भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने जिला स्तरीय विशेष समिति का गठन

सर्वे के 7 दिनों के भीतर संपत्ति मूल्यांकन अनिवार्य, किसानों को समय पर मिलेगा मुआवजा

अमरावती/दि.5सड़क, बांध, औद्योगिक परियोजनाओं और अन्य अवसंरचना विकास कार्यों के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में हो रही देरी को कम करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने अहम निर्णय लिया है. अब जिला स्तर पर विशेष मूल्यांकन समिति का गठन किया जाएगा, जो सर्वेक्षण के सात दिनों के भीतर संबंधित संपत्तियों का अंतिम मूल्यांकन करेगी.
सरकार ने यह निर्णय भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के तहत नई प्रक्रिया लागू करते हुए लिया है. वर्तमान व्यवस्था में प्रारंभिक भूमि मूल्यांकन के बाद वृक्ष, फसल, कुएं, भवन और अन्य अचल संपत्तियों का मूल्य निर्धारण करने में लंबा समय लग जाता था. इससे परियोजनाओं में देरी और लागत में वृद्धि की समस्या सामने आती थी.

* सात दिनों में होगा अंतिम मूल्यांकन
नई व्यवस्था के तहत भूमि सर्वेक्षण पूर्ण होने के सात दिनों के भीतर संयुक्त गणना और समिति की बैठक आयोजित करना अनिवार्य होगा. उसी अवधि में सभी अचल संपत्तियों का निष्पक्ष मूल्यांकन कर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी. इससे फाइलों के लंबित रहने की समस्या समाप्त होगी और किसानों को समय पर मुआवजा मिल सकेगा.

* समिति की संरचना
नई जिला स्तरीय समिति की अध्यक्षता जिला कलेक्टर करेंगे. इसमें जल संसाधन, लोक निर्माण, कृषि, वन, भूमि अभिलेख, नगर नियोजन एवं मुद्रांक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सदस्य होंगे. उप जिला कलेक्टर (भूमि अधिग्रहण) सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे.

* पारदर्शिता और एकरूपता पर जोर
सरकार का मानना है कि इस नई प्रक्रिया से भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता और एकरूपता आएगी. जमीन देने वाले किसानों को सात दिनों के भीतर उचित मूल्य की स्पष्ट जानकारी मिल जाएगी, वहीं अधिग्रहण एजेंसियों को भी समय पर भूमि का कब्जा प्राप्त होगा, जिससे परियोजनाएं तय समय में पूरी की जा सकेंगी.

* परियोजना लागत में कमी
भूमि मूल्यांकन में देरी के कारण अब तक परियोजना लागत बढ़ने और कार्यों में विलंब की समस्या देखी जा रही थी. समयबद्ध मूल्यांकन से वित्तीय बोझ कम होगा और विकास कार्यों को गति मिलेगी.

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