अमरावती की ऐतिहासिक बावड़ियों पर मना दीपोत्सव

महाशिवरात्री पर दिया गया जलसंवर्धन का संदेश

अमरावती /दि.18 – जिले में छह ऐतिहासिक बावड़ियों (पायविहिरी) पर महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भव्य दीपोत्सव आयोजित किया गया. हजारों दीपों की रोशनी से जगमगाती इन प्राचीन जल संरचनाओं ने जहां सांस्कृतिक विरासत को उजागर किया, वहीं जलसंवर्धन का सशक्त संदेश भी दिया. यह कार्यक्रम अहिल्याबाई होळकर की 301वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में राज्यभर चल रहे जलवारसा संरक्षण अभियान का हिस्सा था.
* महिमापुर की सात मंजिला बावड़ी बनी आकर्षण का केंद्र
जिले के महिमापुर गांव स्थित ऐतिहासिक सात मंजिला बावड़ी दीपोत्सव का प्रमुख केंद्र रही. लगभग 750 से 800 वर्ष पुरानी यह बावड़ी देवगिरी के यादवकाल में निर्मित मानी जाती है. कभी पंचक्रोशी क्षेत्र की प्यास बुझाने वाली यह संरचना अपनी भव्य वास्तुकला और सीढ़ीनुमा निर्माण के लिए प्रसिद्ध रही है. हालांकि भूजल स्तर में गिरावट और बोरवेल की बढ़ती संख्या के कारण इन बावड़ियों का उपयोग कम हो गया, जिससे उनका महत्व भी घटता गया.
* जलप्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण
इतिहासकारों के अनुसार यह बावड़ी 12 वीं-13 वीं शताब्दी की जलप्रबंधन प्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण है. विशेषज्ञों ने बताया कि भारत के पास विश्व के कुल मीठे पानी का केवल 4.1 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि देश की आबादी 17 प्रतिशत है. ऐसे में भविष्य की जलकमी को देखते हुए पारंपरिक जलस्रोतों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है.
* दीपोत्सव केवल उत्सव नहीं, जनजागरण अभियान
स्वराज्य सेवा प्रतिष्ठान के पदाधिकारियों ने बताया कि दीपोत्सव के माध्यम से पूर्वजों द्वारा निर्मित जल संरचनाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई. यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जलसंवर्धन के लिए सामूहिक जनजागरण का अभियान है. उल्लेखनीय है कि राजमाता अहिल्याबाई होलकर ने अपने शासनकाल में देशभर में घाट, कुएं और धर्मशालाओं का निर्माण कर जलप्रबंधन और लोककल्याण की परंपरा को मजबूत किया था. उनके इसी कार्य की प्रेरणा से यह दीपोत्सव अभियान चलाया गया. दीपों की जगमगाहट के बीच गूंजे जलसंरक्षण के संदेश ने उपस्थित नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का काम किया.

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