पर्यावरण को खतरे में डालना शाश्वत विकास नहीं !
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को लगाई फटकार

नागपुर/ दि. 9 – बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने गुरूवार शाश्वत विकास के नाम पर टाइगर कॉरिडोर में विकास कार्यो का समर्थन करनेवाली राज्य सरकार को फटकार लगाई. न्यायालय ने सरकार को समझाया कि पर्यावरण और जैव विविधता को खतरे में डालना शाश्वत विकास नहीं है.
राज्य वन्यजीव मंडल द्बारा विदर्भ के लिए टाइगर कॉरिडोर निर्धारित करने के लिए संबंध में 17 अप्रैल 2025 को लिए गए निर्णय के खिलाफ पर्यावरण प्रेमी नागरिक शीतल कोल्हे और उदयन पाटिल ने जनहित याचिका दायर की है. इस पर न्यायमूर्तिद्बय अनिल किलोर और राज वाकोडे की पीठ ने सुनवाई की. इस दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील निखिल पाध्ये ने ध्यान आकर्षित किया कि टाइगर कॉरिडोर में होटल, उद्योग आदि परियोजनाओं को मंजूरी दी जा रही है. जो पर्यावरण और जैव विविधता को खतरे में डाल सकती है. इस पर जवाब देते हुए मुख्य सरकारी वकील देवेन्द्र चव्हाण ने कहा कि ये विकास कार्य कानूनी है और यह शाश्वत विकास है. इसके बाद न्यायालय ने कहा कि पर्यावरण में मानव हस्तक्षेप बढने के कारण वन्यजीव और मानव संघर्ष उत्पन्न हो रहा है और सरकार को शाश्वत विकास की परिभाषा समझाई. साथ ही इस पर ठोस उत्तर देने के लिए सरकार को 21 जनवरी तक का समय दिया. याचिकाकर्ताओं के अनुसार राज्य वन्यजीव मंडल द्बारा 17 अप्रैल 2025 की बैठक में लिया निर्णय वन्यजीवों के हित में नहीं हैं.





