मनपा की सत्ता में शामिल होकर भी खोडके के हाथ खाली
स्थायी समिति सभापति का पद भी मिलने के ‘चान्स’ लगभग नहीं

* महापौर पद के साथ ही भाजपा मनपा की ‘तिजोरी’ को भी अपने ही पास रखेगी
* स्थायी सहित विषय समिति सदस्य पदों पर ही करना होगा खोडके गुट को संतोष
अमरावती/दि.2 – अमरावती मनपा के चुनाव संदर्भ में अब तक एकला चलो की भूमिका लेकर चल रहे अजीत पवार गुट वाली राकांपा के प्रदेश उपाध्यक्ष व विधायक संजय खोडके ने लंबी ना-नुकूर के बाद आखिरकार अमरावती मनपा की सत्ता हेतु स्थापित होने जा रही भाजपा व युवा स्वाभिमान पार्टी की युति में शामिल होने का निर्णय ले ही लिया है. जिसके चलते अमरावती मनपा में युति के पार्षदों की संख्या 51 पर जा पहुंची है. लेकिन युति में शामिल होने के फैसले के चलते विधायक संजय खोडके और उनकी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को कोई विशेष फायदा होता दिखाई नहीं दे रहा. क्योंकि भाजपा व युवा स्वाभिमान पार्टी ने महापौर व उपमहापौर पद आपस में बांट लिए है. साथ ही इस बात की भी पूरी संभावना है कि, भाजपा द्वारा स्थायी समिति का सभापति पद भी अपने ही पास रखा जाएगा. ताकि मनपा की ‘तिजोरी’ पर अपना कब्जा रखा जा सके. ऐसे में विधायक खोडके के नेतृत्व वाली राकांपा को भाजपा के साथ मनपा की सत्ता में शामिल होने का कोई विशेष फायदा होता फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा.
उल्लेखनीय है कि, अमरावती मनपा में सभी पार्टियों ने खुद को स्वतंत्र रुप से गट के तौर पर पंजीकृत किया है और अपने-अपने गट नेताओं के नाम भी घोषित कर दिए है. ऐसे में सभी दलों को उनके संख्याबल के आधार पर तय कोटे के अनुरुप स्थायी समिति सहित विषय समिति के सदस्य पदों में प्रतिनिधित्व अथवा हिस्सेदारी मिलेगी. ऐसे में विधायक खोडके यदि सत्ता में शामिल नहीं भी होते, तो भी उन्हें स्थायी समिति सहित विषय समिति के सदस्य पदों पर पक्षीय बलाबल की स्थिति के अनुरुप प्रतिनिधित्व मिलना तय था. वहीं अब सत्ता में शामिल होने के चलते राकांपा को कुछ विषय समितियों में सभापति पद जरुर मिल सकते है. वहीं दूसरी ओर यह माना जा रहा है कि, चूंकि भाजपा और युवा स्वाभिमान पार्टी ने महापौर व उपमहापौर पद आपस में बांट लिए है. ऐसे में शायद राकांपा को साथ आने की ऐवज में स्थायी समिति का सभापति पद मिल सकता है. परंतु राजनीतिक जानकारों के मुताबिक भाजपा द्वारा ऐसा किए जाने की संभावना बेहद कम है. क्योंकि भाजपा हर हाल में मनपा के खजाने की चाबी को अपने ही पास रखना पसंद करेगी. यदि ऐसा होता है, तो कहा जा सकता है कि, विधायक खोडके भाजपा के साथ मनपा की सत्ता में शामिल होकर भी शामिल नहीं है और उनकी झोली पूरी तरह से खाली रहेगी. परंतु इसके बावजूद डेप्युटी सीएम अजीत पवार के आकस्मिक निधन की वजह से बदले हुए राजनीतिक हालात में विधायक खोडके के सामने और कोई दूसरा पर्याय भी बाकी नहीं बचा है. क्योंकि सत्ता पक्ष में शामिल होने की बजाए विपक्ष में बैठना अब विधायक खोडके के लिए काफी घाटे वाला सौदा साबित हुआ होता.

* विधायक कुटे ने कराई खोडके और फडणवीस की बातचीत
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक महापौर व उपमहापौर पद के लिए नामों के चयन व नामांकन की प्रक्रिया हेतु आज सुबह अमरावती पहुंचे भाजपा के निर्वाचन प्रभारी व विधायक संजय कुटे ने विधायक संजय खोडके से उनके निवासस्थान पर जाकर भेंट की और मनपा में युति की सत्ता स्थापना से जुडे विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने के साथ ही विधायक खोडके से इस युति में शामिल होने का आग्रह भी किया. इसके अलावा विधायक कुटे ने अपने मोबाइल फोन के जरिए विधायक संजय खोडके की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बातचीत भी कराई. जिसके दौरान सीएम देवेंद्र फडणवीस ने विधायक संजय खोडके को उनके दिवंगत नेता अजीत पवार द्वारा कही गई बातों का हवाला देते हुए कहा कि, खुद अजीत दादा भी यह चाहते थे कि, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अमरावती मनपा में सत्ता स्थापना हेतु भाजपा के साथ युति में शामिल हो. अत: दादा की बातों व स्मृतियों का मान रखते हुए खोडके ने भाजपा के साथ मनपा में सत्ता स्थापना हेतु युति में शामिल होना चाहिए. जिसके बाद विधायक संजय खोडके ने मनपा स्तर पर युति में शामिल होने को लेकर हामी भरी.





