मराठवाडा में भूकंप, यवतमाल व वाशिम तक लगे झटके

नांदेड, परभणी व हिंगोली में जमीन थर्रायी, पुसद में भी दिखी दहशत

* 4.7 रिक्टर थी भूकंप की तीव्रता, भूगर्भ से 10 किमी नीचे था भूकंप का केंद्र
* भूकंप से ग्रामीण क्षेत्रों में बर्तन खडके, खिडकियों के शीशे हिले, जानोमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं
यवतमाल/हिंगोली/दि.11 – आज सुबह मराठवाडा क्षेत्र के कई शहरों में उस समय हडकंप मच गया, जब मराठवाड़ा क्षेत्र में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए. हिंगोली जिले के वसमत को भूकंप का केंद्र बताया जा रहा है, जहां सुबह करीब 8.45 बजे 4.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. भूकंप की गहराई लगभग 10 किलोमीटर बताई गई है. इन झटकों का असर परभणी, नांदेड, हिंगोली, छत्रपति संभाजीनगर सहित विदर्भ के यवतमाल एवं वाशिम जिले तक महसूस किया गया. जिसके चलते सभी स्थानों पर लोगों में दहशत का माहौल देखा गया. पुसद और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अचानक बर्तन खड़कने और खिड़कियों के शीशे हिलने से लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए. हालांकि, राहत की बात यह है कि भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण किसी प्रकार की जनहानि या संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है. इस भूकंप से किसी भी प्रकार की जनहानि या बड़े आर्थिक नुकसान की सूचना नहीं है.
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, हिंगोली जिले के वसमत तालुका के पांगरा शिंदे गांव के पास भूकंप का केंद्र रहा. इस घटना की पुष्टि लातूर स्थित भूकंप मापन केंद्र द्वारा की गई है. जिसकी जानकारी मिलते ही सभी संबंधित जिलो के जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग सक्रिय हो गए. इसके तहत संबंधित जिलाधिकारियों ने अपने अधिनस्थ तहसीलदारों और राजस्व विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं. प्रशासन ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कहीं से भी नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है. प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और सतर्क रहें. फिलहाल सौम्य भूकंप के प्रभाव में आए सभी क्षेत्रों में जनजीवन सामान्य हो रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि दोबारा झटके महसूस हों तो तुरंत खुले स्थान पर जाएं, इमारतों के अंदर न रुकें और लिफ्ट का उपयोग न करें. वहीं भूकंप के बाद सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों को देखते हुए प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें. यह एक प्राकृतिक घटना है, इसलिए शांति बनाए रखें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें. प्रशासन ने आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम तैयार रखे हैं. नागरिकों से सहयोग बनाए रखने की अपील की गई है.
* अमरावती शहर सहित जिले में भूकंप का कोई असर नहीं
जानकारी के मुताबिक मराठवाडा क्षेत्र में आए इस सौम्य भूकंप की वजह से विदर्भ क्षेत्र के यवतमाल व वाशिम जिले तक जमीन में कंपन महसूस किया गया. वहीं आज सुबह अमरावती जिले के दर्यापुर तहसील में भूकंप के झटके महसूस होने की खबर बडी तेजी के साथ फैली. जिसका हकीकत से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था. क्योंकि अमरावती जिले में आज कहीं पर भी भूकंप का कोई असर नहीं था. यह बात स्पष्ट होते ही जिले में सभी ने राहत की सांस ली.
* लातूर के किल्लारी भूकंप की याद ताजा
मराठवाड़ा में भूकंप के झटके महसूस होते ही वर्ष 1993 के लातूर के विनाशकारी भूकंप की यादें ताजा हो गईं. 30 सितंबर 1993 को आए इस भूकंप की तीव्रता 6.4 रिक्टर स्केल थी, जिसमें हजारों लोगों की जान गई थी और कई गांव पूरी तरह तबाह हो गए थे. उस भूकंप का केंद्र खिल्लारी गांव के नैऋत्य दिशा में 40 किमी की दूरी पर था और जमीन से 10 किमी की गहराई पर था. उस समय लातूर एवं धाराशिव (तत्कालीन उस्मानाबाद) जिलों में भूकंप की वजह से जबरदस्त नुकसान हुआ था. लातूर जिले के 817 व उस्मानाबाद जिले के 327 गांव प्रभावित हुए थे. जिसमें से 52 गांव पूरी तरह उद्धवस्त हो गए थे. उस समय करीब 11 हजार लोगों की मौत हुई थी और 30 हजार से अधिक लोग घायल हुए थे. खास बात यह है कि, सभी गांवों में मिट्टी व पत्थर से बनाए गए कच्चे घर थे और ऐन बारिश के मौसम दौरान आधी रात के समय भूकंप आया था. जिससे कच्चे मकान ढह कर गिर गए थे और अपने-अपने घरों में सो रहे कई लोग मारे गए थे या फिर घायल हुए थे. साथ ही जानोमाल का काफी बडा नुकसान हुआ था.                                                                                  * उत्तराखंड में भी थर्रायी जमीन
वहीं, आज शनिवार सुबह 5:02 बजे उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में भी 3.6 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए. यहां भी भूकंप का केंद्र लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर था और इस पर्वतीय क्षेत्र में भूकंप का दायरा काफी अधिक विस्तृत रहने की भी जानकारी सामने आई है. पता चला है कि, इस पर्वतीय क्षेत्र में 10 से 15 सेकंड तक भूकंप के झटके महसूस होते रहे.

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