों के बंटवारे को लेकर पैदा हुई इस असमंजसपूर्ण स्थिति के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि, युवा स्वाभिमान पार्टी के लिए पांच सीटें छोडने के साथ ही तीन सीटों पर भाजपा ने युवा स्वाभिमान पार्टी के पदाधिकारियों को अपने प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा है. ऐसे में पार्टी ने युवा स्वाभिमान पार्टी को 8 सीटें दी है. लेकिन जयंत डेहनकर इस सवाल का कोई जवाब नहीं दे पाए कि, अगर वे प्रत्याशी चुनाव में विजयी होते है, तो उन्हें भाजपा अथवा युवा स्वाभिमान पार्टी में से किस दल का पार्षद माना जाएगा और उन पर किस पार्टी का व्हीप लागू होगा. साथ ही साथ जयंत डेहनकर इस सवाल पर भी निरुत्तर हो गए कि, अगर युति के तहत दूसरी पार्टी के प्रत्याशी को अपनी पार्टी के टिकट पर ही प्रत्याशी बनाना था, तो फिर ऐसा सभी सीटों पर क्यों नहीं किया गया. साथ ही अगर युति रहने के बावजूद युवा स्वाभिमान पार्टी ने 41 सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ अपने दावेदार खडे किए है, तो फिर दोनों दलों के बीच कैसी व किस बात की युति?





