गुगामल डिवीजन के जंगल कैम्पों में वन कर्मियों की बदहाल स्थिति

शौचालय, पीने के पानी और रहने की सुविधा का अभाव

* बाघ व भालू के खतरों के बीच रहने को मजबूर हैं वन कर्मी
चिखलदरा/दि.14 – चिखलदरा स्थित गुगामल वन डिवीजन के अंतर्गत आने वाले विभिन्न जंगल कैंपों में कार्यरत वन कर्मचारियों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. जंगलों की सुरक्षा के लिए दिन-रात गश्त करने वाले इन कर्मचारियों को मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उन्हें गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार गुगामल डिवीजन के अंतर्गत चिखलदरा, तरुबांदा, धाकणा और हरिसाल रेंज के कई जंगल कैंपों में वनकर्मी तैनात हैं. इन कैंपों में कर्मचारियों के रहने, विश्राम करने तथा ड्यूटी के दौरान आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था नहीं है. अधिकांश स्थानों पर न तो शौचालय उपलब्ध हैं और न ही पीने के पानी की व्यवस्था की गई है. कई कैंपों में शौचालय नहीं होने के कारण कर्मचारियों को घने जंगल में शौच के लिए जाना पड़ता है. इससे उनकी जान को लगातार खतरा बना रहता है, क्योंकि इस क्षेत्र में भालू और बाघ जैसे खतरनाक वन्यप्राणियों की मौजूदगी रहती है और पूर्व में हमलों की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं.
वनकर्मियों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पानी और शिकार की तलाश में वन्यप्राणी अधिक सक्रिय हो जाते हैं, जिससे जंगल में जाने वाले कर्मचारियों के लिए खतरा और बढ़ जाता है. इसके बावजूद कैंपों की स्थिति सुधारने के लिए अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं. जंगलों में गश्त के दौरान कई स्थानों पर रास्तों की हालत भी बेहद खराब है. कई क्षेत्रों में वाहन पहुंचना मुश्किल हो जाता है, जिससे कर्मचारियों को पैदल ही लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. इससे ड्यूटी के दौरान जोखिम और बढ़ जाता है.
वन विभाग के कर्मचारियों तथा स्थानीय नागरिकों ने गुगामल डिवीजन की उपवन संरक्षक (डीसीएफ) कीर्ति जमदाडे से इस गंभीर समस्या की ओर तत्काल ध्यान देने की मांग की है. कर्मचारियों ने कहा है कि जंगल कैंपों में शौचालय, पीने के पानी और रहने की उचित व्यवस्था जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाए, ताकि जंगलों की सुरक्षा में लगे वनकर्मियों को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण मिल सके. वनकर्मियों का कहना है कि वे कठिन परिस्थितियों में भी जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा का दायित्व निभा रहे हैं, इसलिए प्रशासन को भी उनकी बुनियादी जरूरतों की पूर्ति के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.

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