‘वंचित’ व कांग्रेस ने संघ मुख्यालय पर निकाला मोर्चा

‘एपस्टीन फाइल्स’ को लेकर संघ की नैतिक भूमिका पर उठाए गए सवाल

* पुलिस ने मोर्चा को बीच राह में रोका, रास्ते पर ही शुरु हुआ धरना प्रदर्शन
* ‘वंचित’ के मुखिया एड. आंबेडकर व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सपकाल की रही प्रमुख उपस्थिति
* पूरे विदर्भ क्षेत्र से दोनों दलों के हजारों पदाधिकारी व कार्यकर्ता मोर्चे में हुए शामिल
नागपुर/दि.23 – अमरीका में उजागर हुए ‘एपस्टीन फाइल्स’ वाले मामले की वजह से इस समय देश में अच्छा-खासा राजनीतिक तुफान आया हुआ है और विपक्ष द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी सहित केंद्र की सत्ताधारी भाजपा के खिलाफ जबरदस्त मोर्चा खोल रखा है. इसी के तहत आज देश के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस सहित वंचित बहुजन आघाडी द्वारा नागपुर में संघ मुख्यालय का घेराव करने हेतु संयुक्त मोर्चा का आयोजन किया गया. परंतु नागपुर के संविधान चौक से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय की ओर रवाना हुए इस मोर्चे को पुलिस द्वारा बीच रास्ते में ही रोक दिया गया. जिसके चलते वंचित बहुजन आघाडी के मुखिया एड. प्रकाश आंबेडकर व कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की प्रमुख उपस्थिति के बीच सडक किनारे ही धरना प्रदर्शन करते हुए जनसभा की गई. जिसमें दोनों पार्टी के नेताओं ने ‘एपस्टीन फाइल्स’ वाले मामले में संघ की नैतिक भूमिका को लेकर सवाल उठाए. इस समय वंचित बहुजन आघाडी की युवा इकाई के प्रदेशाध्यक्ष व चांदुर रेलवे नगर परिषद के स्वीकृत पार्षद डॉ. नीलेश विश्वकर्मा तथा अमरावती जिला कांग्रेस कमिटी के वरिष्ठ पदाधिकारी व जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के संचालक हरिभाऊ मोहोड भी विशेष रुप से उपस्थित थे.
कांग्रेस एवं वंचित बहुजन आघाडी द्वारा ‘एपस्टीन फाइल्स’ वाले मामले को लेकर संघ मुख्यालय का घेराव करने हेतु की गई अपनी पूर्व घोषणा के तहत आज सुबह 11 बजे संविधान चौक से संयुक्त मोर्चा का प्रारंभ किया गया. जिसमें शामिल होने के लिए समूचे विदर्भ क्षेत्र से दोनों राजनीतिक दलों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता बडी संख्या में आज नागपुर पहुंचे थे. जिन्होंने ‘एपस्टीन फाइल्स’ विवाद को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय की ओर मार्च निकालने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक दिया.
इस समय पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए मार्च को तय सीमा से आगे जाने की अनुमति नहीं दी. मोर्चे के रोकने हेतु बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था और बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया गया. जिसके बाद हजारों की संख्या में कार्यकर्तांओं ने सड़कों पर उतरे और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.
प्रदर्शनकारियों द्वारा आरोप लगाया गया कि तथाकथित ‘एपस्टीन फाइल्स’ में कुछ सत्ताधारी दल से जुड़े नाम सामने आए हैं, जिस पर नरेंद्र मोदी सरकार जवाब देने से बच रही है. ऐसे में इस मुद्दे को लेकर पारदर्शक तरीके से निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए. साथ ही प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और संघ की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए. प्रदर्शनकारियों का कहना रहा कि, संघ यह भाजपा का वैचारिक आधार रहने के चलते संघ की इस मुद्दे पर वैचारिक भूमिका क्या है, यह स्पष्ट होना जरुरी है.

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